World Heart Day: टेबल टेनिस बॉल जितने छोटे डिवाइस ने मचाया तहलका, अब इंसान के सीने में धड़केगा 'अनोखा दिल'
World Heart Day पर जानिए चीन के क्रांतिकारी BrioVAD आर्टिफिशियल हार्ट के बारे में. टेबल टेनिस बॉल जितना छोटा यह मैग्नेटिक दिल अब अमेरिका और यूरोप में हार्ट फेलियर के लाखों मरीजों के लिए वरदान बन रहा है.
आज पूरी दुनिया में World Heart Day मनाया जा रहा है. इस मौके पर जहां एक तरफ दिल की बढ़ती बीमारियों और हार्ट अटैक के खतरों पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मेडिकल साइंस की दुनिया से एक ऐसी गुड न्यूज आई है जो करोड़ों दिल के मरीजों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है. आज के टाइम में खराब दिल को बदलने के लिए सिर्फ डोनर के दिल का इंतजार करने की मजबूरी धीरे-धीरे खत्म हो रही है.
पीपल्स डेली चाइना की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने एक ऐसी हाई-टेक मशीन तैयार की है, जो साइज में एक छोटी टेबल टेनिस बॉल जितनी है, लेकिन इसका काम किसी असली इंसानी दिल से कम नहीं है. BrioVAD नाम की इस Fully Magnetically Levitated डिवाइस ने अमेरिका से लेकर यूरोप तक के मेडिकल मार्केट में तहलका मचा दिया है. नीदरलैंड्स और अमेरिका के बड़े-बड़े अस्पतालों में मरीजों के शरीर में इसे सक्सेसफुली फिट किया जा चुका है. वर्ल्ड हार्ट डे के इस खास मौके पर आइए जानते हैं कि आखिर यह छोटी सी मशीन कैसे काम करती है और यह कैसे लाखों लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाल रही है.
टेबल टेनिस की बॉल जितना छोटा दिल
चीन के सुझोउ इंडस्ट्रियल पार्क के एक शो-रूम में एक छोटा सा मेटल का पंप रखा हुआ है. इसका साइज लगभग टेबल टेनिस की एक बॉल जितना ही है. यह मशीन बिना कोई शोर किए बहुत शांति से 24 घंटे लगातार चल रही है. इसके अंदर लगा हुआ मेटल का इम्पेलर बिना किसी सपोर्ट के हवा में तैरते हुए काफी हाई स्पीड से घूमता है. इस डिवाइस का नाम BrioVAD रखा गया है. यह पूरी तरह से चीन में डेवलप किया गया एक फुली मैग्नेटिकली लेविटेटेड आर्टिफिशियल हार्ट है. जब से यह डिवाइस बनी है, तब से यह बिना रुके लगातार चल रही है और अरबों बार धड़कने का सिमुलेशन पूरा कर चुकी है. वर्ल्ड हार्ट डे के दिन यह डिवाइस उन लाखों लोगों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है, जो हार्ट फेलियर की आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.
क्या है इस छोटे से दिल की खास टेक्नोलॉजी
इस डिवाइस का डिजाइन बहुत स्मार्ट और फ्यूचरिस्टिक तरीके से बनाया गया है. इसमें मोटर और मैग्नेटिक लेविटेशन सिस्टम को एक दूसरे से अलग रखा गया है. इसकी वजह से इसका ओवरऑल साइज बहुत छोटा हो जाता है, लेकिन इसके अंदर का रोटर बड़ा रहता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम स्पीड पर भी बहुत बेहतर तरीके से काम करता है. कम स्पीड में चलने की वजह से खून की कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. इससे मरीज को सर्जरी के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स और कॉम्प्लिकेशंस का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
नीदरलैंड्स और अमेरिका तक पहुंचा चीन का डंका
अमेरिका में क्लिनिकल ट्रॉयल्स की मंजूरी मिलने के बाद इस डिवाइस ने सीधे यूरोप का रुख किया. जून के महीने में नीदरलैंड्स के नामी यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर उट्रेच अस्पताल में एक मरीज के शरीर में इसे पूरी कामयाबी के साथ इम्प्लांट किया गया. इसके साथ ही इस चीनी डिवाइस ने यूरोप के मार्केट में अपनी ऑफिशियल और धमाकेदार एंट्री दर्ज करा ली. यह कामयाबी किसी एक दिन या एक महीने की मेहनत से नहीं मिली है. इसके पीछे चीन की सरकारी एजेंसियों, बड़े अस्पतालों, यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट कंपनियों की सालों की कड़ी मेहनत और रिसर्च शामिल है.
