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घर से भागा बेटा-बेटी तो कर दिया जीते जी श्राद्ध! गुस्से में किए पिंडदान का क्‍या होता है नतीजा

घर से भागे बेटे या बेटी से नाराज होकर कुछ परिवार उनका जीते जी श्राद्ध-पिंडदान कर देते हैं. इस तरह जीवित लोगों के श्राद्ध-पिंडदान को लेकर आचार्य क्‍या कहते हैं और पुराणों में क्‍या उल्‍लेख है और क्या गुस्से में किया गया यह कर्म शास्त्रीय विधान है.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 02, 2026, 12:06 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 12:10 PM IST
Image Credit: जीवित व्‍यक्ति का श्राद्ध करना उचित या अनुचित, क्‍या कहते हैं शास्‍त्र और विशेषज्ञ. (Photo: AI)
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''आज से हमारे लिए वह मर गया…'' घर से भागे बेटे या बेटी के लिए अक्‍सर गुस्से में ऐसे शब्‍द कह देते हैं. लेकिन कई लोग इससे एक कदम आगे जाकर उनका पूरी तरह भावनात्‍मक त्‍याग कर देते हैं और उनका श्राद्ध-पिंडदान तक कर देते हैं. हाल ही में प्रयागराज में एक ऐसा मामला आया, जिसमें लड़की 15 साल से जिसे भाई मानकर राखी बांध रही थी, उसी से उसने शादी कर ली. नाराज परिवारजनों ने लड़की का श्राद्ध-पिंडदान कर दिया. इसी तरह जून महीने में झारखंड के गिरिडीह में भी लव मैरिज करने वाली लड़की के परिजनों ने उसका श्राद्ध-पिंडदान कर दिया था.

आमतौर पर अब तक साधु-संन्‍यासी जीते जी अपना श्राद्ध-पिंडदान करते हैं या वो लोग अपना श्राद्ध कर्म कर देते हैं, जिनका कोई उत्‍तराधिकारी नहीं होता है. लेकिन क्‍या जीते जी श्राद्ध, पिंडदान करना सही है. उस पर गुस्‍से में आकर किसी का श्राद्ध करना. ऐस्‍ट्रोलॉजर से जानते हैं कि किसी जीवित व्‍यक्ति का इस तरह श्राद्ध करना कितना सही है और शास्‍त्रों में क्‍या उल्‍लेख मिलता है.

जीवित व्‍यक्ति का श्राद्ध

ऐस्‍ट्रोलॉजर आचार्य डॉ.विक्रमादित्‍य कहते हैं कि ये परिजनों का गुस्‍से में किया गया भावनात्‍मक त्‍याग है, लेकिन इसके लिए आप बेटा-बेटी के जीवित रहते उनका श्राद्ध-पिंडदान कर दें इसकी शास्‍त्र आज्ञा नहीं देता है. जरा सोचिए, यदि बेटा-बेटा वापस आ गए और उन्‍होंने माफी मांग ली. परिवारजनों ने भी उन्‍हें फिर से अपना लिया तो क्‍या अब उनका पुर्नजन्‍म कराओगे. ऐसे में जीवित व्‍यक्ति का श्राद्ध करना तर्कहीन और बेमतलब है.

यहां तक कि जो संन्‍यासी भी जीवित रहते अपना श्राद्ध करते हैं, वह भी कितना सही है यह सोचने वाली बात है क्‍योंकि कई बार वे वापस गृहस्‍थ जीवन में आ जाते हैं. दरअसल, संन्‍यासियों द्वारा दीक्षा लेते समय अपने सांसारिक जीवन का प्रतीकात्‍मक त्‍याग करते हुए अपना श्राद्ध-पिंडदान कर देते हैं.

जीते जी अपना श्राद्ध करना

गरुड़ पुराण में उल्‍लेख मिलता है कि जिन लोगों के परिवार में कोई नहीं बचा है तो उनकी मृत्‍यु के बाद उनका श्राद्ध-पिंडदान कौन करेगा? ऐसे में वे कुछ विशेष स्‍थानों पर जाकर स्‍वयं अपना श्राद्ध-पिंडदान कर सकते हैं.

इसे लेकर आचार्य विक्रमादित्‍य कहते हैं कि कई बार बुर्जग अपने परिवार से जुड़े किसी आचार्य, संस्‍था, मंदिर या अन्‍य करीबी व्‍यक्ति को भी ऐसी जिम्‍मेदारी दे जाते हैं कि मरने के बाद वे उनका श्राद्ध-पिंडदान कर दें. क्‍योंकि इसका पूरा फल मरने के बाद किए गए अनुष्‍ठानों से ही मिलता है. हम लोग भी इस तरह से कई लोगों के लिए कार्य करते हैं.

गुमे हुए लोगों का श्राद्ध-पिंडदान

ऐसे परिजन जो कई साल से लापता हैं, जिनके बारे में कोई खोज-खबर नही हैं, कई साल बाद उन्‍हें मृत मानकर उनका श्राद्ध-पिंडदान किया जा सकता है. ताकि यदि उनकी मृत्‍यु हो गई है तो उन्‍हें मुक्ति मिल सके.  आचार्य विक्रमादित्‍य कहते हैं कि इसके लिए शास्‍त्रों में विधि भी बताई गई है. जैसे किसी ऊंचे पहाड़ पर जाकर 5 बार उस परिजन का नाम लेकर चिल्‍लाना यदि जवाब न आए तो उसका श्राद्ध-पिंडदान करना. ऐसा पुराने समय में होता था, अभी लोग अखबारों में विज्ञापन देकर या लंबे समय तक परिजन को खोजने के बाद ऐसा कर सकते हैं.

(Disclaimer: यह लेख धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यताओं और आचार्य के विचारों पर आधारित है. श्राद्ध-पिंडदान की विधि विभिन्न परंपराओं में अलग हो सकती है. किसी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने कुलाचार और योग्य आचार्य से सलाह लें.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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