बूढ़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर: जहां पीढ़ियों से अटूट है भक्तों का विश्वास, जानिए क्यों खास है ये 1500 साल पुराना दरबार
मध्य प्रदेश में जबलपुर के चारखंबा स्थित 1500 साल पुराने बूढ़ी खेरमाई मंदिर के इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में इस खबर में जानेंगे. साथ ही यहां की अनूठी परंपराओं की पूरी कहानी भी बताएंगे.
भारत कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने प्राचीन होने के वजह से पूरे देश में जाने जाते हैं. आज हम इस खबर में ठीक ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आपको बताने वाले हैं.
ये मंदिर लगभग 1500 साल पुराना है. मंदिर के इतने पुराने होने के बावजूद इसकी भव्यता में कभी कमी नहीं हुई. बल्कि हर साल वहां भक्तों के आने की संख्या बढ़ती जा रही है.
दरअसल, इस मंदिर का नाम बूढ़ी खेरमाई मंदिर है. ये जबलपुर के चारखंबा और मिलौनीगंज इलाके के बीच स्थित है.
यहां जो भी भक्त दर्शन करने के लिए आता है, उसकी सारी मनोकामनाएं माता पूरी कर देती हैं. परिवार में खूब सारी सुख-समृद्धि आती है.
इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. वहां के लोगों की माने तो इस मंदिर को बने हुए लगभग 1500 साल हो गए हैं.
वहां के लोग इस मंदिर को अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत मानते हैं. आस-पास के गांव वाले देवी को अपनी ग्रामदेवी के रूप में पूजते हैं.
मां धूमावती स्वरूप में होती है खास साधना
अब बात ये है कि इस मंदिर की खासियत क्या है, तो यहां बूढ़ी खेरमाई को मां धूमावती के अलौकिक स्वरूप में पूजा जाता है.
देवी के इस रूप की पूजा और साधना करना बहुत कठिन है. बहुत सारे अनूठी परंपराएं भी हैं जो सब लोग नहीं निभा पाते हैं.
भक्त माता को अपनी मां की तरह मानते हैं. जिसको अपने मन की सारी परेशानियां बता सकते हैं.
नवरात्र के दिनों में भक्ति के रंग में रंग जाता है परिसर
जैसा कि हम जानते हैं कि इस समय शारदीय नवरात्र का समय चल रहा है. इन नौ दिनों में मंदिर की रौनक तो देखने लायक होती है.
आज कल के जेन-जी बच्चें भी इस समय में माता के दरबार में भीड़ लगाकर खड़े होते हैं. मंदिर में इस दौरान तरह-तरह के आयोजन किए जाते हैं.
नवरात्रि के मौके पर मंदिर में घटस्थापना, जवारा रोपण, मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना और महाआरती का खास आयोजन होता है.
मनोकामना पूरी होने पर माता के चरणों में चढ़ाया जाता है बाना
अगर आपने माता से कुछ मांगा है तो कहा जाता है मां उसे जितनी जल्दी हो सके पूरी कर देती हैं. लेकिन अगर आपकी मनोकामना पुरी हो जाती है तो वहां के परंपरा के मुताबिक आपको मंदिर जाके बाना चढ़ाना होता है.
कुछ लोगों को बाना का मतलब नहीं पता होगा तो हम बता दें कि इसका मतलब ये होता है कि माता के मूर्ति के लिए सुंदर पोशाक चढ़ाना.
दरअसल वहां की मान्यता है कि माता को सुंदर पोशाक बहुत पसंद है. तो आप जब भी दर्शन करने जाएं, हो सके तो पोशाक ले जाएं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी स्थानीय मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक विवरणों पर आधारित है.
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