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इंटरनेट की दुनिया में आजकल एक नाम की ज़बरदस्त गूंज है- 'Super Intelligence' (SI). अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया कि अब हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को 'Super Intelligence' कहना चाहिए. ट्रंप के इस एक बयान के बाद स्लोवेनिया के .si डोमेन नेम की डिमांड रातों-रात 2100% बढ़ गई और सितंबर के महीने में ही 44,000 नए .si डोमेन बुक हो गए.
लेकिन जब बात इंटरनेट पर असली 'डिजिटल जमीन' बेचने की आती है, तो दुनिया के सारे रास्ते कैरेबियन सागर में बसे एक छोटे से द्वीप 'एंगुइला' (Anguilla) पर जाकर ही खत्म होते हैं. ट्रंप के 'SI' वाले नए क्रेज के बीच आज हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कैसे 16 हजार की आबादी वाला यह छोटा सा देश .ai वेब एड्रेस की बदौलत पूरी दुनिया का सबसे बड़ा और अनोखा टेक हब बनकर उभरा है. आइए समझते हैं इस अरबों डॉलर के डिजिटल जैकपॉट की पूरी कहानी.

ट्रंप का 'SI' बयान और .ai का एकतरफा राज
डोनाल्ड ट्रंप के AI को 'Super Intelligence' (SI) कहने के बाद स्लोवेनिया के .si कोड की मांग अचानक आसमान छूने लगी है. लेकिन टेक जानकारों का मानना है कि चाहे ट्रंप इसे 'SI' कहें या दुनिया इसे AI कहे, बाजार में पिछले दो सालों से जिस 2-लेटर कोड का जलवा है, वो एंगुइला का .ai ही है.
जब चैटजीपीटी और जेनेरेटिव एआई की शुरुआत हुई, तब से लेकर आज तक हर बड़ी टेक कंपनी, स्टार्टअप और सिलिकॉन वैली का इनवेस्टर अपने नाम के पीछे .ai लगाना अपनी प्रतिष्ठा की बात समझता है. यही वजह है कि ट्रंप के नए बयान के बाद भी .ai की बादशाहत कायम है और एंगुइला डिजिटल दुनिया की सबसे कीमती प्रॉपर्टी बेच रहा है.
80 के दशक की वो गलती जो आज बन गई कुबेर का खजाना
यह पूरी कहानी साल 1980 के दशक में शुरू होती है. जब इंटरनेट नया-नया आ रहा था, तब इंटरनेशनल एजेंसीज ने हर देश को उसके नाम के हिसाब से यूनिक दो अक्षरों वाला इंटरनेट एड्रेस (कंट्री कोड) दिया था. भारत को मिला .in, ब्रिटेन को .uk, अमेरिका को .us और कैरेबियन द्वीप 'एंगुइला' को उसके नाम के हिसाब से मिला .ai.
उस समय एंगुइला के लोगों को अंदाज़ा भी नहीं था कि आने वाले समय में 'AI' का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो जाएगा. यह एक ऐसी अनजानी किस्मत थी जिसने इस छोटे से द्वीप को बिना कोई फैक्ट्री लगाए दुनिया का सबसे अनोखा टेक हब बना दिया.

6.7 करोड़ रुपये में बिका सिर्फ एक नाम!
एंगुइला के इस डिजिटल दबदबे का सबसे बड़ा सबूत टेक दिग्गज और Hubspot कंपनी के को-फाउंडर धर्मेश शाह की डील है. धर्मेश शाह ने इस साल की शुरुआत में अपनी एक नई सोच के लिए you.ai नाम का वेब एड्रेस खरीदा. इसके लिए उन्होंने अमरीकी डॉलर में $700,000 यानी करीब 6.7 करोड़ रुपये चुकाए.
धर्मेश शाह का कहना है कि वे एक ऐसा AI प्रोडक्ट बना रहे हैं जिससे लोग अपना डिजिटल अवतार बना सकेंगे. इतनी भारी रकम सिर्फ दो अक्षरों के नाम के लिए मिलना यह साबित करता है कि आज टेक दुनिया में .ai नाम की कितनी ज्यादा खौफनाक डिमांड है.
8.5 लाख से ज्यादा वेबसाइट्स और 10 गुना ग्रोथ
डोमेन नेम ट्रैक करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में .ai वेबसाइट्स की संख्या 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ चुकी है. सिर्फ पिछले 12 महीनों के अंदर यह आंकड़ा दोगुना हो गया है.
साल 2020 में जहां दुनिया भर में केवल 50,000 के आसपास .ai वेबसाइट्स रजिस्टर थीं, वहीं आज यह संख्या 8.5 लाख (850,000) के पार पहुंच चुकी है. आज दुनिया का कोई भी बड़ा एआई प्रोजेक्ट एंगुइला को टैक्स दिए बिना अपनी वेबसाइट नहीं चला सकता.
तूफानों का दर्द और 'डिजिटल जमीन' का सहारा
एंगुइला की कुल आबादी सिर्फ 16,000 लोगों की है. बाकी कैरेबियन देशों की तरह इसकी पूरी अर्थव्यवस्था लग्जरी टूरिज्म (पर्यटन) पर टिकी हुई थी. हर साल अमेरिका से लाखों अमीर टूरिस्ट यहां घूमने आते हैं. पिछले साल भी रिकॉर्ड 1.11 लाख से ज्यादा लोग यहां पहुंचे थे.
लेकिन इस खूबसूरत द्वीप का सबसे बड़ा दुश्मन है समुद्री तूफान (Hurricanes). एंगुइला जिस अटलांटिक बेल्ट में है, वहां हर साल भयंकर तूफान आते हैं. साल 2017 में आए 'इरमा' तूफान ने इस द्वीप को पूरी तरह तबाह कर दिया था. ऐसे में टूरिज्म ठप होने पर देश कंगाली की कगार पर पहुंच जाता था. लेकिन .ai डोमेन की कमाई ने इस देश को आपदाओं से लड़ने का मजबूत सुरक्षा कवच दे दिया है.

