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महादेव की कृपा पाने का दोहरा मौका, प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का हो रहा संयोग, नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

October Pradosh Vrat Kab Hai 2026: आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि को अक्टूबर का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. वहीं, इस बार प्रदोष व्रत पर ही मासिक शिवरात्रि का भी संयोग हो रहा है. ऐसे में व्रती दो व्रत का फल एक ही दिन पा सकेंगे.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 06, 2026, 11:18 AM IST | Updated: Oct 06, 2026, 07:56 PM IST
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Guru Pradosh and Masik Shivratri 2026: अक्टूबर 2026 में भगवान शिव की उपासना के लिए दोहरा मौका मिल रहा है. ध्यान दें 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा व रात को चतुर्थी तिथि लगते ही मासिक शिवरात्रि की पूजा की जाएगी. इस तरह प्रदोष काल में शिव पूजा और रात के समय शिवरात्रि की पूजा का भक्तों को मौका मिलेगा. आइए इस बारे में जानें.

प्रदोष व्रत और शिवरात्रि का संयोग

प्रदोष व्रत हर माह में दो बार रखा जाता है. शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस व्रत के लिए प्रदोष काल में पूजा का समय शाम 5:59 बजे से लेकर रात 8:27 बजे तक है. वहीं, पंचांग के अनुसार 8 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि की शुरुआत रात 10:15 बजे से लेकर अगले दिन रात के 9:35 बजे तक रहेगी. शिवरात्रि की विशेष पूजा के लिए निशित काल का समय रात 11:44 बजे से लेकर 12:33 बजे तक होगा.

व्रत की तिथि और महादेव की पूजा का शुभ मुहूर्त

8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को प्रदोष व्रत और आश्विन मासिक शिवरात्रि
गुरु प्रदोष पूजा: शाम 5:59 बजे से लेकर रात 8:27 बजे तक
त्रयोदशी समाप्त: रात के 10:15 बजे
मासिक शिवरात्रि निशीथ पूजा: रात 11:44 बजे से लेकर 12:33 बजे तक
चतुर्दशी: 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से लेकर 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक

भोलेनाथ की पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर साफ कपड़े पहन लें.
घर के मंदिर को साफ करके दीप जलाएं.
व्रत और महादेव के व्रत का संकल्प करें.
अब प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल में और मासिक शिवरात्रि के लिए निशिता काल में पूजा करें.
दोनों व्रत का संकल्प किया है तो प्रदोष काल में ही पूजा कर लें.
भोलेनाथ के साथ मां पार्वती की उपासना करें.
भगवान भोलेनाथ को गंगाजल चढ़ाएं. 
भगवान भोलेनाथ को सफेद पुष्प चढ़ाएं.
भगवान शिव को फल मीठाई व खीर का भोग अर्पित करें. 
अब भगवान शिव की आरती कर पूजा को संपन्न करें.

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन व्रत व शिव पूजन का संकल्प करने भक्त को ज्ञान, सद्बुद्धि, सुख-शांति के साथ ही जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. गुरु प्रदोष का महत्व इतना अधिक है कि इस व्रत को रखने से पुरानी इच्छाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति को संयम रखने की भी शक्ति मिलती है.

मासिक शिवरात्रि का महत्व

प्रदोष व्रत के ही दिन मासिक शिवरात्रि व्रत का संयोग हो रहा है. निशित काल में मासिक शिवरात्रि की पूजा की जाएगी. हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि व्रत निशिता काल के अनुसार हर महीने कृष्ण‑पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रखा जाता है.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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