)
23 अक्टूबर को iPhone Duo की सेल शुरू हुई थी. सेल शुरू होते ही साइबर क्रिमिनल्स और स्कैमर्स का नया गैंग पूरी तरह एक्टिव हो गया है. अगर आप भी नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं या ऑनलाइन ऑफर्स पर नजर बनाए हुए हैं, तो यह खबर खास आपके लिए है. साइबर सिक्योरिटी फर्म Kaspersky की लेटेस्ट रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. स्कैमर्स फर्जी वेबसाइट्स और जबर्दस्त डिस्काउंट का लालच देकर लोगों की पर्सनल डिटेल्स चुरा रहे हैं और उन्हें बड़े वित्तीय नुकसान का शिकार बना रहे हैं.
25% डिस्काउंट और 30 मिनट का काउंटडाउन टाइमर
स्कैमर्स लोगों को फंसाने के लिए एक से बढ़कर एक तरकीबें अपना रहे हैं. Kaspersky की रिपोर्ट के मुताबिक एक अंग्रेजी भाषा की फर्जी वेबसाइट पकड़ी गई है जो दावा कर रही थी कि iPhone Duo पर 25 प्रतिशत का सीधा डिस्काउंट दिया जा रहा है.
इस वेबसाइट का लुक बिल्कुल Apple के ऑफिशियल पेज जैसा बनाया गया था ताकि कोई भी आसानी से धोखा खा जाए. हद तो तब हो गई जब उस पेज पर 30 मिनट का एक काउंटडाउन टाइमर भी लगा दिया गया. इस टाइमर का सीधा सा मतलब था लोगों के मन में डर पैदा करना कि कहीं यह ऑफर हाथ से निकल न जाए. जब इंसान जल्दबाजी में होता है, तो वह वेबसाइट का यूआरएल या सेलर की जांच करना भूल जाता है और यही गलती भारी पड़ जाती है.
बिना कार्ड डिटेल लिए भी कैसे हो रहा है फ्रॉड?
आप सोच रहे होंगे कि अगर वेबसाइट पर आपने कोई क्रेडिट या डेबिट कार्ड डिटेल नहीं डाली, तो आप पूरी तरह सुरक्षित हैं. लेकिन रुकिए, स्कैमर्स अब बहुत ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं. यह फर्जी वेबसाइट शुरुआती स्टेज में कोई पेमेंट डिटेल नहीं मांगती है. वे केवल आपका नाम, ईमेल एड्रेस, फोन नंबर और घर का पता मांगते हैं. फॉर्म सबमिट करने के बाद स्क्रीन पर मैसेज आता है कि कंपनी का मैनेजर आपसे डिलीवरी और पेमेंट की बातचीत करने के लिए खुद संपर्क करेगा. यह तरीका स्कैम को बहुत ही असली और भरोसेमंद बना देता है. लेकिन असल में आपकी डिटेल्स मिलने के बाद साइबर क्रिमिनल्स आपको टारगेट करना शुरू करते हैं.
WhatsApp पर बातचीत ले जाने का खतरनाक खेल
Kaspersky ने अपनी जांच में पाया कि कई भाषाओं में ऐसी फर्जी प्री-ऑर्डर वेबसाइट्स चल रही हैं. एक मामले में तो यूजर को भ्रमित करने के लिए दावा किया गया कि बटन दबाते ही उन्हें Apple के ऑफिशियल स्टोर पर रीडायरेक्ट कर दिया जाएगा, लेकिन असल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
पुर्तगाली भाषी यूजर्स के लिए बनाए गए एक फर्जी ऑफर में तो स्कैमर्स सीधे WhatsApp का सहारा ले रहे थे. वेबसाइट पर यूजर्स से उनके WhatsApp से जुड़े फोन नंबर और ईमेल मांगे गए ताकि वे प्रोडक्ट की उपलब्धता चेक कर सकें. एक बार जब आप अपना नंबर वहां शेयर कर देते हैं, तो आपके पास फर्जी मैसेज, फर्जी ऑर्डर कंफर्मेशन और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए बैंक अकाउंट खाली करने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं.
