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Anant Chaturdashi 2026: कौन हैं अनंत भगवान, अनंत सूत्र के 14 गांठों का क्या है रहस्य?

Anant Chaturdashi 2026 14 Knots Significance: इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी. अनंत भगवान यानी विष्णु जी के अनंत रूप की क्या कहानी है, अनंत सूत्र के 14 गांठों का 14 लोकों से क्या संबंध है और अनंत सूत्र बांधने का सही मंत्र क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Sep 17, 2026, 08:34 AM IST | Updated: Sep 17, 2026, 08:40 AM IST
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Anant Chaturdashi 2026: हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी पर्व मनाने का विधान है. ऐसे में साल 2026 में 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा. इस पर्व पर भगवान अनंत की उपासना करने का विधान है. इस पूजा में कच्चे सूत से तैयार किए गए अनंत सूत्र बांधने की भी परंपरा है. जिसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि भगवान अनंत कौन हैं और अनंत  सूत्र के 14 गांठों का क्या रहस्य है.

कौन हैं भगवान अनंत

‘अनंत’ यानी जिसका कोई अंत न हो. धार्मिक मान्यताओं में भगवान अनंत को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़ा जाता है. अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है और फिर अनंत सूत्र को धारण किया जाता है. अनंत सूत्र धारण करने का मतलब है कि जीवन में भगवान की कृपा प्राप्त हो सके, सुरक्षा से लेकर स्थिरता बनी रहे. ये केवल धागों का समूह नहीं है बल्कि इन धागों में भगवान के प्रति भक्त की आस्था जुड़ी है.

अनंत सूत्र की 14 गांठों का महत्व

कई परंपराओं में अनंत सूत्र का रंग लाल होता है तो कुछ जगहों पर इसका रंग लाल-पीला दोनों होता है. लाल रंग शक्ति का है और पीला रंग सौभाग्य है. ऐसे में जो भी इस अनंत सूत्र को धारण करता है, उसे भाग्य का साथ मिलता है और व्यक्ति ऊर्जा व आत्मविश्वास से भरा रहता है. वहीं अगर बात करें अनंत सूत्र की गाठों की तो इस सूत्र में जो 14 गांठें हैं उसका संबंध 14 लोकों से जोड़ा जाता है. हिंदू पुराणों में इन चौदह लोकों के बारे में वर्णन मिलता है. ये लोक हैं- 
7 ऊर्ध्व लोक- 'भू लोक, भुवर लोक, स्वर्ग लोक, महर लोक, जन लोक, तप लोक और सत्य लोक'
7 अधोलोक- 'अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल

अनंत सूत्र हमेशा बांधे रखना चाहिए?

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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