अहोई अष्टमी व्रत: करवा चौथ के बाद रखा जाता है ये निर्जला व्रत, जानिए इस दिन क्यों पहनी जाती है स्याहु माला
अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं. इस दिन अहोई माता की पूजा के साथ चांदी के मोतियों से बनी स्याहु माला पहनने की खास परंपरा है, जो दिवाली तक पहनी जाती है.
अपने बच्चों के लिए माताएं क्या कुछ नहीं करती हैं. करवा चौथ के त्योहार के ठीक बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.
इस साल ये व्रत 1 नवंबर को है. ये व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है.
इस दिन माताएं पूरे दिन बिना पानी पिए उपवास रखती हैं और विधि-विधान से अहोई माता की पूजा करती हैं.
क्या होती है स्याहु माला और इसका महत्व?
अहोई अष्टमी की पूजा में अहोई माता की कथा सुनना और स्याहु माला पहनना सबसे खास माना जाता है.
माना जाता है कि इस माला को गले में पहने बिना पूजा पूरी नहीं होती है.
इसमें माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए माला पहनती हैं. ऐसा विश्वास है कि इस माला को कम से कम दिवाली तक जरूर पहनना चाहिए.
चांदी के मोतियों से जुड़ी है परंपरा
ये माला चांदी के मोतियों या मनकों से बनाई जाती है. इस माला की सबसे खास बात ये होती है कि इसमे हर साल एक चांदी का नया मोती बढ़ा दिया जाता है.
इन मोतियों का सीधा संबंध बच्चों की उम्र और उनकी संख्या से होता है. माताएं बहुत ही श्रद्धा के साथ इस परंपरा को निभाती आ रही हैं.
घर पर ऐसे तैयार की जाती है माला
इस माला को बनाने के लिए अहोई अष्टमी के दिन एक मिट्ट के बर्तन में जल भरकर रखा जाता है.
इसके बाद चांदी के स्याहु लॉकेट को एक लाल रंग के पवित्र धागे या कलावे में पिरोया जाता है. फिर नियम के अनुसार इसमें चांदी के मनके जोड़े जाते हैं.
पूजा पूरी होने के बाद उस मिट्टी के बर्तन के पानी को बच्चों पर छिड़का जाता है.
माला पहनने और पूजा करने का सही तरीका
अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाकर साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प लें.
तैयार की गई स्याहु माला को अहोई माता की तस्वीर के सामने रखें. हाथ जोड़कर माता से अपने बच्चों की सेहत और लंबी उम्र की प्रार्थना करें.
इसके बाद अपने परिवार के रीति-रिवाजों के अनुसार इस माला को धारण करें.
बच्चों पर बनी रहती है माता की कृपा
इस विधि से व्रत करने और माला पहनने से अहोई माता का आशीर्वाद हमेशा बच्चों पर बना रहता है.
अगर आप भी सही नियमों से ये व्रत करेंगी, तो आपकी संतान का जीवन हमेशा खुशहाल रहेगा.
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं. विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
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