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नवरात्र के छठवे दिन मां कात्‍यायनी का मिलेगा आशीर्वाद, पूजा में पढ़ें ये मंत्र, आरती, चालीसा और कथा

आज शारदीय नवरात्रि के छठे दिन यानी षष्ठी तिथि को नवदुर्गा के छठे रूप मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. साथ ही आज हरा रंग पहनना शुभ रहेगा. यहां पढ़ें मां कात्‍यायनी की आरती, मंत्र, स्‍तुति, कथा और चालीसा.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 15, 2026, 01:37 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 01:43 PM IST
Image Credit: मां कात्‍यायनी की पूजा में शहद अर्पित करें, साथ ही मंत्र-आरती करें. (Photo:AI)
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नवरात्र के 6वे दिन मां कात्‍यायनी को समर्पित है, जो कि साहस, वीरता देने वाली देवी हैं. 4 भुजाएं वाली मां कात्‍यायनी तलवार धारण करने वाली और सिंह की सवारी करने वाली देवी हैं. मां कात्‍यायनी की पूजा में हरे रंग के कपड़े पहनकर करें. साथ ही उन्‍हें चांदी या मिट्टी के पात्र में शहद अर्पित करें. साथ ही पूजा में मां कात्‍यायनी का मंत्र पढ़ें, आरती करें. चालीसा और कथा पढ़ें.

मां कात्‍यायनी का मंत्र : ''ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥''

मां कात्‍यायनी की स्तुति : चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना.
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

मां कात्यायनी की आरती

जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी ।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।

झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।

जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

मां कात्‍यायनी का चालीसा

॥ दोहा ॥

जय कात्यायनी माँ,जय महिषासुर मारिणी।सुर नर मुनि आराधित,जय मंगल करिणी॥

॥ चौपाई ॥

जय जय अंबे जय कात्यायनी।जय महिषासुर घातिनी दानी।।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥

रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा। मां कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।कात्यायनी माँ सबके बासय॥

भय, संकट हरिणी तुही माता।भक्तों के दुःख हरती आपा॥
जो कोई तेरी शरण में आवे।मनवांछित फल वह नर पावे॥

ध्यान धार जो कोई नारी।कात्यायनी पूर्ण सुखकारी।।
कुमारी पुजा जो नित ध्यावें।अविवाहित जीवन न बितावे॥

हलर युग में मां तू सहाय।जो भी भक्त करे मन लाय॥
कात्यानी मां तेरी महिमा।सतयुमग त्रेता हो या द्वापर।।

सिंह सवारी मां भवानी।जय-जय-जय अम्बे भवानी॥

मां कात्यायनी की कथा

मां कात्‍यायनी का जन्‍म महर्षि कात्‍यायन के घर हुआ था इसलिए उनका नाम कात्‍यायनी पड़ा. महर्षि कात्‍यायन, कात्‍य गोत्र से थे. उन्‍होंने मां भगवती को प्रसन्‍न करने के लिए कठोर तप किया. साथ ही वरदान मांगा कि मां उनके घर पुत्री रूप में जन्‍म लें. मां भगवती महर्षि कात्‍यायन की भक्ति और तपस्या से प्रसन्न हुईं. इसके बाद उन्‍होंने उनके घर जन्‍म लिया, जिससे उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है. पूजा-विधि, मंत्र और रीति-रिवाजों में क्षेत्र एवं परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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