दुनिया भर में हार्ट फेलियर का बड़ा संकट
World Heart Day पर अगर हम हेल्थ आंकड़ों की बात करें तो हार्ट फेलियर पूरी दुनिया में एक बहुत ही खतरनाक बीमारी बन चुका है. अकेले चीन में 35 साल से ज्यादा उम्र के करीब 13.7 मिलियन लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. इनमें से 10 लाख से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जो बीमारी की आखिरी स्टेज पर हैं और उन्हें तुरंत दिल बदलने की जरूरत है. लेकिन अगर हम हार्ट ट्रांसप्लांट की बात करें, तो पूरे चीन में हर साल सिर्फ 1000 के आसपास ही सर्जरी हो पाती हैं. ऐसे में लाखों मरीजों के पास इलाज का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है. इसी वजह से आर्टिफिशियल हार्ट को मेडिकल वर्ल्ड का क्राउन जुएल यानी सबसे कीमती रत्न माना जाता है.
रिजेक्शन से ग्लोबल सक्सेस तक का गजब सफर
इस सुपर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं था. साल 2000 के शुरुआती दिनों में डॉक्टर चेन चेन ने अमेरिका में एक टीम को लीड करते हुए लेवाकोर नाम का पहला मैग्नेटिक आर्टिफिशियल हार्ट बनाया था. लेकिन बहुत बड़ा साइज होने की वजह से वह प्रोजेक्ट मार्केट में बुरी तरह फेल हो गया. इसके बाद भी डॉक्टर चेन ने हिम्मत नहीं हारी. जब अमेरिकन इन्वेस्टर्स ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ पीछे खींच लिए, तो डॉक्टर चेन वापस चीन लौट आए. उस वक्त पूरी दुनिया में दूसरी पुरानी टेक्नोलॉजी का बोलबाला था, लेकिन डॉक्टर चेन ने सीधे सबसे मुश्किल यानी मैग्नेटिक लेविटेशन टेक्नोलॉजी पर काम करने का बोल्ड फैसला किया.
1000 से ज्यादा मरीजों को मिल चुका है नया जीवन
डॉक्टर चेन की मेहनत आखिरकार रंग लाई और लैब का यह रिसर्च प्रोजेक्ट धीरे-धीरे अस्पतालों और मरीजों तक पहुंचने लगा. साल 2017 में एक बेहद गंभीर मरीज को यह BrioVAD आर्टिफिशियल हार्ट लगाया गया. यह चीन के मेडिकल इतिहास में एक बहुत बड़ा यू-टर्न साबित हुआ. आज वर्ल्ड हार्ट डे पर यह बताते हुए बेहद खुशी होती है कि इस कंपनी के बनाए आर्टिफिशियल हार्ट से अब तक 1000 से ज्यादा मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है और वे एक नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं.
अमेरिका के टॉप हॉस्पिटल्स में ट्रॉयल्स चालू
फरवरी 2024 में यूएस एफडीए से ऑफिशियल मंजूरी मिलने के बाद BrioVAD ने सीधे अमेरिका में अपने क्लिनिकल ट्रॉयल्स शुरू कर दिए. ऐसा करने वाला यह चीन का पहला एक्टिव इम्प्लांटेबल मेडिकल डिवाइस बन गया है. नवंबर 2024 में अमेरिका के मशहूर एमोरी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में पहली बार इसे किसी अमेरिकी मरीज के शरीर में सक्सेसफुली फिट किया गया. आज की तारीख में अमेरिका के टॉप 30 अस्पतालों में से 75 परसेंट से ज्यादा बड़े कार्डियक सेंटर इस डिवाइस के ट्रॉयल प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं और इसके रिजल्ट्स देखकर दुनिया भर के डॉक्टर्स हैरान हैं.