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Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनू जिले के बगड़ थाना क्षेत्र के आदर्श नगर प्रतापपुरा स्थित मां सेवा संस्थान विमंदित गृह में युवती के साथ दुष्कर्म, मारपीट, अमानवीय व्यवहार और कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी करवाने के आरोपों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है.
SFI का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
मामले को लेकर मंगलवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया. प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. एसएफआई का कहना है कि मामला केवल एक युवती से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान में रह रहे अन्य मानसिक रूप से कमजोर एवं विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले महिला-पुरुषों की सुरक्षा का सवाल भी इससे जुड़ा हुआ है. ऐसे में पूरे गृह के संचालन, व्यवस्थाओं और आवासियों की सुरक्षा की स्वतंत्र जांच जरूरी है.
ज्ञापन में बताया गया कि गृह में इलाज एवं देखभाल के लिए रह रही करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से बीमार युवती के साथ दुष्कर्म, मारपीट, बाल काटने, पर्याप्त भोजन-पानी नहीं देने और कथित रूप से बंधुआ मजदूरी करवाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं. युवती की माता की शिकायत पर बगड़ थाने में गृह संचालक बनवारीलाल सैनी एवं उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज होने की बात भी ज्ञापन में कही गई है.
CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग
एसएफआई ने मांग की है कि मामले की जांच केवल दर्ज FIR तक सीमित न रखते हुए संस्थान में रह रहे सभी आवासियों से जुड़े पहलुओं की भी गहनता से जांच की जाए. एसएफआई ने गृह के प्रवेश एवं उपस्थिति रजिस्टर, उपचार एवं दवा संबंधी रिकॉर्ड, भोजन रिकॉर्ड, स्टाफ रिकॉर्ड, फीस एवं भुगतान से जुड़े दस्तावेज तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की. इसके साथ ही संस्थान में लगे सभी CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग जब्त कर डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराने की मांग भी रखी गई.
महिला आवासियों की काउंसलिंग करवाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल
ज्ञापन में संचालक, उसकी पत्नी और कर्मचारियों की भूमिका के साथ-साथ उनके पुलिस सत्यापन, नियुक्ति एवं योग्यता संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की भी मांग की गई. SFI ने गृह में रह रहे सभी आवासियों की स्वतंत्र टीम से अलग-अलग काउंसलिंग कराने की मांग की है. महिला आवासियों की काउंसलिंग महिला अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराने तथा सभी आवासियों का स्वतंत्र मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक परीक्षण करवाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही.
संगठन ने जयपुर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की विशेष टीम भेजकर गृह की मान्यता, संचालन की शर्तों, स्टाफ व्यवस्था, सुरक्षा, भोजन और उपचार सहित पूरे संचालन की जांच कराने की मांग की. ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि आवासियों से खेतों या अन्य स्थानों पर काम करवाने के आरोप सामने आते हैं, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. इसके अलावा खाली हस्ताक्षरित बॉन्ड अथवा स्टांप पेपर के इस्तेमाल, संस्थान की वित्तीय एवं प्रशासनिक गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग की गई.
जिला बंद आह्वान की चेतावनी
एसएफआई तहसील अध्यक्ष अमित सिंह ने कहा कि संगठन ऐसे मामले को उजागर करने आया है, जो कथित तौर पर लंबे समय से चलता आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतापपुरा स्थित विमंदित गृह में गंभीर अनियमितताओं और युवतियों के साथ दुष्कर्म के आरोप सामने आए हैं, लेकिन प्रशासन की निगरानी पर्याप्त नहीं रही. अमित सिंह ने कहा कि FIR दर्ज होने के बाद प्रशासन चेता है, लेकिन अब इस गृह की बड़े प्रशासनिक स्तर पर जांच होनी चाहिए. उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़िता को जल्द न्याय नहीं मिला और मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो एसएफआई पूरे जिले का आह्वान करते हुए जिला बंद का आह्वान करेगी.
एसएफआई ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक गृह में रह रहे सभी आवासियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन एवं पुलिस की विशेष निगरानी रखी जाए. जरूरत पड़ने पर आवासियों को सुरक्षित एवं अधिकृत वैकल्पिक संस्थान में स्थानांतरित किया जाए. संगठन ने वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में जांच कराने तथा जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की. एसएफआई का कहना है कि मानसिक रूप से कमजोर और विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस पूरे मामले को महज एक FIR तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए.