'कमर टूट गई, लेकिन मजा आ गया:' भारत की लोकल बस में बैठी विदेशी महिला; वीडियो में बताया सफर का खास अनुभव
भारत घूमने आई विदेशी ट्रैवलर इनेस फारिया ने जब पहली बार राजस्थान रोडवेज की लोकल बस में सफर किया तो उनके लिए यह किसी एडवेंचर से कम नहीं था. बीकानेर से पुष्कर तक के सफर में उन्हें खचाखच भरी बस, सड़क पर लोगों की बहस और ड्राइवर का अंदाज देखने को मिला. टिकट के लिए उन्होंने करीब 160 रुपये खर्च किए. सफर लंबा और थकाने वाला था, लेकिन उनका कहना है कि यह अनुभव जिंदगी भर याद रहेगा.
विदेश घूमने निकलने वाले ज्यादातर लोग किसी नई जगह पहुंचने के लिए ट्रेन, टैक्सी या टूरिस्ट बस का सहारा लेते हैं. लेकिन किसी देश को करीब से जानना हो तो वहां के आम लोगों के साथ सफर करने का अपना ही मजा है. भारत आई विदेशी ट्रैवलर इनेस फारिया ने भी कुछ ऐसा ही किया.
दुनिया के कई देशों में घूम चुकीं इनेस सोलो ट्रैवलर हैं. वह हाल ही में करीब तीन महीने भारत में रहीं. इस दौरान उन्होंने राजस्थान के कई शहरों की सैर की. उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, अजमेर और पुष्कर जैसी जगहों पर घूमने के अलावा उन्होंने वाराणसी और मुंबई के सफर से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए. इसी दौरान उन्होंने राजस्थान रोडवेज की लोकल बस में बैठकर बीकानेर से पुष्कर जाने का फैसला किया. सफर पूरा होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपना अनुभव शेयर किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है.
टिकट था, फिर भी आगे बैठना पड़ा
इनेस ने अपने वीडियो की शुरुआत कुछ ऐसे अंदाज में की कि देखने वालों को समझ आ गया कि उनके लिए यह सफर बिल्कुल नया होने वाला है. उन्होंने बताया कि वह भारत में अपनी पहली लोकल बस की सवारी कर रही हैं. वीडियो में वह बताती हैं कि उनके पास टिकट था, लेकिन उन्हें सीटों पर बैठने के बजाय बिल्कुल आगे की तरफ बैठना पड़ रहा था. उनके लिए यह स्थिति थोड़ी अलग जरूर थी, लेकिन वह इसे लेकर उत्साहित भी थीं. इनेस ने यह भी बताया कि बस दोपहर ठीक एक बजे बीकानेर से रवाना हुई. उनके अनुसार, टिकट के लिए उन्हें 160 रुपये देने पड़े, जो करीब एक यूरो के बराबर है. कम खर्च में इतना लंबा सफर करना उनके लिए एक अलग अनुभव था.
बस में पैर रखने तक की जगह नहीं
बस में सफर शुरू हुआ तो इनेस को भारतीय लोकल ट्रांसपोर्ट की असली तस्वीर देखने को मिली. बस में काफी भीड़ थी और यात्रियों के बैठने की जगह भी कम पड़ रही थी. उनके लिए यह किसी टूरिस्ट बस में बैठने जैसा आरामदायक सफर नहीं था. हालांकि, इनेस ने इस परेशानी को सिर्फ शिकायत के तौर पर नहीं देखा. उनके लिए बस में मौजूद भीड़, यात्रियों की बातचीत और रास्ते में दिखने वाली रोजमर्रा की जिंदगी भारत को करीब से समझने का मौका थी. उन्होंने अपने वीडियो में इस सफर को एक मजेदार अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि बस में जो कुछ हो रहा था, वह उनके लिए नया था. यही वजह रही कि लंबे सफर के दौरान होने वाली परेशानियों के बावजूद उनका उत्साह बना रहा.
सड़क पर बहस और ड्राइवर का अलग अंदाज
इनेस को इस सफर में सिर्फ बस की भीड़ ही याद नहीं रही. सड़क पर होने वाली बहस भी उनके लिए बेहद खास अनुभव बन गई. उन्होंने बताया कि रास्ते में लोग एक-दूसरे से बहस कर रहे थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर किस बात पर इतनी चर्चा हो रही है. इनेस ने मजाकिया अंदाज में कहा कि सड़क पर होने वाली बहसबाजी शायद उनके सफर का पसंदीदा हिस्सा थी. उन्हें बस इस बात का अफसोस था कि वह लोगों की बातें समझ नहीं पा रही थीं. उन्होंने बस चलाने वाले ड्राइवर की भी तारीफ की. इनेस के मुताबिक, बस ठीक एक बजे रवाना हुई. हालांकि, सड़क पर ड्राइविंग का जो अंदाज उन्होंने देखा, वह भी उनके लिए इस यात्रा की यादों का हिस्सा बन गया.
सात घंटे बैठे रहना पड़ा भारी
इस सफर में मजा तो खूब आया, लेकिन इसकी एक परेशानी भी थी. इनेस ने बताया कि लगातार कई घंटे तक एक ही पोजिशन में बैठना आसान नहीं था. बस में पीछे झुककर आराम करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. वीडियो के साथ शेयर किए गए कैप्शन में उन्होंने बताया कि सात से आठ घंटे तक इसी तरह बैठे रहने के कारण उनकी कमर जवाब देने लगी. लंबे सफर के आखिर तक उन्हें काफी परेशानी महसूस हुई. मतलब, जिस यात्रा में उन्हें भारत की लोकल जिंदगी देखने का मौका मिला, उसी सफर ने उन्हें यह भी समझा दिया कि लंबी दूरी की यात्रा में आरामदायक सीट कितनी जरूरी होती है. कम किराये में मंजिल तक पहुंचना एक बात है, लेकिन घंटों तक बिना ठीक से आराम किए बैठे रहना दूसरी.
तकलीफ हुई, फिर भी सफर आया पसंद
इनेस के अनुभव की खास बात यही रही कि उन्होंने सफर की परेशानियों को छिपाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने एक तरफ भीड़ और बैठने में होने वाली दिक्कत बताई, तो दूसरी तरफ इस यात्रा को यादगार भी कहा. उनके लिए यह सिर्फ बीकानेर से पुष्कर पहुंचने का जरिया नहीं था. इस दौरान उन्होंने उन लोगों के बीच सफर किया, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी में लोकल बस एक अहम हिस्सा है. सड़क का माहौल, आम यात्रियों की बातचीत और सफर का अपना अलग अंदाज उनके लिए किसी नई जगह को जानने जैसा था. इनेस के वीडियो से यह भी साफ होता है कि किसी देश की यात्रा हमेशा आराम और सुविधाओं तक सीमित नहीं होती. कभी-कभी रास्ते में होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं ही सबसे ज्यादा याद रह जाती हैं.
सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आया अनुभव
इनेस का वीडियो सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी इस बात में बढ़ गई कि विदेशी पर्यटक भारत की आम जिंदगी को किस तरह देखते हैं. उनके अनुभव में जहां लोकल बस की भीड़ और लंबी यात्रा की परेशानी थी, वहीं लोगों के बीच होने वाली बातचीत और सफर का रोमांच भी था. भारत में लोकल बस से यात्रा करना यहां के लोगों के लिए भले ही रोजमर्रा की बात हो, लेकिन विदेश से आए किसी यात्री के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव हो सकता है. इनेस ने इसी अनुभव को अपने वीडियो के जरिए शेयर किया.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)