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3 महीने का सन्नाटा और खुलने से पहले ही बुकिंग फुल! 1 अक्टूबर से राजस्थान के टाइगर रिजर्व में ऐसा क्या दिखने वाला है?

Ranthambore Jungle Safari: राजस्थान के टाइगर रिजर्व में तीन महीने के मानसून ब्रेक के बाद 1 अक्टूबर से एक बार फिर सफारी का रोमांच शुरू होने जा रहा है. इस दौरान जंगल में इंसानी आवाजाही और जिप्सियों की आवाजाही कम रहने से वन्यजीवों को अपने प्राकृतिक आवास में सहज रहने का मौका मिलता है. अब सफारी शुरू होने से पहले ही पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह है. खासतौर पर रणथंभौर में अक्टूबर की सफारी के लिए बुकिंग 1 अगस्त से ही शुरू हो जाती है और खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में स्लॉट बुक हो चुके हैं.

Written By Ansh Raj
Published: Sep 29, 2026, 10:27 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 10:27 AM IST
Image Credit: Ranthambore Jungle Safari
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Rajasthan News: राजस्थान के टाइगर रिजर्व में तीन महीने के सन्नाटे के बाद अब एक बार फिर जंगल गुलजार होने वाला है. 1 अक्टूबर से राजस्थान के टाइगर रिजर्व में सफारी शुरू होने जा रही है, जिसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का इंतजार भी खत्म होगा. मानसून के दौरान करीब 90 दिनों तक जंगल में इंसानी आवाजाही और जिप्सियों की गतिविधियां कम रहने से वन्यजीवों को अपने प्राकृतिक आवास में बिना किसी बाहरी व्यवधान के रहने का मौका मिलता है. यही वजह है कि सफारी शुरू होने के साथ ही पर्यटकों को बेहतर वन्यजीव और टाइगर साइटिंग की उम्मीद रहती है.

इन तीन महीनों को जंगल के लिए एक तरह का प्राकृतिक ब्रेक माना जाता है. सफारी वाहनों की आवाजाही और पर्यटकों के शोर-शराबे से दूर रहने के कारण बाघ समेत दूसरे वन्यजीव अपने प्राकृतिक व्यवहार के साथ जंगल में विचरण करते हैं. मानसून के दौरान जंगल में हरियाली भी बढ़ती है और प्राकृतिक वातावरण में बदलाव देखने को मिलता है. ऐसे में अक्टूबर में सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक जंगल और वन्यजीवों को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं.

राजस्थान में टाइगर सफारी की बात हो तो रणथंभौर का नाम सबसे पहले आता है. यहां बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए देशभर से पर्यटक पहुंचते हैं. रणथंभौर में टाइगर साइटिंग का क्रेज इतना ज्यादा है कि अक्टूबर में शुरू होने वाली सफारी की बुकिंग करीब दो महीने पहले यानी 1 अगस्त से ही शुरू हो जाती है. सफारी शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में पर्यटक अपने स्लॉट बुक करा लेते हैं.

1 अक्टूबर से जंगल में फिर जिप्सियों की आवाजाही शुरू होगी और पर्यटक बाघों के साथ-साथ अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए सफारी पर निकलेंगे. तीन महीने के ब्रेक के बाद जंगल का बदला हुआ प्राकृतिक रूप भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा. घने जंगल, हरियाली और वन्यजीवों की मौजूदगी सफारी के अनुभव को खास बना सकती है.

हालांकि, जंगल में टाइगर साइटिंग पूरी तरह प्राकृतिक घटना है. किसी सफारी में बाघ दिखेगा ही, इसकी गारंटी नहीं होती. वन्यजीव अपनी गतिविधियां अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार करते हैं. यही अनिश्चितता और रोमांच टाइगर सफारी को खास बनाता है. अब 1 अक्टूबर से राजस्थान के जंगलों में फिर पर्यटकों की चहल-पहल लौटेगी और तीन महीने से शांत जंगल में एक बार फिर सफारी का रोमांच देखने को मिलेगा.

 

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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