SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Exclusive: 'झंडू' नाम और पोलियो की बीमारी का मजाक उड़ाते थे लोग, कॉमनवेल्थ के बाद पैरा एशियन गेम्स में भी मेडल जीतकर देगा जवाब

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने 'Zee News' के साथ Exclusive बात की है. झंडू कुमार ने बताया कि किस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी में सबसे मुश्किल दौर देखा है.

Reported By Tarun Verma Written By Tarun Verma
Published: Sep 04, 2026, 10:46 AM IST | Updated: Sep 04, 2026, 11:00 AM IST
Image Credit: Jhandu Kumar
Join

लोग उसके नाम 'झंडू' और पोलियों की बीमारी को लेकर मजाक उड़ाते थे, लेकिन फिर भी उसके इरादे इतने फौलादी थे कि आज पूरा देश उसे सलाम कर रहा है. बचपन में पोलियो हुआ और फिर आर्थिक तंगी भी झेली. घर चलाने के लिए सब्जी बेची और यहां तक कि ई-रिक्शा तक चलाना पड़ा. झंडू कुमार ने हर मुश्किल हालात देखे, लेकिन उसने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया. झंडू कुमार जिंदगी में बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़े.

आज झंडू कुमार भारत के सफल पैरा एथलीट्स में शुमार हैं. पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने अगस्त में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 190 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता था. झंडू कुमार का अब अगला टारगेट 18 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए एक बार फिर मेडल जीतना है. Zee News के साथ खास बातचीत में झंडू कुमार ने कई बड़े खुलासे किए हैं.

सवाल: 18 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले एशियन पैरा गेम्स के लिए आप (झंडू कुमार) किस लेवल की तैयारी कर रहे हैं और कौन आपका कट्टर विरोधी होगा.

जवाब: एशियन पैरा गेम्स के लिए तैयारी बहुत अच्छी चल रही है और इसी में हम लगे हुए हैं. इस बार बहुत अच्छा करूंगा. कॉम्पिटीशन के लिए तैयारी बहुत तेजी से चल रही है, जिसकी वजह से मेरे पास ज्यादा समय भी नहीं रहता. एशियन पैरा गेम्स में चीन, इजिप्ट और मलेशिया के पैरा पावरलिफ्टर्स हमें चुनौती दे सकते हैं.

सवाल: तो इस बार उम्मीद कर सकते हैं कि आप अपने कॉमनवेल्थ गेम्स के ब्रॉन्ज मेडल को एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल में बदल सकते हैं?

जवाब: जी हां जरूर... मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगा और जितना हो सके पावरलिफ्टिंग में अपना जोर लगाऊंगा, क्योंकि ये खेल ही ताकत का है. मैं भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश करूंगा.

सवाल: एशियन पैरा गेम्स की तैयारी के लिए अभी आप कहां ट्रेनिंग कर रहे हैं?

जवाब: मैं इन दिनों गांधीनगर (गुजरात) में 15 सेक्टर में स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग कर रहा हूं. हमें यहां पर भारत सरकार की तरफ से लेटेस्ट ट्रेनिंग किट और बढ़िया डाइट मिलती है. ट्रेनिंग सेंटर में फिजियो और मसाजर उपलब्ध हैं. ट्रेनिंग सेंटर में जिम की भी सुविधा उपलब्ध है. ट्रेनिंग सेंटर में एथलीट्स को वेज और नॉन वेज दोनों ऑप्शंस में बेहतरीन डाइट मिलती है. हर दिन खाने के मेन्यू में तरह-तरह की वैरायटी वाली डिशेज होती हैं.

सवाल: आपने पहले शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन में हाथ आजमाया. आखिर ऐसा क्या हुआ कि आपने पैरा पावरलिफ्टिंग में अपना करियर बनाने का फैसला किया?

