Diwali 2026: दिवाली पर अखंड दीपक का क्या है महत्व, बुझ गया तो क्या होगा? जानिए मां लक्ष्मी से जुड़ी मान्यता
दीपावली की रात को मुख्य पूजा में एक अखंड दीपक जलाने का विधान है. आइए जानें इस दीपक को जलाने का नियम क्या है और इससे जुड़ी परंपरा क्या है. इस लेख में जानेंगे कि इस अखंड दीपक का देवी लक्ष्मी से क्या संबंध है.
दीपावली पर दीपक जलाकर अंधियारे को मिटाया जाता है. पूरे घरों को दीयों से सजाने की परंपरा पुरानी है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की उपासना कर मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर कई सारे दीपक एक शृंखला में जलाए जाते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दीपक जलाने से जीवन में प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है. इन दीयों से इतर दीपावली की रात पूजा में एक ऐसी दीपक जलाया जाता है जिसे बुझने नहीं दिया जाता है. परंपरा है कि दिवाली के दिन इस अखंड ज्योत को जलाने का विशेष महत्व है. आइए जानें इसके पीछे की मान्यताएं और नियम क्या हैं.
दीपक का बुझना अशुभ
सनातन धर्म में दीपक प्रकाश, ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है. दीपावली पर इस सोच के साथ घर में दीपक जलाया जाता है कि घर और जीवन दोनों से अंधकार का अंत हो जाएगा. दिवाली का अखंड दीपक बताता है कि जीवन में अच्छा या बुरा समय चल रहा हो, कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए. इन्हीं भावनाओं के साथ कई परिवारों में लक्ष्मी-गणेश की मुख्य पूजा में एक अखंड दीपक जलाया जाता है जो रातभर नहीं बुझता है. इस दीये का बुझना अशुभ माना जाता है. ऐसे पूरा ध्यान रखा जाता है कि दीपक न बुझे यानी समय-समय पर घी या तिल का तेल डाला जाता है और बाती भी अच्छी तरह बनाई जाती है. अखंड दीपक को सुरक्षित जगह पर रखें और ध्यान रखें कि दीपक को पर्दों जैसी चीजों और बच्चों की पहुंच से दूर रखें.
अखंड दीपक और मां लक्ष्मी से क्या है संबंध?
दीपावली की रात मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की उपासना की रात होती है. ऐसे में इस दिन अखंड दीपक के साथ ही मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी व भगवान गणेश का लोग स्वागत करते हैं. जिससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर-परिवार को खुशहाली और धन प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दीपक को जलाने से घर की दरिद्रता का नाश हो जाता है और जीवन में शांति और स्थिरता बनी रहती है.
(Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है. दीपक जलाते समय सावधानी बरतें. किसी भी पूजा विधि को अपनाने से पहले अपने कुल-परंपरा और विद्वानों से सलाह अवश्य लें.)