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कार्तिक मास का चमत्कार! फूल सूंघने से रानी हुई गर्भवती, बूढ़ी औरत बनी धनवान! ये कथा पढ़ते ही पूरी होगी इच्छाएं

Kartik Maas Ki Katha: कार्तिक मास में भगवान विष्णु, भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्‍मी की पूजा करने के साथ इस महीने की कथा पढ़ने का बड़ा महत्‍व है. धार्मिक मान्‍यता है कि कार्तिक मास में रोज यह कथा पढ़ने से इच्‍छाएं पूरी होती हैं.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 30, 2026, 11:03 AM IST | Updated: Oct 30, 2026, 11:13 AM IST
Image Credit: कार्तिक महीने की कथा. (Photo:AI)
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कार्तिक मास 27 अक्‍टूबर से प्रारंभ हो चुका है और 24 नवंबर तक चलेगा. इस दौरान रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान करने, भगवान विष्‍णु की पूजा करने के साथ-साथ यह कथा भी पढ़ें या सुनें तो विशेष पुण्‍य प्राप्‍त होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कार्तिक मास की कई कथाएं हैं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की ये कथा सबसे ज्‍यादा प्रचलित है, जो कार्तिक मास में पूजा-तप के चमत्‍कारिक फल को दर्शाती है. यहां पढ़ें कार्तिक मास की संपूर्ण कथा के बारे में.

कार्तिक मास की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहती थी. वह हर साल कार्तिक महीने में नियमित रूप से सुबह सूर्योदय के पहले गंगा स्‍नान करती थी और व्रत भी रखती थी. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण रोज उसके घर आते और उसके लिए एक कटोरे में खिचड़ी रख जाते थे. जिसे खाकर महिला का व्रत पूरा हो जाता था.

उसी गांव में उसके घर के पास एक दूसरी महिला भी रहती थी. उसे बुजुर्ग महिला से जलन होती थी. वह मन ही मन सोचती थी कि इस बूढ़ी औरत का कोई सहारा नहीं है, फिर भी इसे रोज खाने के लिए खिचड़ी कैसे मिल जाती है. एक दिन बुजुर्ग महिला हमेशा की तरह सुबह-सुबह कार्तिक स्नान के लिए गंगा चली गई. उसके जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण उसके घर आए और रोज की तरह खिचड़ी का कटोरा रखकर चले गए. तभी उसकी पड़ोसन की नजर उस कटोरे पर पड़ी. उसने देखा कि घर में कोई नहीं है तो वह खिचड़ी उठाकर घर के पीछे फेंक आई.

(यह भी पढ़ें: कार्तिक मास में हर दूसरे दिन बड़ा व्रत-त्‍योहार, देखें कार्तिक मास 2026 का पूरा कैलेंडर)

कुछ देर बाद जब बुजुर्ग महिला स्नान करके लौटी तो उसे घर में खिचड़ी नहीं मिली. वह बहुत परेशान हुई और बार-बार यही कहने लगी कि मेरी खिचड़ी कहां चली गई और मेरा कटोरा किसने गायब कर दिया? लेकिन उसे खिचड़ी नहीं मिली.

इसके कुछ ही दिन बाद जिस जगह पड़ोसन ने खिचड़ी फेंकी थी, वहां एक पौधा उग आया. उस पौधे पर दो सुंदर फूल खिले. एक दिन वहां से एक राजा गुजर रहे थे. उनकी नजर उन फूलों पर पड़ी तो उन्होंने दोनों फूल तोड़ लिए और महल ले जाकर रानी को दे दिए. रानी ने जब उन फूलों को सूंघा तो कुछ समय बाद वह गर्भवती हो गईं. निर्धारित समय पूरा होने पर रानी ने दो पुत्रों को जन्म दिया. दोनों राजकुमार धीरे-धीरे बड़े होने लगे, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से बातचीत नहीं करते थे.

एक दिन राजा के साथ दोनों राजकुमार भी शिकार के लिए गए और उसी रास्‍ते से निकले जहां बुजुर्ग महिला का घर था. वह आज भी अपने खोए हुए कटोरे को याद करके कहती रहती थी कि मेरी खिचड़ी कहां गई और मेरा कटोरा कहां चला गया? महिला की बात सुनकर दोनों राजकुमार तुरंत जवाब देते हैं कि हम ही तुम्हारी खिचड़ी हैं और हम ही तुम्हारा कटोरा हैं.

राजा यह सुनकर दंग रह गया कि दोनों राजकुमार जो कभी नहीं बोले थे, बुजुर्ग महिला से कैसे बोलने लगे. तब राजा ने महिला को राजमहल बुलवाया और उससे पूछा खिचड़ी वाला मामला पूछा. तब बुजुर्ग महिला ने राजा को बताया कि वह हर साल कार्तिक महीने में व्रत रखती थी. भगवान श्रीकृष्ण उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर रोज उसके लिए खिचड़ी भेजते थे. लेकिन एक दिन जब वह गंगा स्नान करके लौटी तो खिचड़ी का कटोरा गायब था. वह काफी देर तक उसे ढूंढती रही और यही कहती रही कि मेरी खिचड़ी और मेरा कटोरा कहां चला गया?

इसके बाद दोनों राजकुमारों ने उसे बताया कि उसकी पड़ोसन ने खिचड़ी को घर के पीछे फेंक दिया था. उसी जगह दो फूल खिले थे, जिन्हें राजा अपने महल ले आए थे. रानी ने उन फूलों को सूंघा और उन्हीं से दोनों राजकुमारों का जन्म हुआ. उन्होंने बताया कि भगवान ने उन्हें उसी बुजुर्ग महिला के लिए भेजा है. यह पूरी बात जानकर राजा बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने बुजुर्ग महिला को अपने महल में रहने के लिए जगह दी और उसका पूरा ध्यान रखने का आदेश दिया. इसके साथ ही महिला धनी हो गई और सुख पूर्वक रहने लगी.

(Disclaimer: यह जानकारी पौराणिक ग्रंथों, कार्तिक माहात्म्य और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि जानकारी साझा करना है. किसी भी पूजा, व्रत या उपाय को करने से पहले अपने धर्म गुरु या पंडित से सलाह अवश्य लें.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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