SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Radha Kund Snan 2026: कब है राधाकुंड स्नान और क्या है निशिता काल में नहाने का मुहूर्त? यहां जानें

Radha Kund Snan 2026 Date: कार्तिक माह के कृष्ण की अष्टमी तिथि पर गोवर्धन स्थित राधाकुंड में स्नान करने से निःसंतान पति-पत्नी को संतान सुख प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन हजारों दंपत्ति राधाकुंड में आकर निशिता काल में स्नान करते हैं.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 27, 2026, 10:53 PM IST | Updated: Oct 27, 2026, 10:57 PM IST
Join

Radha Kund Snan 2026 Date: भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के धाम यानी मथुरा में गोवर्धन के पास राधाकुंड स्थित है. इस राधाकुंड के लिए भक्तों में बड़ी आस्था है जहां हर साल कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि पर लोग हजारों-हजार की संख्या में स्नान के लिए आते हैं. यही कारण है कि इस तिथि को राधाकुंड स्नान के नाम से जाना जाता है. ऐसे शादीशुदा जोड़े जो संतान का सुख नहीं पा सके हैं वो राधाकुंड पहुंचकर स्नान करते हैं जिससे उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है. आइए इससे जुड़े नियम और मुहूर्त जान लें.

राधाकुंड स्नान 2026 कब है?

राधाकुंड स्नान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर की जाएगी. कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि 1 नवंबर, रविवार को दोपहर के समय 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी और तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर के समय 1 बजकर 10 मिनट पर होगा. हालांकि स्नान के मुहूर्त के आधार पर राधाकुंड स्नान 1 नवंबर को है.

राधाकुंड स्नान 2026 मुहूर्त क्या है?

राधाकुंड स्नान का मुहूर्त रात का होता है. ऐसे में निशिता काल में स्नान का मुहूर्त आधी रात को होगा. इस तरह स्नान 1 नवंबर की रात के 11:37 बजे से लेकर 2 नवंबर की आधी रात को 12:29 बजे तक किया जा सकेगा.

पूजा के नियम

स्नान से पहले साफ कपड़े पहने और पूजा करें. इससे पहले सामग्री जुटाएं.
पूजा के लिए दीपक, धूप, रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और स्वच्छ जल लें.
राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और मन को शांत रखें.
राधाकुंड में उतर कर श्रद्धा से संतान सुख की प्राप्ति की प्रार्थना करें.

राधाकुंड स्नान का महत्व

जिस पति-पत्नी को संतान प्राप्ति नहीं हो पा रही है ऐसे दंपत्ति जब राधाकुंड में स्नान करते हैं तो राधारानी संतान प्राप्ति की उनकी मनोकामना को पूर्ण करती हैं. निशीता काल में दंपत्ति कुंड के जल में खड़े होते हैं और कूष्मांड यानी कुम्हड़ा को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर राधारानी को समर्पित करते हैं. लोक मान्यता है कि इन नियम और विधियों के अनुसार स्नान और पूजा करे तो संतान की प्राप्ति होती है. संतान की प्राप्ति के बाद अगली बार दंपत्ति संतान के साथ आकर फिर से विधि-विधान से कुंड में स्नान करते हैं और मन ही मन राधारानी का धन्यवाद करते हैं

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES