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जापानी स्पेस एजेंसी (JAXA) ने मंगल ग्रह (Mars) के रहस्यमयी चंद्रमा 'फोबोस' (Phobos) से मिट्टी के सैंपल लाने के लिए अपना स्पेसक्राफ्ट लॉन्च कर दिया है. अगर यह मिशन सफल रहता है तो जापान दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा, जो मंगल के किसी चांद से मिट्टी उठाकर धरती पर वापस लाएगा. जापान की स्पेस एजेंसी JAXA ने एक बिना इंसान वाला (Uncrewed) स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा है. इस स्पेसक्राफ्ट का नाम है MMX यानी Martian Moons eXploration. इस मिशन का सबसे बड़ा और इकलौता मकसद है मंगल ग्रह के छोटे और चट्टानी चंद्रमा 'फोबोस' पर उतरना और वहां की मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठा करके धरती पर वापस लाना. आज तक दुनिया की किसी भी स्पेस एजेंसी ने ऐसा जोखिम भरा और मुश्किल काम नहीं किया है.
तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से हुई उड़ान
जापान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में मौजूद तनेगाशिमा स्पेस सेंटर (Tanegashima Space Center) से सुबह-सुबह जब H3 रॉकेट ने उड़ान भरी, तो आसमान में एक अलग ही रोशनी फैल गई. यह जापान के फ्लैगशिप रॉकेट H3 के लिए पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन है. हालांकि 2023 में जब इस रॉकेट को पहली बार टेस्ट किया गया था, तब इसका सेकंड-स्टेज इंजन चालू नहीं हुआ था और मिशन फेल हो गया था. लेकिन जापानी वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी. उन्होंने रॉकेट की कमियों को सुधारा और इस बार H3 रॉकेट ने एकदम परफेक्ट उड़ान भरी.
मंगल तक पहुंचने का रूट और टाइमलाइन
यह स्पेसक्राफ्ट सीधे कल या परसों मंगल ग्रह नहीं पहुंच जाएगा. अंतरिक्ष की दूरियां बहुत ज्यादा होती हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने इसका एक लंबा और सुरक्षित रास्ता तय किया है.
अगस्त 2027: जापानी MMX स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह की ऑर्बिट में प्रवेश करेगा.
लैंडिंग और सैंपल कलेक्शन: मंगल के पास पहुंचकर यह स्पेसक्राफ्ट उसके चंद्रमा फोबोस पर धीरे से उतरेगा और वहां से सैंपल उठाएगा.
2031 में वापसी: सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो यह स्पेसक्राफ्ट 2031 में मंगल ग्रह से वापस अपनी यात्रा शुरू करके धरती पर लौटेगा.
फोबोस आखिर क्या है?
मंगल ग्रह के पास दो चंद्रमा हैं - फोबोस (Phobos) और डिमोज (Deimos). MMX मिशन का पूरा फोकस फोबोस पर है. फोबोस कोई गोल-मटोल चांद नहीं है जैसे हमारी धरती का चांद है. फोबोस दिखने में एक अजीब से आकार का आलू जैसा लगता है. इसकी लंबाई 27 किलोमीटर, चौड़ाई 22 किलोमीटर और गहराई 18 किलोमीटर के आसपास है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि फोबोस मंगल ग्रह की सतह से सिर्फ 6,000 किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगाता है. यह दूरी इतनी कम है कि फोबोस एक ही दिन में मंगल ग्रह के तीन चक्कर काट लेता है.
10 ग्राम मिट्टी से खुलेगा ब्रह्मांड का सबसे बड़ा राज
आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ एक छोटे से चांद पर जाने के लिए जापान अरबों रुपये क्यों खर्च कर रहा है? असल में वैज्ञानिकों का टारगेट फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और धूल इकट्ठा करना है. जब यह 10 ग्राम मिट्टी 2031 में धरती पर आएगी, तो वैज्ञानिक लैब में इसकी गहराई से जांच करेंगे. इस मिट्टी से दो सबसे बड़े रहस्यों से पर्दा उठ सकता है:
सौर मंडल का जन्म: हमारे सोलर सिस्टम के शुरुआती दिनों में ग्रह और चांद कैसे बने थे?
फोबोस का सच: क्या फोबोस मंगल ग्रह का ही एक टूटा हुआ टुकड़ा है जो किसी एस्टेरॉयड की टक्कर से अलग हुआ था, या फिर यह कोई बाहरी एस्टेरॉयड है जिसे मंगल की ग्रेविटी ने अपनी तरफ खींच लिया था.
दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजरें जापान पर टिकीं
मंगल ग्रह पर रोवर भेजना और वहां उतरना ही अपने आप में बहुत मुश्किल माना जाता है. लेकिन किसी दूसरे ग्रह के चांद पर लैंड करके वहां से सैंपल वापस धरती पर लाना तो नेक्स्ट लेवल का काम है. नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी जैसी बड़ी संस्थाएं भी जापानी एजेंसी JAXA के इस कदम की तारीफ कर रही हैं. अगर जापान इसमें कामयाब होता है, तो फ्यूचर में इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने की राह और ज्यादा आसान हो जाएगी.