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Vishalakshi Temple Varanasi: मणिकर्णिका घाट के पास स्थित है ये चमत्कारी शक्तिपीठ, जाने इसका पूरा इतिहास

इस खबर में हम काशी के प्रसिद्ध विशालाक्षी मंदिर के इतिहास, पौराणिक मान्यताएं और इसकी महिमा के बारे में डिटेल से बताएंगे. साथ ही ये भी जानेंगे कि ये शक्तिपीठ क्यों इतना खास है और यहां से आस-पास और कहां घूम सकते हैं.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 25, 2026, 04:08 PM IST | Updated: Oct 25, 2026, 05:14 PM IST
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काशी में ऐसे कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं जिनकी दुनियाभर में अपनी अलग पहचान है. इन्हीं मंदिरों में से एक मां विशालाक्षी का मंदिर है.

ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. माना जाता है कि यहां जो दर्शन करने आता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

आज हम इस खबर में मां विशालाक्षी के मंदिर के बारे में डिटेल से बताएंगे.

मंदिर का इतिहास

पौराणिक कथाओं की मानें तो जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तो  सबको बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के अंगों को अलग-अलग कर दिया था.

जिसके बाद माता के कानों के कुंडल यहां काशी में गिर गए थे. यही कारण है जिसकी वजह से इस जगह को महाशक्तिपीठ का दर्जा मिला है.

लोगों का मानना है कि ये आदिकाल से है. समय-समय पर राजाओं और संतों द्वारा मंदिर के कमजोर हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया जाता रहा है.

मणिकर्णिका घाट और मंदिर का नाता

ये प्राचीन मंदिर वाराणसी के मीरघाट इलाके के पास स्थित है. जो मणिकर्णिका घाट के बेहद पास है.

जैसा कि हम जानते हैं मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में सबसे पवित्र श्मशान घाट में से एक है. जहां लोगों को मोक्ष मिलता है.

ये मंदिर और घाट मिलकर जीवन, मृत्यु और मुक्ति के उस शाश्वत चक्र को दिखाते हैं. यहां आने वाले भक्त जीवन और मृत्यु को बड़े करीब से महसूस करते हैं.

भय का नाश करने वाली देवी

विशालाक्षी का अर्थ बड़े नेत्रों वाली देवी होता है. मां विशालाक्षी को भय का नाश करने वाली और समस्याओं को खत्म करने वाली देवी माना जाता है.

कहा जाता है कि जो भी भक्त मंदिर आकर सच्चे मन से पूजा करता है, उसके मन से सारे डर दूर हो जाते हैं.

नवरात्र में भक्तों का भारी सैलाब इकट्ठा हो जाता है. लड़कियां यहां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए भी आती हैं.

मंदिर में देवी को सिंदूर, फूल और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है.

आस-पास और कहां घूमें

अगर आप इस मंदिर का दर्शन करने जा रहे हैं, तो आप इसके बहुत ही पास बसे काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का दर्शन कर सकते हैं.

इतना ही नहीं अन्नपूर्णा देवी का मंदिर और प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट भी यहां से पैदल दूरी पर मौजूद हैं.

शाम के समय में आप दशाश्वमेध घाट की भव्य आरती देख सकते हैं. जो आपके ट्रिप को और बेहतर बना देगी.

श्रद्धालुओं के लिए क्यों खास है ये यात्रा?

काशी हर सनातनी के लिए बेहद खास शहर है. यहां जाने का सपना हर किसी का होता है.

विशालाक्षी मंदिर में मिलने वाली शांति और पॉजिटिव एनर्जी इंसान के मन की सारी समस्याओं को मिटा देती है.

साथ ही ये ट्रिप आपको जीवन को देखने का नया नजरिया देगी.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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