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12 नाम, 15 मिनट और 'शुक्रवार तक निकालो' का फरमान: टीम को नौकरी से निकालने के आदेश से टूटा IT मैनेजर; ऑफिस की पार्किंग में रो पड़ा

चेन्नई की एक आईटी कंपनी में काम करने वाले डिलीवरी मैनेजर का बताया जा रहा एक पोस्ट इन दिनों चर्चा में है. इसमें दावा है कि सीनियर अधिकारियों ने उसे 12 कर्मचारियों के नाम वाली Excel शीट थमाकर शुक्रवार तक सभी को नौकरी से निकालने का आदेश दिया. इनमें वे लोग भी शामिल थे, जिनके साथ उसने करीब एक दशक तक काम किया था. पोस्ट में मैनेजर ने बताया कि वह इस फैसले से पूरी तरह टूट गया.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Nov 01, 2026, 01:40 PM IST | Updated: Nov 01, 2026, 01:55 PM IST
Image Credit: प्रतीकात्मक AI इमेज
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नौकरी करना किसी के लिए सिर्फ हर महीने सैलरी पाने का जरिया नहीं होता. ऑफिस में साथ काम करने वाले लोग धीरे-धीरे परिवार जैसे बन जाते हैं. रोज की मीटिंग, देर रात तक काम, चाय पर बातचीत और मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना इस रिश्ते को मजबूत बनाता है. लेकिन जब इन्हीं लोगों को नौकरी से निकालने की जिम्मेदारी मिल जाए, तो स्थिति कितनी मुश्किल हो सकती है, इसका अंदाजा चेन्नई के एक आईटी मैनेजर के कथित पोस्ट से लगाया जा सकता है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर शेयर किए गए एक पोस्ट में मैनेजर ने बताया कि उसे सीनियर अधिकारियों ने एक बंद कमरे में बुलाया. वहां उसके हाथ में 12 कर्मचारियों के नाम वाली Excel शीट थमा दी गई. इसमें साफ कहा गया कि शुक्रवार तक सभी को नौकरी से निकालना है. हर कर्मचारी के साथ बातचीत के लिए करीब 15 मिनट तय किए गए थे.

2016 से साथ काम कर रहे थे ये कर्मचारी

पोस्ट लिखने वाले शख्स के अनुसार, ये कर्मचारी उसके लिए सिर्फ टीम के सदस्य नहीं थे. वह साल 2016 से उनके साथ काम कर रहा था. कई बार प्रोडक्शन में दिक्कत आने पर पूरी टीम रात 3 बजे तक ऑफिस में रुकी थी. देर रात साथ खाना खाना, टेक पार्क के बाहर चाय की दुकानों पर वक्त बिताना और एक-दूसरे की शादियों में शामिल होना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. मैनेजर ने लिखा कि टीम के लोग उसे 'अन्ना' कहकर बुलाते थे. तमिल भाषा में अन्ना का मतलब बड़ा भाई होता है. वह उनके बच्चों को गोद में उठा चुका था और उनके परिवारों के साथ भी उसका अच्छा रिश्ता था.उसने बताया कि जब भी कंपनी को जरूरत पड़ी, इन कर्मचारियों ने वीकेंड और छुट्टियों में भी काम किया. उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उन्हें अपने मैनेजर पर भरोसा था. लेकिन अब उसी मैनेजर को उन्हें बताना था कि कंपनी में उनकी नौकरी खत्म हो चुकी है.

किसी पर होम लोन, किसी के घर में बीमारी

इस पोस्ट का सबसे भावुक हिस्सा उन कर्मचारियों की निजी परेशानियों से जुड़ा है, जिनका जिक्र मैनेजर ने किया. उसके अनुसार, टीम के एक सीनियर डेवलपर ने महज चार महीने पहले बड़ा होम लोन लिया था. एक दूसरे कर्मचारी की मां कैंसर का इलाज करा रही थीं और परिवार कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर था. वहीं, एक अन्य कर्मचारी की पत्नी अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली थी. ऐसे में नौकरी छूटने का असर सिर्फ उस कर्मचारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी पर पड़ सकता था. मैनेजर ने सवाल उठाया कि वह शुक्रवार को इन लोगों के सामने कैसे खड़ा होगा और उनसे कैसे कहेगा कि उनका ऑफिस एक्सेस बंद कर दिया गया है, वे अपना सामान समेटें और घर चले जाएं.

