कौन हैं श्रीलंका के जेवलिन थ्रोअर रुमेश पथिरागे? नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी बनाया महारिकॉर्ड, ब्रसेल्स में जीता डायमंड लीग का खिताब, 89.04 मीटर दूर फेंका भाला
श्रीलंका के जेवलिन थ्रोअर रुमेश पथिरागे ने 89.04 मीटर के शानदार थ्रो के साथ ब्रसेल्स में डायमंड लीग का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है.
श्रीलंका के जेवलिन थ्रोअर रुमेश पथिरागे ने इतिहास रच दिया है. 89.04 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रुमेश पथिरागे ने ब्रसेल्स में डायमंड लीग का खिताब अपने नाम कर लिया. इसके साथ ही वह डायमंड लीग का खिताब जीतने वाले पहले श्रीलंकाई जेवलिन थ्रोअर बन गए हैं. ऐतिहासिक जीत के बाद रुमेश पाथिरागे ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह डायमंड लीग का खिताब जीतने वाले पहले श्रीलंकाई बनकर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं.
रुमेश पथिरागे ने इस डायमंड लीग कॉम्पिटीशन में कुल तीन बार 85 मीटर से ज्यादा का थ्रो किया. हालांकि उनकी शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. पहले प्रयास में उन्होंने 80.42 मीटर और दूसरे प्रयास में 79.73 मीटर का थ्रो किया. लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने अपना असली रंग दिखाया. रुमेश पथिरागे ने 89.04 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए सीधे लीड हासिल कर ली और आखिर तक इसे बरकरार रखा. पोलैंड के डाविड वैगनर 87.47 मीटर के नए पर्सनल बेस्ट के साथ दूसरे स्थान पर रहे. वहीं, त्रिनिदाद के केशोर्न वाल्कॉट ने 83.99 मीटर के सीजन-बेस्ट थ्रो के साथ तीसरा स्थान हासिल किया.
रुमेश पथिरागे ने ब्रसेल्स में जीती डायमंड लीग
इस जीत के बावजूद रुमेश पथिरागे का मानना है कि वह इससे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे. रुमेश पथिरागे ने कहा कि 89.04 मीटर से ज्यादा दूर थ्रो करने की क्षमता उनके अंदर है, लेकिन इस डायमंड लीग कॉम्पिटीशन के दौरान परिस्थितियां उनके लिए आसान नहीं थीं. रुमेश पथिरागे ने कहा कि वह अगले कुछ वर्षों में डायमंड लीग का रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश करेंगे. उन्होंने यह भी माना कि वह ज्यादा गर्म तापमान में प्रदर्शन करने के आदी हैं और मौजूदा परिस्थितियां उनके लिए थोड़ी मुश्किल थीं. उनकी बातों से साफ है कि 89.04 मीटर की यह जीत उनके लिए मंजिल नहीं बल्कि एक नए दौर की शुरुआत है.
रुमेश पथिरागे का मौजूदा सीजन पहले से ही बेहद शानदार रहा है. पिछले महीने ज्यूरिख डायमंड लीग में उन्होंने 92.07 मीटर का थ्रो किया था. इसके साथ वह इतिहास में सिर्फ पांचवें ऐसे जेवलिन थ्रोअर बने, जिन्होंने 92 मीटर का आंकड़ा दो बार पार किया है. रुमेश पथिरागे का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 92.62 मीटर है, जो इस सीजन का वर्ल्ड लीडिंग मार्क है. वह वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-1 पर हैं और डायमंड लीग की पांच में से चार मीट जीत चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी गोल्ड मेडल जीता था और अब ब्रसेल्स डायमंड लीग का खिताब भी उनके नाम हो गया है.
रुमेश पथिरागे के थ्रो काफी ताकतवर
रुमेश पथिरागे के दबदबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सीजन के जेवलिन थ्रो की टॉप-10 लिस्ट में उनके आठ थ्रो शामिल हैं. बाकी दो में से एक थ्रो जर्मनी के जूलियन वेबर का है. यानी इस सीजन जेवलिन थ्रो में रुमेश पथिरागे का दबदबा कितना बड़ा है, इसे सिर्फ उनकी रैंकिंग नहीं बल्कि उनके लगातार बेहतरीन थ्रो भी साबित करते हैं.
एशियन गेम्स अगला बड़ा लक्ष्य
अब रुमेश पथिरागे की नजर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि पर है. वह इस महीने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में श्रीलंका के लिए गोल्ड जीतने की कोशिश करेंगे. नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में रुमेश पथिरागे को एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. अगर वह यहां भी गोल्ड जीतते हैं, तो उनका शानदार सीजन और भी यादगार बन जाएगा.
कौन हैं रुमेश पथिरागे?
रुमेश पथिरागे का जन्म 21 मार्च 2003 को कालूतरा (श्रीलंका) में हुआ था. खास बात यह है कि उन्होंने शुरुआत में जेवलिन थ्रोअर बनने का सपना नहीं देखा था. श्रीलंका के कई युवाओं की तरह उनका पहला प्यार क्रिकेट था. कोलंबो के सेंट पीटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान रुमेश पथिरागे ने क्रिकेट में तेज गेंदबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई. अंडर-18 लेवल के एक पेस टैलेंट प्रोग्राम में उन्होंने 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी. वह अपने एज ग्रुप के तेज गेंदबाजों में शामिल थे. हालांकि बाद में एथलेटिक्स ने उन्हें आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता दिया. रुमेश पथिरागे के पिता खुद डिस्कस थ्रो और शॉट पुट खेल चुके थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे को थ्रोइंग इवेंट्स में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया.
कोच टोनी प्रसन्ना का रहा बड़ा रोल
रुमेश पथिरागे ने साल 2017 में जेवलिन थ्रो की ट्रेनिंग शुरू की. उनके करियर में कोच टोनी प्रसन्ना की अहम भूमिका रही है. रुमेश पथिरागे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कोच टोनी प्रसन्ना ने ही उन्हें जेवलिन थ्रो से परिचित कराया. रुमेश पथिरागे के मुताबिक कोच हमेशा उन्हें बेसिक्स मजबूत करने और सही तकनीक पर काम करने की सलाह देते हैं. रुमेश पथिरागे के लिए टोनी प्रसन्ना सिर्फ कोच नहीं हैं. वह उन्हें खेल के साथ-साथ जीवन से जुड़ी बातें भी सिखाते हैं.
क्रिकेट की जगह जेवलिन थ्रो में बनाया करियर
रुमेश पथिरागे के शुरुआती सफर में क्रिकेट की भूमिका काफी अहम रही. किशोरावस्था में वह करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे और अंडर-18 लेवल पर 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचे थे. वह उस लेवल पर श्रीलंका के क्रिकेटर ईशान मलिंगा से पीछे रहे थे. ईशान मलिंगा श्रीलंका और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए क्रिकेट खेलते हैं. रुमेश पथिरागे ने अंत में क्रिकेट के बजाय जेवलिन थ्रो में अपना करियर बनाया और अब उसी खेल में वह श्रीलंका के इतिहास का सबसे बड़ा नाम बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.