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कैलाश पर्वत पर कब तांडव करते हैं महादेव? जानें शिव पूजा के लिए क्यों खास है यह काल

भगवान शिव के तांडव (नृत्‍य) को बहुत आमतौर पर प्रलय और संहार से जोड़ा जाता है, जबकि महादेव प्रसन्‍न मुद्रा में भी तांडव करते हैं. धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार एक विशेष समय पर शिव जी कैलाश पर्वत पर तांडव करते हैं.

कैलाश पर्वत पर कब तांडव करते हैं महादेव? जानें शिव पूजा के लिए क्यों खास है यह काल
Image Credit: प्रदोष काल में भगवान शिव के कैलाश पर्वत पर तांडव करने की धार्मिक मान्‍यता है. (Photo:AI)

देवी-देवताओं की पूजा में अर्पित की जाने वाली सामग्री, विधि, मंत्र, आरती अलग होते हैं, वैसे ही उनकी पूजा का समय भी अलग होता है. आज 23 अक्‍टूबर 2026, शुक्रवार को प्रदोष व्रत है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस व्रत की पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है इसलिए इसका व्रत का नाम प्रदोष व्रत रखा गया है. हर महीने की दोनों त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. आइए जानते हैं इस व्रत और काल का महत्‍व.  

कब होता है प्रदोष काल?

प्रदोष काल दिन और रात के मिलन का वो समय होता है, जब दिन ढल रहा होता है और रात की शुरुआत हो रही होती है. यानी कि सूर्यास्त के आसपास के समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है. इस समय में शिव जी की पूजा करना विशेष शुभ माना गया है. मान्‍यता है कि इससे मन को शांति मिलती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है.

प्रदोष काल में तांडव करते हैं शिव जी

नटराज यानी नृत्‍य के अधिपति शिव को लेकर पौराणिक मान्‍यताएं हैं कि वे प्रदोष काल में कैलाश पर्वत पर प्रसन्‍न मुद्रा में तांडव करते हैं. इस कारण इस समय में की गई पूजा-प्रार्थना भोलेनाथ जल्‍दी सुनते हैं. भगवान शिव के नटराज स्‍वरूप और नृत्‍य को सृष्टि की निरंतर गति और परिवर्तन का प्रतीक भी माना जाता है.

आज है शुक्र प्रदोष व्रत

अक्‍टूबर महीने का आखिरी प्रदोष व्रत आज 23 अक्‍टूबर, शुक्रवार को आश्विन शुक्‍ल त्रयोदशी को है. शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है.

त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 23 अक्टूबर को दोपहर 02:35 बजे से
त्रयोदशी तिथि का समापन: 24 अक्टूबर को दोपहर 01:36 बजे तक

प्रदोष काल में शिव पूजा का समय: शाम 5:44 से रात 8:16 बजे तक
(अलग-अलग शहर में समय में कुछ बदलाव हो सकता है)

(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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