उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026: 30 साल का अभेद्य किला ढहेगा या लहराएगा फिर भगवा? 80 वार्डों की जंग हुई तेज!
Udaipur Municipal Corporation Elections 2026: उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में BJP के गढ़ को बचाने और कांग्रेस की सत्ता वापसी के बीच मुकाबला रोचक हो गया है. 80 वार्ड, नया परिसीमन, सामान्य मेयर पद और नए चेहरों के बीच BJP ने मिशन 60+ का लक्ष्य रखा है.
Udaipur Municipal Corporation Elections 2026: उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. 1994 से लेकर अब तक हुए तमाम निगम चुनावों में वार्डों की संख्या बढ़ने के बावजूद यहा लगातार भगवा परचम लहराता रहा है. इस बार मेयर पद जनरल ओपन होने और नए परिसीमन के चलते मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.
साढ़े तीन दशकों के गढ़ में कांटे की टक्कर
उदयपुर नगर निगम के सभी 80 वार्डों के लिए घमासान मचा हुआ है, जहाँ भाजपा लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इस बार सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ पूरी ताकत से मैदान में उतरी है. भाजपा और कांग्रेस के अलावा बीएपी (BAP) और अन्य दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. इस बार मेयर (महापौर) का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जिसके चलते दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट पाने के लिए भारी होड़ देखने को मिली. कांग्रेस ने अपने सभी 80 उम्मीदवारों की सूची समय पर जारी कर दी थी, वहीं, भाजपा ने आंतरिक मंथन और बैठकों के बाद अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों ही दलों के सामने बागियों को बिठाने की चुनौती रही है, और रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस खेमे में कुछ बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं जिन्हें मनाने के प्रयास किए गए.
नए चेहरों की राजनीतिक परीक्षा और युवाओं पर दांव
दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों (भाजपा और कांग्रेस) ने इस बार कई युवा और नए चेहरों पर दांव खेला है, जो सोशल मीडिया और जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं. दोनों पार्टियों की सूचियों में पहली बार चुनाव मैदान में उतर रहे कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों को जगह मिली है, जिससे यह चुनाव पुराने चेहरों के साथ नए उम्मीदवारों की बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है.
भाजपा का 'मिशन 60+' और मुख्यमंत्री का मास्टरस्ट्रोक
चुनावी वैतरणी पार करने के लिए भाजपा पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो के बाद मैराथन समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है. इस गुप्त और अहम मंत्रणा में जिले के सभी प्रमुख विधायक और पदाधिकारी मौजूद हैं. इस बैठक का मुख्य एजेंडा 80 वार्डों के नए परिसीमन का जमीनी सच जानना और भितरघात तथा बागी उम्मीदवारों के खतरे को बेअसर करना है. पार्टी ने इस बार 'मिशन 60+' का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसके तहत स्थानीय नेताओं की जवाबदेही तय की जा रही है.
इस मामले पर जब हमने वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव प्रचार नए रंग ले चुका है. उदयपुर में परिसीमन सरकार ने किया है. इसी के चलते कांग्रेस बार-बार सरकार पर आरोप लगा रही है कि परिसीमन में सरकार ने हमारी सब चीजों को बदल दिया है. अब तो चुनाव परिणाम ही तय करेगा कि परिसीमन सरकार के पक्ष में रहा या फिर नहीं.
श्याम सुंदर शर्मा ने आगे कहा कि जिस तरह से सीएम भजनलाल शर्मा भी प्रचार में उतरे हैं, रोड शो कर रहे हैं, लोगों के नजदीक जाने की कोशिश कर रहे हैं, उसमें कांग्रेस काफी पीछे है. उदयपुर में तमाम पर्यटन स्थल हैं. वहां पर बीजेपी लंबे समय से जीतते आई हैं. वहीं, कांग्रेस अभी ग्राउंड लेवल के प्रचार में कमजोर है. हालांकि पुराने लोगों को चुनाव लड़ा रही है लेकिन उनमें आपसी मनभेद नुकसान पहुंचा सकता है. उदयपुर में अपना गढ़ बरकरार रखने के लिए बीजेपी पुरजोर कोशिश में लगी है. सीएम से लेकर बीजेपी से जुड़े लोग यहां बोर्ड बनाने के लिए लगे हुए हैं पर परिणाम ही तय करेंगे कि इस बार यहां की जनता सरकार की कार्यशैली से कितनी खुश है.
परिसीमन, नए चेहरों की फौज और दिग्गजों की साख दांव पर होने के कारण उदयपुर का यह निकाय चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ पर आ गया है.