जवाब: सबसे पहले मैंने शॉट पुट और डिस्कस थ्रो गेम के बारे में पता किया था. उस समय हमारे कुंदन पांडे भैया थे, उन्होंने हमें रास्ता दिखाया. उसके बाद जब मैं पटना में स्टेट लेवल के लिए खेलने आया तो वहां हमारे एक संदीप भैया ने मुझे बताया कि आप पावरलिफ्टिंग भी कर सकते हो. संदीप भैया ने इसके बाद मुझे वीडियो दिखाए कि पावरलिफ्टिंग ऐसे ही होता है. इसके बाद मैंने पावरलिफ्टिंग करना शुरू कर दिया. फिर मुझे पावरलिफ्टिंग का कोई कोच नहीं मिल पा रहा था, लेकिन जल्द ही गौतम सिंह मिले जो पावरलिफ्टिंग के बेहतरीन कोच हैं. गौतम सिंह पावरलिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग के बहुत अच्छे ट्रेनर हैं.

सवाल: बिहार सरकार ने आपको कितना सपोर्ट किया है?

जवाब: बिहार सरकार ने मुझसे वादा किया है कि वह मुझे 'बी ग्रेड' की नौकरी देंगे और कुछ पुरस्कार राशि भी देंगे. बिहार सरकार पहले के मुकाबले अब बहुत ज्यादा हम एथलीट लोगों के लिए काम कर रही है. बिहार सरकार ने एथलीट्स के लिए उड़ान और उत्कर्ष जैसी स्कीम निकाली हैं. बिहार सरकार स्टेट लेवल के खिलाड़ी को 3 लाख, नेशनल लेवल के खिलाड़ी को 5 लाख और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी को 20 लाख रुपये की स्कॉलरशिप दे रही है.

सवाल: लोग आपका मजाक उड़ाते थे. क्या उन तानों ने कभी आपको कमजोर किया या फिर वही चीजें आपकी ताकत बन गई?

जवाब: मैं साल 2023 की एक कहानी बताता हूं. बिहार के हमारे कोच एक कॉम्पिटीशन से तुरंत पहले अस्पताल में भर्ती हो गए थे. हमारा नई दिल्ली में एक कॉम्पिटीशन था. हमारी बिहार की टीम नई दिल्ली में कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेने के लिए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में पहुंची. इसके बाद वहां सिर्फ हमारी बिहार टीम को बुलाया गया और जो वहां का स्टाफ था, नेशनल करवाने वाला उन्होंने हमें गलत तरीके से ट्रीट किया गया. वहां हमसे बार-बार कहा गया, 'आप कितना करोगे, आप क्या करने आए हो यहां और आप तो क्वालिफाई भी नहीं कर सकते हो.' इसके बाद हमें वहां पर काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है. हमें अच्छा नहीं लगा कि एक खिलाड़ी होकर हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया गया था. उस बात को मैंने दिल पर ले लिया और उसे अपनी सफलता और प्रदर्शन में बदल दिया. जब भी किसी ने मेरे नाम 'झंडू' को लेकर मजाक उड़ाया हैं, उन्हें मैंने अपने प्रदर्शन से जवाब दिया है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

तरुण वर्मा ज़ी न्यूज़ हिंदी डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं. तरुण वर्मा फरवरी 2021 से ज़ी न्यूज का हिस्सा हैं. तरुण वर्मा किसी भी मैच का बारीकी से विश्‍लेषण करने में माहिर हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी ख़बरों के विभिन्न एंगल्स पर साइड स्टोरीज़ करने के अलावा खिलाड़ियों पर स्‍पेशल पैकेजेस बनाने में बहुत रुचि है. क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी ज़ी न्यूज़ के पाठकों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी तरुण वर्मा बख़ूबी निभाते हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट खेलने, किताबें पढ़ने और घूमने का बहुत शौक है. तरुण वर्मा साल 2016 में गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज का इंटरव्यू कर चुके हैं. तरुण वर्मा खेलों के कई बड़े-बड़े इवेंट्स को कवर करने का अनुभव रखते हैं. ज़ी न्यूज़ से जुड़ने से पहले तरुण वर्मा इंडिया टुडे ग्रुप मीडिया (Aajtak.in) संस्थान का भी हिस्सा रह चुके हैं. आप Tarun.Verma@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. तरुण वर्मा एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES