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लंका से सीधे अयोध्या क्यों नहीं गए भगवान राम? इन 7 जगहों पर लैंड हुआ था पुष्पक विमान, आखिरी वाली पर रो पड़े थे भरत

Pushpak Viman 7 Landing Places: रावण का वध करने के बाद भगवान राम लंका से सीधे अयोध्या नहीं गए थे. समय की कमी के चलते वे पुष्पक विमान गए से गए लेकिन कई जगह रुकते-रुकते गए थे.

लंका से सीधे अयोध्या क्यों नहीं गए भगवान राम? इन 7 जगहों पर लैंड हुआ था पुष्पक विमान, आखिरी वाली पर रो पड़े थे भरत
Image Credit: भगवान राम के लंका से अयोध्‍या वापसी का रूट. (Photo: AI)

भगवान राम ने दशहरे के दिन रावण का वध किया और फिर ठीक 20 दिन बाद दिवाली के दिन अयोध्‍या पहुंचे थे. जबकि प्रभु राम ने लंका से अयोध्‍या तक का सफर पुष्‍पक विमान से तय किया था, जिसके लिए कहा जाता है कि वो मन की गति जितना तेज चलता था. यानी कि टेक्‍नीकली भगवान राम को कुछ ही देर में अयोध्‍या पहुंच जाना चाहिए था, फिर आखिरकार उन्‍हें इतने दिन क्‍यों लगे? रावण वध के बाद लंका से अयोध्‍या के बीच उन्‍होंने क्‍या-क्‍या किया और उनका विमान कहां-कहां रुका?

रावण वध के बाद पूरे किए ये काम

लंकापति रावण का वध करने और लंका पर विजय पाने के बाद भगवान राम ने लंका में रुककर कई जरूरी काम किए. जैसे रावण का विधि-विधान से अंतिम संस्‍कार करवाया. फिर माता सीता को अशोक वाटिका से लेकर आए. महीनों बाद उनसे मुलाकात की. फिर रावण के छोटे भाई विभीषण का लंका के राजा के रूप में राजतिलक किया. इसके बाद उन्‍होंने लंका से अयोध्‍या की ओर वापसी की.

खत्‍म होने वाला था वनवास का समय

ये सारे कार्य पूरे करते हुए भगवान राम का वनवास काल पूरा होने को था. ऐसे में उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द अयोध्‍या पहुंचना था, वरना एक दिन की देरी होने पर नंदीग्राम में भाई भरत अग्नि समाधि ले लेते. ऐसे में विभीषण ने भगवान राम, लक्ष्‍मण और सीता जी को कुबेर के पुष्‍पक विमान से वापस भेजा, जो मन की गति से चलता था.

7 जगह रुके प्रभु राम

समय कम होने के बाद भी भगवान राम सीधे नहीं गए बल्कि रास्‍ते में 7 जगह रुकते हुए अयोध्‍या वापस पहुंचे थे, इसलिए उन्‍हें वापसी में समय लगा था. वे कुछ जगहें माता सीता को दिखाना चाहते थे और वापसी के समय कुछ विशिष्‍ट लोगों से मिलना चाहते थे. हालांकि अलग-अलग शास्‍त्रों में भगवान राम के रुकने की जगहों के वर्णन में कुछ अंतर है. फिर भी प्रमुख तौर पर ये जगहें थीं-

1. मुन्नेश्वरम और रामेश्‍वरम् : माना जाता है कि यहां पर उन्‍होंने रावण वध के बाद ब्राह्मण हत्या के दोष से मुक्ति के लिए पूजा की थी. वहीं धनुषकोड़ी / रामेश्वरम में भी भगवान राम ने शिव जी की पूजा की थी क्‍योंकि लंका युद्ध से पहले भी प्रभु राम ने यहां शिव पूजा की थी.

2. किष्किंधा : यहां वे अपने मित्र वानर राज सुग्रीव से मिलने गए थे और सीता जी को बताना चाहते थे उन्‍हें वापस पाने में वानरों ने क्‍या योगदान दिया था.

3. दंडक वन और चित्रकूट : वे दंडक वन में अगस्त्य मुनि से मिलने उनके आश्रम भी गए थे. साथ ही चित्रकूट में भी मुनियों से मिले, जहां उन्‍होंने अपने वनवास काल का काफी समय बिताया था.

4. प्रयागराज (त्रिवेणी संगम): प्रयागराज में उन्होंने त्रिवेणी संगम में स्नान किया था.

5. भारद्वाज मुनि का आश्रम (श्रृंगवेरपुर): यहां पर उन्होंने भारद्वाज मुनि के आश्रम में विश्राम किया था.

6. गंगा तट पर निषाद राज से मिलन : अयोध्‍या के करीब गंगा नदी के दूसरे किनारे पर अपने प्रिय मित्र निषाद राज से मिले. साथ ही माता सीता ने यहां गंगाजी की पूजा-अर्चना की थी.

7. नंदीग्राम में भरत मिलाप : इसके बाद वे अंतत: नंदीग्राम पहुंचे जहां वे अपने प्रिय भाई भरत जी से मिले, जहां भरत जी अपने भाई राम की चरण पादुकाएं को पूजते हुए राजकार्य चला रहे थे. यहां राम और भरत का मिलाप बेहद भावुक था. लंबे इंतजार के बाद अपने भाई को देखकर भरत जी रो पड़े थे. फिर इसके बाद दिवाली के दिन भाई भरत के साथ भगवान राम अयोध्या पहुंचे. जहां सारे अयोध्‍यावासी दीप जलाकर उनके स्‍वागत में खड़े थे. 

(Disclaimer: यह जानकारी वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और स्थानीय लोक मान्यताओं पर आधारित है. विभिन्न ग्रंथों में पुष्पक विमान के मार्ग और पड़ावों को लेकर अलग-अलग विवरण मिल सकते हैं.) 
 

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About the Author

Shraddha Jain

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पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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