पश्चिमी राजस्थान पर सूखे का साया: खेतों में फसलें चौपट, बांधों में बचा महज 15.63% पानी
पश्चिमी राजस्थान में मानसून की बेरुखी से खेती और जल संकट गहराने लगा है. जोधपुर में 60% तक फसल खराबे का अनुमान है, जबकि चारे के दाम 25 रुपए किलो पहुंच गए हैं. बांधों में महज 15.63% पानी बचा है और जवाई बांध का जलस्तर भी घटकर 19.10% रह गया है.
पश्चिमी राजस्थान में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली और जालोर सहित कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं. हालात ऐसे हैं कि जोधपुर जिले में करीब 60 फीसदी तक फसल खराबे का अनुमान है. बारिश की कमी का असर अब पशुओं के चारे और ग्रामीण इलाकों में पेयजल के पारंपरिक स्रोत टांकों पर भी दिखाई देने लगा है. दूसरी ओर, संभाग के बांधों में पानी की आवक कम रहने से अगले साल गर्मियों में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका है. पाली जिले के जवाई बांध में कम जलस्तर ने चिंता और बढ़ा दी है.
सरकार के निर्देश पर फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए गिरदावरी की प्रक्रिया शुरू की गई है. 15 अक्टूबर तक पटवारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी. अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सूखे की स्थिति का आकलन कर राहत एवं आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाएगी. पिछले साल जहां पश्चिमी राजस्थान में अच्छी बारिश हुई थी, वहीं इस बार मानसून की कमजोर विदाई ने खेती-किसानी का गणित बिगाड़ दिया है.
60 फीसदी तक फसल खराबे का अनुमान
जोधपुर जिले में 16 सितंबर तक सामान्य 283.9 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले महज 190.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 33 फीसदी कम है. जिले में 12.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य था, जिसमें करीब आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र बारानी खेती का है. बारिश की कमी के कारण लगभग छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल खराबे की आशंका जताई जा रही है.
जुलाई के पहले पखवाड़े में हुई बारिश के बाद किसानों ने मूंग, मोठ, बाजरा और ग्वार की बुवाई की थी. शुरुआत में फसलें अच्छी दिखाई दीं, लेकिन इसके बाद बारिश का लंबा अंतराल पड़ गया. खेतों की नमी खत्म होने से पौधे झुलसने लगे. तिंवरी, मथानिया, फलोदी, ओसियां, बापिणी, मतोड़ा, बालेसर, सेतरावा और देचू सहित कई क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की कमी से करीब तीन लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र भी प्रभावित बताया जा रहा है.
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में 60 फीसदी तक फसल खराबे का अनुमान है. अंतिम स्थिति गिरदावरी रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी. जोधपुर कलेक्टर आलोक रंजन के अनुसार, जिले की आठ तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति है और सरकार के निर्देशानुसार राहत कार्यों की तैयारी की जा रही है.
मूंगफली-कपास की पैदावार पर भी संकट
बारिश की कमी से केवल बारानी फसलें ही नहीं, बल्कि नगदी फसलें भी प्रभावित हुई हैं. जोधपुर जिले में करीब 1.60 लाख हेक्टेयर में मूंगफली और 70 हजार हेक्टेयर में कपास की बुवाई होती है. इस बार इन फसलों के उत्पादन में 40 से 60 फीसदी तक गिरावट की आशंका है. किसानों ने बीज, खाद, जुताई और बुवाई पर खर्च किया, लेकिन बाद में बारिश नहीं होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.
ओसियां क्षेत्र के तिंवरी से शेरगढ़ के चाबा तक करीब सौ किलोमीटर के इलाके में बारिश की कमी का असर साफ नजर आ रहा है. गगाड़ी, खुड़ियाला, बेलवा, बालेसर, खीरजा और तेना सहित कई गांवों में बाजरा और मूंग की फसलें सूख गई हैं, जबकि ग्वार और मोठ के पौधे मुरझा रहे हैं. खेतों में 20 फीसदी भी फसल नहीं हुई. डोली के किसान के अनुसार, बारिश नहीं होने से मूंग की फसल खराब हो गई है.
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टांके खाली, चारे के दाम 25 रुपए किलो
फसल खराब होने के साथ पशुधन के सामने भी संकट खड़ा हो गया है. बारिश कम होने से गांवों में बने पानी के टांकों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया. खेतों में चारा नहीं होने से पशुपालकों को बाजार पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
बांधों में महज 15.63 प्रतिशत पानी
जल संसाधन विभाग की आठ अक्टूबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, जोधपुर जोन के 117 छोटे-बड़े बांधों की कुल भराव क्षमता 991.65 मिलियन क्यूबिक मीटर है. इनमें फिलहाल 154.96 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का महज 15.63 फीसदी है. पिछले साल इसी समय बांधों में 79.71 फीसदी पानी था. जसवंतसागर बांध पूरी तरह खाली है, जबकि जालोर के बांकली बांध में भी नाममात्र पानी बचा है.
जवाई बांध में 19 फीसदी पानी, पाली की चिंता बढ़ी
पाली जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले जवाई बांध में भी इस बार पानी की आवक बेहद कम हुई है. बांध की कुल क्षमता 207.510 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि वर्तमान में 39.630 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है. यानी बांध में महज 19.10 फीसदी पानी बचा है. पिछले साल इसी समय बांध पूरा भरा हुआ था.
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार, अगले साल जलापूर्ति के लिए जवाई बांध के डेड स्टोरेज का उपयोग करना पड़ सकता है. जरूरत पड़ने पर जोधपुर से पाली तक ट्रेन के जरिए पानी पहुंचाने का विकल्प भी अपनाना पड़ सकता है. ऐसे में पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश का संकट अब खेतों से निकलकर आने वाले महीनों की पेयजल व्यवस्था तक पहुंच गया है.