 

Indian Manager Burndown🥶
by u/No-Profile-3587 in corporate

 

बड़े अधिकारी फैसले लेते हैं, बताने की जिम्मेदारी मैनेजर पर

पोस्ट में मैनेजर ने सीनियर मैनेजमेंट के रवैये पर भी नाराजगी जताई. उसका कहना था कि नौकरी में कटौती का फैसला ऊपर बैठे अधिकारी लेते हैं, लेकिन उसका सामना करने की जिम्मेदारी बीच के स्तर पर काम करने वाले मैनेजरों को दे दी जाती है. उसने लिखा कि बड़े अधिकारियों को उन कर्मचारियों के आंसू नहीं देखने पड़ते. उन्हें सिर्फ यह सुनिश्चित करना होता है कि तय समय में लोगों को बाहर कर दिया जाए. मैनेजर के मन में नौकरी छोड़ने का विचार भी आया. उसे लगा कि अगर वह इस्तीफा दे देगा, तो कम से कम उसे अपने साथ काम करने वाले लोगों को निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि अगर वह यह काम नहीं करेगा, तो कोई दूसरा मैनेजर कर देगा. इसके साथ ही परिवार की अपनी आमदनी भी बंद हो जाएगी.

Reddit पर छिड़ी सरकारी और प्राइवेट नौकरी की बहस

इस पोस्ट के सामने आने के बाद Reddit पर नौकरी की सिक्योरिटी को लेकर चर्चा शुरू हो गई. कई लोगों ने इस घटना को प्राइवेट सेक्टर में काम करने की अनिश्चितता से जोड़कर देखा. इसी दौरान एक यूजर ने सलाह दी कि ऐसी स्थिति से बचना है, तो सेंट्रल गवर्नमेंट की नौकरी हासिल करनी चाहिए. इस टिप्पणी के बाद चर्चा सिर्फ छंटनी तक सीमित नहीं रही. लोगों के बीच सरकारी और प्राइवेट नौकरी के फायदे-नुकसान पर बहस होने लगी. एक यूजर ने कहा कि प्राइवेट नौकरी में लोग ज्यादा सैलरी और बेहतर मौके के लिए आते हैं, लेकिन इसके साथ नौकरी जाने का जोखिम भी रहता है. उसने इसकी तुलना शेयर बाजार में अलग-अलग तरह के निवेश से की.

सरकारी नौकरी में भी जवाबदेही जरूरी?

हालांकि, हर यूजर सरकारी नौकरी को ही नौकरी की सुरक्षा का एकमात्र रास्ता मानने के पक्ष में नहीं था. एक टिप्पणी में कहा गया कि नौकरी की सुरक्षा का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि किसी कर्मचारी या अधिकारी से जवाबदेही की उम्मीद ही न की जाए. यूजर का कहना था कि सरकारी विभागों में भी कर्मचारियों के काम का सही आकलन होना चाहिए. अगर कोई अधिकारी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई भी होनी चाहिए. उसने यह भी कहा कि विभागीय जांच की प्रक्रिया कई बार इतनी लंबी और मुश्किल हो जाती है कि अधिकारी कार्रवाई शुरू करने से भी बचते हैं.

नौकरी के साथ इंसानी रिश्तों की भी परीक्षा

इस पूरी चर्चा में एक बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है. किसी कंपनी के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करना एक बिजनेस फैसला हो सकता है, लेकिन जिन लोगों की नौकरी जाती है, उनके लिए यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बदल देने वाला मामला होता है. वहीं, ऐसे फैसले कर्मचारियों तक पहुंचाने वाले मैनेजर भी कई बार दबाव में होते हैं. उन्हें कंपनी के आदेश और अपने साथ काम करने वाले लोगों के प्रति जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना पड़ता है. फिलहाल Reddit पर चर्चा में आए इस पोस्ट में मैनेजर और कंपनी की पहचान नहीं बताई गई है. पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है. लेकिन इसने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि ऑफिस में सालों तक साथ काम करने वाले रिश्ते आखिर कितने मजबूत होते हैं, जब एक Excel शीट में लिखे 12 नामों के सामने नौकरी खत्म करने की तारीख तय कर दी जाती है.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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