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अमेरिका-चीन का खेल खत्म! AI के नए राजा बने ये 2 छोटे से देश, जानिए भारत इस रेस में कहां खड़ा है

AI की ग्लोबल रेस में अमेरिका और चीन के अलावा बड़ा उलटफेर हुआ है. BCG की AI मट्योरिटी मैट्रिक्स 2026 रिपोर्ट के मुताबिक जापान और साउथ कोरिया नए AI लीडर्स बनकर उभरे हैं. जानिए कैसे एजेंटिक AI और रोबोटिक्स से नौकरियां बदलने वाली हैं और इस पूरी रेस में भारत कहां खड़ा है.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 26, 2026, 07:16 AM IST | Updated: Oct 26, 2026, 07:19 AM IST
Image Credit: जापान और साउथ कोरिया नए AI लीडर्स बनकर उभरे हैं.
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अगर आपको भी यही लगता है कि एआई का सारा खेल बस अमेरिका और चीन तक ही सीमित है, तो थोड़ा ठहरिए. असल में कहानी बिल्कुल बदल चुकी है. हाल ही में आई 2026 की एक नई स्टडी ने टेक की दुनिया में अचानक हलचल मचा दी है. इस रेस में जापान और साउथ कोरिया ने जिस तेजी से बाजी मारी है, उसे देखकर बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां भी हैरान हैं. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की 'एआई मट्योरिटी मैट्रिक्स 2026' रिपोर्ट में कई ऐसी बातें सामने आई हैं जो सीधे आपकी नौकरी और देश के आर्थिक भविष्य पर असर डालती हैं.

जापान और साउथ कोरिया ने कैसे मारी बाजी?
बहुत से लोग मानते थे कि टेक के मामले में कोई भी देश अमेरिका या चीन को मात नहीं दे सकता. लेकिन इस नई रिपोर्ट ने इस धारणा को काफी हद तक तोड़ दिया है. जापान और साउथ कोरिया अब उन गिने-चुने देशों में आ खड़े हुए हैं जो सीधे टेक दिग्गजों को टक्कर दे रहे हैं.

जापान की चाल: जापान ने चुपचाप अपने देश में सुपर-फास्ट कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर्स और बहुत ही साफ-सुथरे नियम तैयार कर लिए. इससे विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ा. यही वजह है कि एंथ्रोपिक जैसी नामी टेक कंपनी ने एशिया में अपना पहला दफ्तर जापान में ही खोला है.

साउथ कोरिया का दांव: साउथ कोरिया ने दूसरों से तकनीक खरीदने के बजाय खुद के एआई मॉडल बनाने पर सारा ध्यान लगाया. उनकी सरकार ने इसमें खुलकर पैसा लगाया, और नतीजा यह हुआ कि दुनिया के टॉप 5 एआई मॉडल्स में आज साउथ कोरिया का नाम शामिल है.

सिर्फ बातें नहीं, जमीन पर काम करना होगा
BCG रिपोर्ट का सीधा सा संदेश है- अब कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने का दौर खत्म हो गया. अब जीत उसी की होगी जो जमीन पर काम करके दिखाएगा. रिपोर्ट में 6 बातों को देखा गया है:

जिस देश के पास इन छह चीजों का सही तालमेल होगा, वही आने वाले दौर में टेक वर्ल्ड को संभालेगा.

क्या वाकई आपकी नौकरी पर खतरा है?
हर किसी के मन में पहला सवाल यही उठता है कि क्या एआई आने से नौकरियां चली जाएंगी? रिपोर्ट बताती है कि इसका सबसे पहला असर दफ्तरों में बैठकर काम करने वाले पेशेवरों (वाइट कॉलर जॉब्स) पर दिख रहा है. आईटी सेक्टर, बैंक, फाइनेंस और बिजनेस से जुड़ी नौकरियों का तरीका बहुत तेजी से बदल रहा है.

अब बात सिर्फ सवाल पूछने और जवाब पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि 'एजेंटिक एआई' आ चुका है. यह एआई आपके एक बार कहने पर पूरा काम खुद स्टेप-बाय-स्टेप निपटा देता है. अनुमान है कि अगले 2-3 सालों में अमेरिका जैसे देशों में लगभग आधी नौकरियों का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा.

स्क्रीन से बाहर निकलकर मशीनों में आया एआई
अब तक हम एआई को सिर्फ फोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर देखते आए थे. लेकिन अब दौर रोबोटिक्स और 'फिजिकल एआई' का है. यानी बहुत जल्द फैक्ट्रियों, सामान की डिलीवरी, गोदामों और खेतों में भी इंसानों की जगह रोबोट काम संभालते दिखेंगे.

इस मामले में भी चीन और जापान काफी आगे निकल चुके हैं. चीन ऐसे रोबोट बना रहा है जो दिखने और चलने में बिल्कुल इंसानों जैसे (ह्युमेनॉइड) हैं, जबकि जापान भारी उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले इंडस्ट्रियल रोबोट्स पर अपना कब्जा जमा रहा है.

इस पूरी दौड़ में भारत का क्या होगा?
भारत के लिए अच्छी बात यह है कि हमारे यहां टैलेंटेड युवाओं की कोई कमी नहीं है. BCG की रिपोर्ट में भी माना गया है कि भारत के पास टेक एक्सपर्ट्स की एक बड़ी फौज है. साथ ही, विदेश से लौट रहे भारतीय प्रोफेशनल्स भी देश के टेक इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं.

सरकार भी अपनी तरफ से कुछ ठोस कदम उठा रही है:

युवा एआई फॉर ऑल: लगभग 1 करोड़ लोगों तक एआई की बुनियादी समझ पहुंचाने के लिए मुफ्त कोर्स.

इंडिया-एआई फ्यूचर स्किल्स: छोटे शहरों तक लैब्स पहुंचाना और युवाओं को नई तकनीक सिखाना.

हालांकि, भारत के सामने असली चुनौती यह है कि हम इस टैलेंट का फायदा सिर्फ आईटी दफ्तरों तक सीमित न रखें. अगर हमें सच में आगे बढ़ना है तो एआई का इस्तेमाल खेती-किसानी, छोटे व्यापार और सरकारी सुविधाओं को बेहतर करने में करना होगा.

आगे क्या? बिजली और डेटा सेंटर की असली जंग
एआई के बड़े सिस्टम्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और बहुत ताकतवर डेटा सेंटर्स चाहिए होते हैं. इसलिए आने वाले समय में वही देश टिक पाएगा जहां 24 घंटे सस्ती बिजली और मजबूत डिजिटल ढांचा उपलब्ध होगा.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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