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करवा चौथ का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए एक बहुत ही खास दिन होता है. महिलाएं इस पर्व पर पूरे दिन का निर्जला व्रत रखती हैं और फिर शाम के समय सोलह श्रृंगार कर करवा माता की पूजा करती है. ध्यान दें इस दिन व्रत व पूजा से जुड़े कुछ जरूरी नियमों और बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह से व्रत अधूरा न रह जाए और न तो बीच में व्रत गलती से भी खंडित हो. आज महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा है. आइए जानें कि करवा चौथ पर अगर चांद देखने के लिए देर तक इंतजार करना पड़े या सामग्री न हो या फिर मिट्टी का करवा टूट जाए तो क्या करें.
चांद का इंतजार करते-करते थक गए तो लेकिन दर्शन नहीं हुए तो किसी बात के लिए जल्दबाजी न करें, जैसे कि जल्दबाजी में पूजा शुरू न कर दें या खाना न खा लें. चांद देखने की पुष्टि जब तक अच्छे न हो जाए या आप खुद भी चंद्र दर्शन न कर लें तब तक व्रत में ही रहे और सब्र बनाए रखें. एक लापरवाही या गलतफहमी आपके व्रत को खंडित कर सकती है. उतावलेपन में बार-बार छत पर चढ़ना-उतरना करने से थकान और भूख भी बढ़ सकती है. ऐसे में किसी आरामदायक जगह पर बैठे और कथा सुने गीत सुने या गाए. भगवान के नाम का जाप करें. इस तरह धैर्य बना रहेगा और समय भी कट जाएगा. थाली, दीपक और छलनी पहले से सजा लें, पूजा में जल्दबाजी न करें. माना जाता है कि व्रत में धैर्य रखना चाहिए और मन को भी शांत रखना चाहिए.
करवाचौथ की पूजा में अगर मिट्टी का करवा टूट जाए तो क्या करें? इससे जुड़े नियमों को जानना जरूरी है. अगर हो सके तो दूसरे करवा को गंगाजल से शुद्ध करके इस्तेमाल में लाएं. मिट्टी का दूसरा करवा न हो तो पूजा वाले पीतल, तांबा या चांदी के लोटे का इस्तेमाल करें. उस पर कलावा बांधें और रोली से स्वास्तिक बनाकर पूजा करें. वहीं करवा टूटने के लिए माता गौरी और भगवान गणेश जी से क्षमा मांगे. प्रार्थना करें कि भगवान आपकी पूजा को स्वीकार करें. इसके बाद पूजा स्थल से टूटे हुए करवा तो सम्मान पूर्वक हटा दें. झाड़ू से न हटाएं, ऐसा करने से दोष लग सकता है. अगले दिन टूटे करवा को जल में विसर्जित कर दें या गमले में डाल दें.
करवाचौथ की पूजा सामग्री छूट जाए, जैसे- अक्षत, सींकें, सिंदूर, रोली, छलनी या भोग से जुड़ी कोई सामग्री छूट जाए तो घबराएं नहीं बल्कि कुछ नियमों का पालन करें. शास्त्रों के नियमों के अनुसार जो सामग्री नहीं है उसकी जगह पर भगवान को पीले अक्षत या फूल चढ़ाएं और उस सामग्री का नाम लेकर कहें उस सामग्री की जगह यह अक्षत या पुष्प स्वीकार करें. ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं. अगर कोई सामग्री न भी हो तो भी शुद्ध मन से पूजा को संपन्न करें. भगवान प्रसन्न होंगे.
पूजा और अर्घ्य देते समय अगर लगे कि कोई सामग्री छूट गई है तो उसके दोष से बचने के लिए पूजा संपन्न होने पर भगवान से क्षमा मांगे. प्रार्थना मंत्र का जाप करते हुए अगली सुबह जरूरतमंद या सुहागिन ब्राह्मणी को सुहाग सामग्री दान करें और दक्षिणा दें.
(यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है. स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें. व्रत-पूजा के नियम परिवार और पंडित के अनुसार भिन्न हो सकते हैं.)