जेब पर चलेगा AI का चाबुक! अक्टूबर से दिसंबर के बीच फिर फटेगा महंगाई का बम, क्या मिडिल क्लास खरीद पाएगा मोबाइल-लैपटॉप?
AI डेटा सेंटर्स और TSMC की एडवांस पैकेजिंग की वजह से चिप्स महंगी हो रही हैं. जानिए क्या स्मार्टफोन और लैपटॉप फिर से महंगे होने वाले हैं.
अगर आप पिछले कुछ महीनों से एक नया स्मार्टफोन या गेमिंग लैपटॉप खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपने एक बात तो पक्का नोटिस की होगी- टेक प्रोडक्ट्स के रेट अचानक से हवा में बातें करने लगे हैं. पहले तो रैम और स्टोरेज के महंगे होने का रोना रोया जा रहा था, लेकिन अब इस पूरी कहानी में एक नया विलेन एंट्री मार चुका है, और उसका नाम है AI. जी हां, जिस AI से हम रोज नए-नए कारनामे करवा कर मजे ले रहे हैं, वही AI अब पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट के प्रोडक्शन का बजट बिगाड़ रहा है.
मामला यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली ताइवानी कंपनी TSMC अब अपनी खास पैकेजिंग टेक्नोलॉजी के रेट 20 परसेंट तक बढ़ाने की तैयारी में है. अब जब चिप्स बनाना ही इतना महंगा हो जाएगा, तो आप खुद सोचिए कि हमारे-आपके मोबाइल और लैपटॉप के बिल पर इसका क्या असर पड़ेगा.
मेमोरी के बाद अब AI ने बिगाड़ा चिप्स का गणित
सरल शब्दों में समझें तो ताइवान की कंपनी TSMC एक खास टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करती है जिसे CoWoS (चिप-ऑन-वेफर-ऑन-सबस्ट्रेट) कहते हैं. टेक रिपोर्ट्स बता रही हैं कि Nvidia के नए 'Blackwell' और आने वाले 'Rubin' जैसे AI प्रोसेसर्स की डिमांड मार्केट में इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि चिप्स की पैकेजिंग करने वाली फैक्ट्रियों पर तगड़ा प्रेशर आ गया है. सप्लाई कम है और डिमांड बहुत ज्यादा, इसीलिए TSMC अपनी फीस सीधे 20% तक बढ़ाने की सोच रही है. जब चिप पैकेजिंग ही इतनी महंगी हो जाएगी, तो इसका खामियाजा पूरी टेक इंडस्ट्री को भुगतना पड़ेगा.
आखिर ये AI चिप्स इतनी महंगी क्यों पड़ती हैं?
दरअसल, AI प्रोसेसर्स को बहुत ही तेज स्पीड से काम करने और डेटा ट्रांसफर करने के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की सख्त जरूरत होती है. TSMC की यह CoWoS टेक्नोलॉजी अलग-अलग प्रोसेसर्स और मेमोरी चिप्स को एक साथ जोड़कर एक सिंगल पावरफुल पैकेज में बदल देती है. उदाहरण के लिए, Nvidia की Blackwell चिप में दो बड़े GPUs और आठ HBM3E मेमोरी स्टेक्स लगे होते हैं.
अब हो यह रहा है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी टेक जायंट्स इन AI चिप्स को थोक के भाव में खरीद रही हैं. इसकी वजह से फैक्ट्रियों में नॉर्मल स्मार्टफोन्स और लैपटॉप्स के लिए साधारण चिप्स बनाने की जगह ही नहीं बच रही है. ऊपर से मुसीबत यह है कि चिप्स बनाने वाली मशीनें मिलने में भी अब 3 से 6 महीने की जगह 8-8 महीने का समय लग रहा है. जब मशीनें ही देर से आएंगी, तो प्रोडक्शन कैसे बढ़ेगा? 2026 में TSMC हर महीने 1 लाख से ज्यादा वेफर्स बना रही है और 2027 तक इसे बढ़ाकर 2 लाख से ऊपर ले जाने का प्लान है. पर इस सेटअप को खड़ा करने में जो अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं, उसकी वसूली तो कंपनियां आखिर में कंज्यूमर यानी हमसे ही करेंगी.
