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सफर भी आसान, जूते भी चमाचम: साउथ कोरिया के मेट्रो स्टेशन पर दिखा ऐसा जुगाड़; भारतीय क्रिएटर भी रह गई हैरान

दक्षिण कोरिया की साफ-सफाई और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की आदत अक्सर लोगों को हैरान कर देती है. इस बार भारतीय ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर आकांक्षा मोंगा को सियोल के एक सबवे स्टेशन पर ऐसी सुविधा दिखी, जिसे देखकर पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया. फर्श पर छोटे-छोटे छेद वाली प्लेटें लगी थीं. लेकिन जब उन्हें पता चला कि इनका इस्तेमाल जूतों से धूल और गंदगी हटाने के लिए किया जाता है, तो वह हैरान रह गईं.

सफर भी आसान, जूते भी चमाचम: साउथ कोरिया के मेट्रो स्टेशन पर दिखा ऐसा जुगाड़; भारतीय क्रिएटर भी रह गई हैरान
Image Credit: @aakanksha.monga | दक्षिण कोरिया मेट्रो में जूते साफ करने की सुविधा!

विदेश घूमने जाने पर अक्सर लोग वहां की मशहूर जगहों, खूबसूरत नजारों और खाने-पीने की चीजों को अपने कैमरे में कैद करते हैं. उनके वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं. लेकिन कई बार सफर के दौरान कोई ऐसी छोटी-सी चीज दिख जाती है, जो पूरे ट्रैवल को खास बना देती है. आकांक्षा मोंगा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में एक सबवे स्टेशन पर घूमते हुए उनकी नजर फर्श पर लगी कुछ छोटी-छोटी प्लेटों पर पड़ी. इन प्लेटों में कई छेद बने हुए थे. पहली नजर में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर इन्हें यहां क्यों लगाया गया है और लोग इनके ऊपर से होकर क्यों गुजर रहे हैं. उन्होंने अपने वीडियो में इस बात का जिक्र भी किया. आकांक्षा ने बताया कि वह स्टेशन पर चलते हुए इन प्लेटों को देखकर सोचने लगीं कि आखिर इनका काम क्या है. जब उन्हें इन प्लेटों का असली काम पता चला, तब वह हैरान रह गईं. दरअसल, उनके मुताबिक, यह सिस्टम लोगों के जूतों से धूल और गंदगी हटाने के लिए लगाया गया है.

चलते-चलते साफ हो जाते हैं जूते

आकांक्षा ने बताया कि इन प्लेटों में बने छेद किसी सामान्य डिजाइन का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने अपने वीडियो में दावा किया कि ये सक्शन होल हैं, जो जूतों पर जमा धूल और गंदगी को खींचकर साफ करने में मदद करते हैं. इसका मतलब है कि दिनभर सड़क पर चलने, अलग-अलग जगहों पर घूमने और स्टेशन तक पहुंचने के दौरान जूतों पर जो धूल जमा हो जाती है, उसे हटाने के लिए यह सुविधा काम आती है. इसके लिए किसी अलग मशीन के सामने खड़े होने या जूतों को हाथ से साफ करने की जरूरत नहीं पड़ती. लोग प्लेटों के ऊपर से गुजरते हैं और सिस्टम अपना काम करता है. आकांक्षा को यह बात इसलिए भी खास लगी, क्योंकि किसी पब्लिक प्लेस पर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए इस तरह की सुविधा के बारे में आमतौर पर हर कोई नहीं सोचता. लोग अक्सर फर्श की सफाई, कूड़ेदान और सफाई कर्मचारियों को ही साफ-सफाई से जोड़कर देखते हैं. लेकिन जूतों के साथ बाहर से आने वाली धूल को कम करने के बारे में सोचना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है.

