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Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि पर रखा जाता है. इस व्रत में शिव जी और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. इस साल कार्तिक माह की मासिक शिवरात्रि 7 नवंबर को है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से मां पार्वती और भोलेनाथ की पूजा करते हैं उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है. आइए जानें कार्तिक मासिक शिवरात्रि पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन-से 3 अचूक उपायों कर सकते हैं.
व्रत रखने की तिथि: 7 नवंबर 2026, दिन शनिवार
चतुर्दशी तिथि कब शुरू होगी: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि का समापन कब: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
निशिता काल में पूजा का शुभ मुहूर्त: 7 और 8 के बीच की रात यानी 7 नवंबर की रात 11:28 बजे से लेकर 8 नवंबर की रात 12:17 बजे तक
उपाय- 1
अगर आपके बच्चे को पढ़ाई करने में मन नहीं लग रहा है तो या वह पढ़ाई करते समय एकाग्र नहीं हो पाता है तो मासिक शिवरात्रि के दिन एक सरल उपाय अपने बच्चे से करवाएं या खुद ही कर दें. इस दिन स्नान आदि करें और एक शांत जगह पर, पूजा वाली जगह पर या शिव मंदिर में आसन लगाकर बैठ जाएं. इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें. मंदिर में है तो पाठ के बाद शिवलिंग पर चंदन का टीका लगाएं. जल्द ही इस उपाय के शुभ परिणाम दिखेंगे.
उपाय-2
अगर आपको बात-बात पर तेज गुस्सा आता है, गुस्से पर काबू पाना मुश्किल होता है तो मासिक शिवरात्रि के दिन एक छोटा सा उपाय कर लें. इस दिन शिव मंदिर जाकर शिव जी की पूजा करें और उन्हें जौ के आटे से बनी रोटियां भोग के रूप में अर्पित करें. ऐसा भी कर सकते हैं कि जौ के कुछ दाने शिवलिंग पर अर्पित कर दें.
उपाय- 3
मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन शिव जी को अगर सच्चे मन से नारियल अर्पित करें और सूखे मेवों का भोग चढ़ाएं तो इस उपाय से जल्द ही शुभ परिणाम प्राप्त होंगे. इस उपाय को करने से आपके बच्चे आपके सभी काम में पूरी मदद करेंगे और उनके साथ आपका रिश्ता और बेहतर होगा.
'ॐ शिवाय नमः'
'ॐ महेश्वराय नमः'
'ॐ शंभवे नमः'
'ॐ पिनाकिने नमः'
'ॐ शशिशेखराय नमः'
'ॐ वामदेवाय नमः'
'ॐ विरूपाक्षाय नमः'
'ॐ कपर्दिने नमः'
'ॐ नीललोहिताय नमः'
'ॐ शंकराय नमः'
(Disclaimer : यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है. व्रत-उपाय अपनाने से पहले अपने कुल-परंपरा और विद्वानों से सलाह अवश्य लें. अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार ही पूजा करें.)