क्या हमारे बजट फोन्स और लैपटॉप्स तुरंत महंगे हो जाएंगे?
अगर आप एक आम मिड-रेंज स्मार्टफोन या बेसिक लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं, तो शायद तुरंत आपकी जेब पर सीधा डाका न पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि नॉर्मल डिवाइसेज में उस लेवल की महंगी पैकेजिंग इस्तेमाल नहीं होती जो AI सुपरकंप्यूटर्स में लगती है.
लेकिन हां, जो लोग आईफोन की प्रो सीरीज या सैमसंग के अल्ट्रा मॉडल्स जैसे प्रीमियम और फ्लैगशिप फोन्स के शौकीन हैं, उन्हें इसका झटका सीधा और तुरंत लगेगा. टेकआर्क (Techarc) के चीफ एनालिस्ट फैसल कावूसा का कहना है कि प्रीमियम फ्लैगशिप फोन्स में AI चिप्स जैसी ही एडवांस पैकेजिंग का इस्तेमाल होता है. इसलिए हाई-एंड फोन्स की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट सीधे तौर पर बढ़ जाएगी. इसके अलावा, एक इनडायरेक्ट असर भी होगा. जब पूरी दुनिया की सिलिकॉन और मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी AI चिप्स बनाने में व्यस्त हो जाएगी, तो नॉर्मल फोन्स और लैपटॉप्स के पार्ट्स मिलने में किल्लत होगी और ओवरऑल प्रोडक्शन महंगा हो जाएगा.
इंडियन स्मार्टफोन मार्केट की हालत
अगर आपको लग रहा है कि यह सिर्फ विदेशी मार्केट की बात है, तो जरा अपने देश के आंकड़े देख लीजिए. 2026 की शुरुआत से ही भारत में स्मार्टफोन्स की औसत कीमतों में 16% तक का उछाल आ चुका है. सबसे ज्यादा मार 10,000 रुपये से कम वाले बजट फोन्स पर पड़ी है, जिनके दाम 32% तक बढ़ गए. नतीजा यह हुआ कि सस्ते फोन्स की बिक्री में 65% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
हालात यह हैं कि इस साल जुलाई से सितंबर के बीच भारत में स्मार्टफोन की ओवरऑल बिक्री 20% तक गिर गई, जो पिछले 10 सालों में इस तिमाही का सबसे खराब प्रदर्शन है. 20 हजार से कम वाले सेगमेंट का मार्केट लगभग आधा (47%) घट चुका है, क्योंकि रेट बढ़ने की वजह से फोन्स अब महंगे सेगमेंट में चले गए हैं. आम लोग अब नए फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन से ही काम चला रहे हैं.
लैपटॉप्स की कहानी भी कम खौफनाक नहीं है
अगर आपको लगता है कि सिर्फ फोन्स का मार्केट खराब है, तो लैपटॉप्स का हाल भी देख लीजिए. आसुस इंडिया (Asus India) के कंज्यूमर एंड गेमिंग पीसी के वाइस प्रेसिडेंट अर्नोल्ड सु के अनुसार, जहां दो साल पहले किसी लैपटॉप को बनाने में मेमोरी का खर्च कुल लागत का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत होता था, वहीं अब वह बढ़कर लगभग 50% तक पहुंच गया है.
2026 की तीसरी तिमाही में लैपटॉप और पीसी के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं और अक्टूबर से दिसंबर के बीच इनमें 5 से 10 परसेंट की और तेजी आने का पूरा अनुमान है. ग्लोबल लेवल पर भी लैपटॉप और पीसी की बिक्री में 21% से ज्यादा की गिरावट आई है.