सरकारी बजट का 23% हिस्सा सिर्फ डोमेन से!
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एंगुइला सरकार के आधिकारिक बजट आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में इस छोटे से द्वीप ने केवल .ai डोमेन बेचकर 10.5 करोड़ ईस्ट कैरेबियन डॉलर (लगभग 3.9 करोड़ डॉलर या 325 करोड़ रुपये) कमाए.
यह उनकी कुल सरकारी कमाई का 23% हिस्सा था. यानी देश का लगभग हर चौथा रुपया इंटरनेट पर 2 अक्षरों का नाम बेचकर आ रहा है. सरकार का अनुमान है कि 2026 तक यह कमाई बढ़कर 13.8 करोड़ ईस्ट कैरेबियन डॉलर हो जाएगी.
अमेरिकी टेक कंपनी के साथ 5 साल की सीक्रेट डील
इस भारी-भरकम ट्रैफिक और करोड़ों की कमाई को सही से मैनेज करने के लिए एंगुइला सरकार ने अक्टूबर 2024 में अमेरिका की बड़ी टेक कंपनी Identity Digital के साथ 5 साल का एग्रीमेंट किया.
ताकि तूफान या बिजली गुल होने पर पूरी दुनिया की 8.5 लाख .ai वेबसाइट्स बंद न पड़ें, इसलिए सर्वर्स को एंगुइला द्वीप से हटाकर अमेरिकी कंपनी के ग्लोबल सर्वर्स पर शिफ्ट कर दिया गया है. इससे अगर एंगुइला पर कोई प्राकृतिक आपदा आ भी जाए, तब भी वहां की 'डिजिटल दुकान' बिना रुके 24 घंटे चलती रहेगी.
कितना महंगा मिलता है एक .ai डोमेन?
अगर आप आज कोई सामान्य .ai डोमेन बुक करते हैं, तो उसकी शुरुआती कीमत $150 से $200 (लगभग 12,000 से 16,000 रुपये) के आसपास होती है. इसके बाद हर दो साल में इसे रिन्यू कराने के लिए भी इतना ही चार्ज देना पड़ता है.
लेकिन अगर कोई नाम बहुत पॉपुलर है (जैसे cloud.ai या law.ai), तो उसकी ओपन नीलामी होती है. हाल ही में cloud.ai 6 लाख डॉलर (करीब 5 करोड़ रुपये) और law.ai 3.5 लाख डॉलर में बिका है. इस पूरी कमाई का लगभग 90% हिस्सा सीधे एंगुइला सरकार के खाते में जमा होता है.
तुवालु (Tuvalu) देश की गलती से लिया बड़ा सबक
इंटरनेट डोमेन से कमाई के मामले में एंगुइला ने एक दूसरे देश की गलती से बहुत बड़ा सबक सीखा है. प्रशांत महासागर के छोटे से देश Tuvalu को .tv डोमेन मिला था.
तुवालु ने 1998 में एक अमेरिकी कंपनी को सिर्फ 2 से 5 मिलियन डॉलर सालाना के फिक्स रेट पर सारे अधिकार बेच दिए थे. बाद में जब ऑनलाइन टीवी का जमाना आया, तो उस कंपनी ने अरबों कमाए और तुवालु को मूंगफली के दाने मिले. एंगुइला ने फिक्स रेट के बजाय रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल अपनाया, जिससे हर वेबसाइट की बिक्री पर सीधे एंगुइला देश को मोटा कमीशन मिलता है.