पुराना है स्कैमर्स का यह पैंतरा
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी बड़े फोन के लॉन्च पर इस तरह का फर्जीवाड़ा देखने को मिला हो. इससे पहले सितंबर 2025 में जब iPhone 17 लॉन्च हुआ था, तब भी Kaspersky ने ऐसी ही चेतावनी जारी की थी. उस समय भी फर्जी वेबसाइट्स, नकली लॉटरी और फ्री प्रोडक्ट टेस्टर बनने के नाम पर लोगों को ठगा गया था. उस वक्त कई वेबसाइट्स ने फोन स्टॉक खत्म होने का डर दिखाकर लोगों के बैंक कार्ड की डिटेल्स चुरा ली थीं. कुछ मामलों में तो सर्वे फॉर्म भरवाकर और फर्जी डिलीवरी फीस मांगकर लोगों के पैसे उड़ाए गए थे.
आपकी पर्सनल डिटेल्स का स्कैमर्स क्या करते हैं?
Kaspersky की सीनियर वेब कंटेंट एनालिस्ट ओल्गा अल्तुखोवा का कहना है कि जैसे ही कोई नया फ्लैगशिप फोन लॉन्च होता है, स्कैमर्स तुरंत एक्टिव हो जाते हैं क्योंकि लोगों का उत्साह उनकी सतर्कता को कम कर देता है. जब स्कैमर्स के पास आपका नाम और नंबर आ जाता है, तो वे आपके पास कस्टमर सपोर्ट बनकर कॉल करते हैं. वे आपको फर्जी ऑर्डर कंफर्मेशन, डिलीवरी अपडेट या पेमेंट फेल होने का मैसेज भेजते हैं. जब आपको लगता है कि बात आपके मनपसंद फोन की हो रही है, तो आप आसानी से उनके झांसे में आकर OTP शेयर कर बैठते हैं या किसी खतरनाक लिंक पर क्लिक कर देते हैं.
साइबर क्राइम यूनिट और पुलिस की बड़ी चेतावनी
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने भी ऐसे मामलों पर कई बार एडवायजरी जारी की है. पुलिस का कहना है कि ठग मशहूर ब्रांड्स और मोबाइल कंपनियों की हूबहू दिखने वाली फर्जी वेबसाइट्स बनाते हैं और भारी छूट का लालच देते हैं.
लोग अक्सर इन वेबसाइट्स के चक्कर में आकर पैसे दे देते हैं और बाद में उन्हें या तो कोई पुराना या खराब सामान भेज दिया जाता है या फिर डिलीवरी ही नहीं होती. कई बार हैंडलिंग चार्ज और टैक्स के नाम पर बार-बार पैसे मांगे जाते हैं. इसके अलावा आपकी डेबिट या क्रेडिट कार्ड की सेंसिटिव जानकारी डार्क वेब पर भी बेचे जाने का डर बना रहता है.
ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी ऑफर्स से बचने के आसान तरीके
अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई पूरी तरह सुरक्षित रहे और आप बिना किसी झंझट के अपना मनपसंद फोन खरीद सकें, तो कुछ बेहद जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखें.
हमेशा ऑफिशियल साइट से खरीदें: नया स्मार्टफोन या कोई भी महंगा गैजेट हमेशा कंपनी के ऑफिशियल स्टोर या फिर ऑथराइज्ड सेलर से ही खरीदें.
वेबसाइट का स्पेलिंग चेक करें: किसी भी वेबसाइट पर पर्सनल जानकारी डालने से पहले उसका URL ध्यान से पढ़ें. फर्जी वेबसाइट्स की स्पेलिंग में अक्सर छोटे-मोटे बदलाव होते हैं.
वॉट्सएप और अनजान लिंक्स से बचें: मैसेज या सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने डिस्काउंट और ऑफर्स वाले लिंक्स पर कभी भी क्लिक न करें.
सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें: अपने मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अच्छा एंटीवायरस और फिशिंग ब्लॉक करने वाला टूल ऑन रखें.
वर्चुअल कार्ड यूज करें: ऑनलाइन शॉपिंग और पेमेंट के लिए अपने मेन बैंक कार्ड की जगह वर्चुअल पेमेंट कार्ड का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित होता है.
मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें: अपने सभी फाइनेंशियल अकाउंट्स और ऐप्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हमेशा चालू रखें.