 

 

छोटी-छोटी सुविधाओं पर दिल हार बैठीं भारतीय क्रिएटर

इस सिस्टम को देखने के बाद आकांक्षा दक्षिण कोरिया की तारीफ किए बिना नहीं रह सकीं. उन्होंने कहा कि वहां रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाली छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान दिया जाता है. उनके लिए यह सिर्फ जूते साफ करने का तरीका नहीं था, बल्कि ऐसी सोच की मिसाल थी, जिसमें लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है. उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि कोरिया में लोग छोटी-से-छोटी चीज के बारे में भी सोचते हैं और उन्हें ऐसी सुविधाएं काफी पसंद आती हैं.

पोस्ट के कैप्शन में भी आकांक्षा ने इसी हैरानी को जाहिर किया है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी के दिमाग में इस तरह का आइडिया आया कैसे. साथ ही उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उन्होंने भी अपने देश में ऐसी सुविधा देखी है या फिर वह पहली बार इसके बारे में जान रहे हैं. आकांक्षा ने यह भी बताया कि उन्हें ऐसी छोटी-छोटी व्यवस्थाएं पसंद हैं, जो किसी जगह को साफ-सुथरा बनाए रखने में मदद करती हैं. कई बार किसी शहर की अच्छी व्यवस्था सिर्फ बड़ी बिल्डिंग्स, चमचमाती सड़कों या मॉडर्न ट्रांसपोर्ट सिस्टम से नहीं बनती. वहां मौजूद छोटी-छोटी सुविधाएं भी लोगों के अनुभव को बेहतर बना सकती हैं.

सोशल मीडिया पर लोग कर रहें तारीफ

आकांक्षा का यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी खूब कमेंट्स किए. कुछ यूजर्स को यह सुविधा काफी काम की लगी, तो कुछ ने दक्षिण कोरिया की साफ-सफाई और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की आदत को सही बताया. एक यूजर ने अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि यह जानने के बाद अब उन्हें समझ आया कि वहां घंटों घूमने के बावजूद धूल को लेकर ज्यादा परेशानी क्यों महसूस नहीं हुई. यूजर ने दक्षिण कोरिया में बिताए अपने समय को याद करते हुए कहा कि वहां उनका अनुभव काफी अच्छा रहा.

एक अन्य यूजर ने इस व्यवस्था की तारीफ करते हुए लिखा कि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने का यह तरीका हैरान करने वाला है. वहीं, एक और व्यक्ति ने बताया कि वह पिछले सप्ताह ही वहां गया था. उसने भी इन प्लेटों को देखकर यही सोचा था कि शायद इनका संबंध दिव्यांग लोगों, खासकर देखने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों की सुविधा से होगा. हालांकि, उसे यह समझ नहीं आया कि इनका असल इस्तेमाल क्या है. उसने यह भी कहा कि इन पर चलने का अनुभव उसे अच्छा लगा.

दिल्ली मेट्रो का जिक्र कर भारतीय यूजर ने उठाया सवाल

इस वीडियो पर सभी प्रतिक्रियाएं सिर्फ तारीफ वाली नहीं थीं. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत में भी मेट्रो से जुड़ी कई मॉडर्न सुविधाएं मौजूद हैं और किसी व्यवस्था को विदेशी देखकर उसे बिल्कुल नया मान लेना ठीक नहीं है. एक भारतीय यूजर ने दिल्ली मेट्रो का उदाहरण देते हुए लिखा कि भारत में भी वेंटिलेशन और सफाई से जुड़ी सुविधाएं देखने को मिलती हैं. उसने आकांक्षा को सलाह दी कि किसी चीज के बारे में कंटेंट बनाने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए. उस यूजर का कहना था कि दक्षिण कोरिया की तारीफ करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन किसी सुविधा को देखकर उसके बारे में सही जानकारी हासिल करना भी जरूरी है. सोशल मीडिया पर यात्रा से जुड़े वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं. ऐसे में किसी देश या शहर के बारे में छोटी-सी जानकारी भी लोगों की राय बनाने में भूमिका निभा सकती है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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