क्यों खाली रह गया था ओरछा के चतुर्भुज मंदिर का गर्भ गृह? जानिए इसका धार्मिक महत्व और इतिहास
इस खबर में हम ओरछा के प्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर के बारे में जानेंगे. साथ ही ये भी बताएंगे कि इस मंदिर को किसने और कब बनवाया था.
भारत में ऐसे हजारों मंदिर हैं जिसकी वास्तुकला को देखने के लिए लोग दुसरे देश से भी चले आते हैं. लेकिन आज हम ऐसे कमाल के मंदिर के बारे में बताएंगे, जिसे देखकर आपको लगेगा कि आप किसी महल में आ गए हैं.
इस मंदिर का नाम चतुर्भुज है. जो भगवान विष्णु के नाम पर रखा गया है. इस मंदिर में लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं.
आज हम इस खबर में चतुर्भुज मंदिर के बारे में डिटेल से जानेंगे.
किसने बनवाया था ये मंदिर?
चतुर्भुज मंदिर को बनवाने की शुरुआत ओरछा के बुंदेला राजा मधुकर शाह ने 1558 ईस्वी में की थी. ये जानकारी पर्यटन मंत्रालय में दर्ज है.
कहा जाता है कि राजा अपनी पत्नी के लिए ये मंदिर बनवा रहे थे. लेकिन ये मंदिर उनके राजा रहते हुए नहीं बन पाया था.
राजा मधुकर शाह के बेटे राजा वीर सिंह देव ने इस मंदिर का काम पूरा करवाया था.
भगवान राम की मूर्ति से जुड़ी है यह अनोखी धार्मिक कथा
इस मंदिर के बनने के पीछे एक दिलचस्प मान्यता है. रानी गणेशकुंवरी भगवान राम की परम भक्त थीं और वे अयोध्या से श्री राम की एक बहुत ही सुंदर मूर्ति लेकर आई थीं.
नियम के अनुसार भगवान राम की इस मूर्ति को इसी चतुर्भुज मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में स्थापित किया जाना था.
लेकिन मंदिर का निर्माण पूरा होने से पहले रानी ने उस मूर्ति को कुछ समय के लिए अपने महल में रख दिया था.
पौराणिक मान्यताओं है कि एक मूर्ति जहां स्थापित हो गई तो उसे नहीं हटाना चाहिए. इसलिए उस मूर्ति को नहीं हटाया गया.
देश का इकलौता मंदिर जहां राजा के रूप में पूजे जाते हैं राम
मूर्ति वहीं रह जाने की वजह से रानी महल को ही आगे चलकर प्रसिद्ध राम राजा मंदिर बना दिया गया.
यही वजह है कि ओरछा का यह इकलौता ऐसा धाम है जहां भगवान राम की पूजा भगवान के रूप में नहीं, बल्कि यहां के राजा के तौर पर की जाती है.
मूर्ति महल में ही रह जाने के कारण चतुर्भुज मंदिर का मुख्य गर्भ गृह लंबे समय तक खाली रह गया था.
बाद में इस मंदिर में भगवान विष्णु और राधा-कृष्ण के स्वरूप की पूजा की जाने लगी.
344 फीट ऊंचा मंदिर
ये मंदिर भारतीय वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है जो जमीन से करीब 344 फीट की ऊंचाई पर बना है.
इसकी बनावट उत्तर भारत की नागर शैली के साथ-साथ मुगल और यूरोपीय शैलियों का अनूठा मेल दिखाती है.
मंदिर का लेआउट क्रॉस शेप में है, जो भगवान विष्णु की चार भुजाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था.
इसकी दीवारों और गुंबदों पर की गई बारीक नक्काशी और कमल के फूलों के डिजाइन देखते ही बनते हैं.
छत से दिखता है ओरछा का नजारा
अगर आप मंदिर जाएंगे तो अंदर जाने के लिए आपको 67 खड़ी सीढ़ियां चढ़नी होंगी. मंदिर के बड़े-बड़े दीवारों को देखकर लोग हैरान हो जाते हैं.
अगर आप मंदिर के छत पर जाएंगे तो आपको ओरछा शहर और पास से गुजरती बेतवा नदी का नजारा दिखाई देगा जो बहुत खूबसूरत होता है.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी ऐतिहासिक साक्ष्यों, पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है.