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क्यों महान दानवीर राजा नृग को बनना पड़ा था छिपकली? जानें श्रीकृष्ण से जुड़ी ये कथा

हिंदू धर्म में दान देने को महापुण्य माना गया है, लेकिन दान में अनजाने में हुई एक भूल भी पाप बन सकती है. इस खबर में हम आपको राजा नृग की कहानी के बारे में डिटेल से बताएंगे.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 24, 2026, 03:01 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 03:24 PM IST
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हिंदू धर्म में दान देने को सबसे ज्यादा पुण्य का काम बताया गया है. लेकिन दान देते समय कुछ ऐसी गलतियां हो जाती है, जिसकी वजह से आपके ऊपर पाप चढ़ सकता है.

इसका सबसे अच्छा उदाहरण पौराणिक कथाओं के राजा नृग हैं. ये बहुत ही बड़े दानवीर थे. लेकिन उनकी एक भूल की वजह से सारे पुण्य बर्बाद हो गए थे, और उन्हें छिपकली बनना पड़ा था.

इस खबर में हम आपको बताएंगे कि आखिर ऐसी कौन-सी गलती थी, जिसकी वजह से एक महादानी राजा को छिपकली बनना पड़ा.

कौन थे दानवीर राजा नृग?

राजा नृग की बात करें तो ये एक दयालु और दानवीर राजा थे. उनके राज्य के लोग भी उनसे बहुत प्यार करते थे.

गरीब और जरूरतमंदों का हमेशा ख्याल रखते थे. उनका एक नियम था जिसमें वो ब्राह्मणों को गाय दान किया करते थे.

अपने पूरी जिंदगी में उन्होंने लाखों गायों का दान किया था. राजा का कहना था कि उनके धन का सही इस्तेमाल बस धार्मिक कार्यों और दूसरों की भलाई में ही हो सकता है.

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और दान के इसी नियम में उनसे एक बहुत बड़ी भूल हो गई.

राजा नृग से हुई भूल

कथा का जिक्र श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंध में मिलती है. जिसमें रोज की तरह उन्होंने एक गाय किसी ब्राह्मण को दान में दी थी. वो गाय भटककर वापस राजा की गौशाला में आकर मिल गई.

अब राजा को ये बात पता नहीं चली. उन्होंने अगले दिन वो गाय किसी और ब्राह्मण को दान में दे दी.

अब होना क्या था. पहले ब्राह्मण ने जब दुसरी के पास अपनी गाय देखी, तो गुस्सा हो गया. फिर दोनों न्याय के लिए राजा के पास गए.

कोई भी ब्राह्मण गाय छोड़ने को तैयार नहीं हुआ

राजा को सच पता चला तो उनको अपने भूल का एहसास हुआ. दोनों से उन्होंने माफी मांगी. अब राजा भी क्या कर सकते थे.

उन्होंने मामला सुलझाने के लिए एक गाय के बदले हजार गाय देने की बात बोली. लेकिन दोनों ब्राह्मण पीछे नहीं हटे.

उनका कहना था कि दान में जो मिली है उसपर बस उनका अधिकार है. राजा नृग चाहकर भी इस विवाद का हल नहीं निकाल सके.

यमलोक में मिला दंड और बने विशाल छिपकली

आगे जाकर राजा नृग की मृत्यु हो गई. यमराज के सामने जब उनके कर्मों का हिसाब हुआ, तो उनके असंख्य पुण्यों के साथ एक गाय को दो बार दान देने की भूल भी सामने आई.

यमराज ने उनसे पूछा कि वे पहले अपने पुण्य का फल भोगना चाहते हैं या पाप की सजा. राजा नृग ने पहले अपनी गलती की सजा भुगतना स्वीकार किया.

जिसके बाद उन्हें एक विशाल छिपकली का रूप मिला और वे जंगलों के एक सूखे कुएं में गिर गए.

भगवान श्रीकृष्ण ने किया राजा नृग का उद्धार

कई युग बीत जाने के बाद द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र वन में खेल रहे थे. प्यास लगने पर वे कुएं के पास पहुंचे, तो उन्होंने अंदर एक भयानक और बड़ी छिपकली देखी.

उन्होंने उसे निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे. इसके बाद उन्होंने श्रीकृष्ण को बुलाया.

भगवान श्रीकृष्ण ने जैसे ही अपना हाथ बढ़ाकर उस छिपकली को छुआ, वह तुरंत एक दिव्य पुरुष में बदल गए.

श्रीकृष्ण के स्पर्श से राजा नृग का पापकर्म कट गया और उन्होंने भगवान को प्रणाम कर बैकुंठ लोक की ओर प्रस्थान किया.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी श्रीमद्भागवत महापुराण, पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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