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Pushya Nakshatra 2026 Date: ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को अति पवित्र माना गया है. धार्मिक मान्यताओं में यह नक्षत्र समृद्धि, शुभता और उन्नति से संबंधित है जिसके कारण इसमें खरीदारी, निवेश, व्यापार से जुड़े काम करना शुभ माना गया है. नए काम की शुरुआत के लिए ज्यादातर बार पुष्य नक्षत्र को ही चुना जाता है. आइए जानें सोम पुष्य नक्षत्र कब है, यह क्यों खास है और इस दिन सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए कौन से 5 काम करें.
ध्यान दें, चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग 1 दिन संचरण करता है और फिर अगले नक्षत्र में गोचर कर जाता है. चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस दिन वही नक्षत्र मान लिया जाता है. इस तरह इस बार 5 अक्टूबर को सोमवार के दिन दोपहर 12:13 बजे चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर जाएगा. इस तरह इस दिन पुष्य नक्षत्र मान्य होगा. इस बार पुष्य नक्षत्र पर सोमवार दिन का संयोग होने के कारण यह सोम पुष्य नक्षत्र कहलाएगा.
ज्योतिषीय मान्यताओं में पुष्य नक्षत्र को बहुत महत्व दिया गया है. इसमें शुभ कार्यों को करना बहुत अच्छा माना जाता है. इन नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता देवगुरु बृहस्पति है जो ज्ञान, धर्म, विस्तार और समृद्धि के कारक हैं. यह कारण है कि पुष्य नक्षत्र को धन प्राप्ति और उन्नति के लिए शुभ माना जाता है. पुष्य नक्षत्र कई धार्मिक परंपराओं में 'नक्षत्रों का राजा' कहा गया है. इस नक्षत्र में शुरू किए गए काम का फल लंबे समय तक प्राप्त होता है और काम स्थिरता बनी रहती है. पुष्य नक्षत्र में सोना-चांदी, आभूषण, वाहन और दूसरे जरूरी और महंगे सामान खरीद सकते हैं. हालांकि पितृपक्ष चल रहा है तो नई चीजें खरीदना वर्जित है लेकिन इस नक्षत्र में पूजा उपासना कर शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं.
सोम पुष्य नक्षत्र के दिन सुबह स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें और सबसे पहले अपने इष्ट देव की पूजा करें.
सोमवार दिन और पुष्य नक्षत्र का संयोग है तो इस दिन भगवान शिव की पूजा जरूर करें व शिवलिंग पर जल अर्पित करें.
धन-समृद्धि की कामना पूर्ति के लिए इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें.
पुष्य नक्षत्र की सुबह और शाम नियम से घर में दीपक जलाएं. घर में सुख-समृद्धि आएगी.
जरूरतमंद व्यक्तियों में भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करें.
5 अक्टूबर को सोमवार दिन है और इसी दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी हो रहा है. ऐसे में सोमवार दिन के स्वामी भगवान शिव है. वहीं पुष्य नक्षत्र में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है. इस तरह इस दिन विधि-विधान से पूजा करने वाले को एक साथ शिव जी, विष्णु जी और मां लक्ष्मी कृपा पाई जा सकती है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)