राजस्थान में फिर बढ़ा लम्पी का खतरा: 10 जिलों तक फैला वायरस, 15 गौवंश की मौत, जानिए 4 साल बाद कैसे लौटी बीमारी
Rajasthan News: राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप फिर बढ़ रहा है. अब तक 10 जिलों में 10 हजार से ज्यादा गौवंश संक्रमित मिले हैं और 15 पशुओं की मौत हुई है. बीमारी रोकने के लिए पशु मूवमेंट और मेलों पर रोक लगाई गई है.
Lumpy Skin Disease: राजस्थान में एक बार फिर लम्पी स्किन डिजीज का प्रकोप बढ़ रहा है. राजस्थान में अब तक 10 जिलों में लम्पी स्किन डिजीज के मामले सामने आ चुके हैं. गौवंश में इस बीमारी के मामले सबसे पहले डीग जिले में सामने आए थे. इसके बाद पूर्वी राजस्थान के अन्य जिलों में भी गौवंश में बीमारी का प्रकोप बढ़ा है. लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम और बेहतर उपचार को लेकर पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव विकास एस भाले ने बैठक ली. बैठक में बीमारी से प्रभावित जिलों के संयुक्त निदेशकों को बीमारी से बचाव के लिए गौवंश का एक से दूसरे स्थान पर मूवमेंट रोकने के निर्देश दिए गए. पशु मेलों के आयोजन पर रोक लगाने और पशुपालकों को जागरूक करने के लिए कहा गया. आपको बता दें कि राज्य में अब तक 10 जिलों में 10 हजार से अधिक पशुओं में यह बीमारी फैल चुकी है. अब तक कुल 15 गौवंश की मौत हुई है. राज्य सरकार ने बीमारी से बचाव की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं. जिन जिलों में अब तक लम्पी स्किन डिजीज के मामले सामने आ चुके हैं, उनमें पशुपालन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश रद्द कर दिए गए हैं. प्रमुख सचिव विकास एस भाले ने कहा कि किसी भी जिले में यदि दवाईयों की कमी हो तो वे तुरंत खरीद कर सकते हैं. इसके लिए निदेशालय स्तर से अलग से भी फंड जारी किया गया है.
किस जिले में कितने बीमार पशु
- भरतपुर में 3936 बीमार पशु, 6 की हुई मौत
- डीग में 5237 बीमार पशु, 9 की हुई मौत
- धौलपुर में 355 बीमार पशु, दौसा में 230 बीमार पशु
- अलवर में 221, करौली में 76 बीमार पशु आए सामने
- झुंझुनूं में 36, कोटपूतली-बहरोड में 185 मामले आए
- सवाईमाधोपुर में 1 और खैरथल-तिजारा में 126 मामले
- राज्य में 87.25 प्रतिशत गौवंश में हुआ टीकाकरण
लम्पी स्किन डिजीज के लिए अलग से फंड जारी
पशुपालन विभाग ने विभिन्न जिलों में बीमारी का फैलाव रोकने और दवाईयों के लिए अलग से फंड जारी किया है. प्रत्येक जिले को पहले चरण में एक-एक लाख की राशि जारी की गई है. भरतपुर में सर्वाधिक केस होने के चलते 10 लाख रुपए का अलग से फंड जारी किया गया है. वहीं डीग में भी 2 लाख रुपए की राशि मुहैया कराई गई है. प्रमुख सचिव विकास एस भाले ने कहा कि जिस जिले में भी अतिरिक्त राशि की जरूरत हो, वे तुरंत निदेशालय के समक्ष अपनी मांग रख सकते हैं. बीमारी को लेकर फंड की कमी नहीं आने दी जाएगी.
आचार संहिता से नहीं आएगी परेशानी
वीसी से बैठक के दौरान श्रीगंगानगर जिले के संयुक्त निदेशक ने निकाय चुनाव की आचार संहिता के चलते दवाई खरीद नहीं होने की समस्या बताई. इसे लेकर प्रमुख सचिव ने कहा कि बीमारी का उपचार जरूरी है. ऐसे में आदर्श आचार संहिता दवाईयों की खरीद में आड़े नहीं आएगी. फिर भी अपने जिला कलेक्टर से मार्गदर्शन लेकर दवाईयों की खरीद की जा सकती है. प्रमुख सचिव ने इस सम्बंध में खुद के स्तर से भी जिलों के कलक्टर से संवाद करने का आश्वासन दिया.
पशु मेलों पर लगाई गई रोक
पशुपालन विभाग ने पशुओं का मूवमेंट रोकने के लिए पशु मेलों के आयोजन पर रोक लगाई है. पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ सुरेश चंद मीना ने कहा कि इस बीमारी का सर्वाधिक प्रसार पशु मेलों के चलते होता है. इसलिए सभी जिलों में पशु मेलों के आयोजन पर रोक लगाई गई है. भरतपुर में साप्ताहिक पशु हाट को रोक दिया गया है. जयपुर में होने वाले पशु मेलों को भी रोका गया है. एक माह तक पशुपालन विभाग द्वारा इस तरह की सावधानियां लागू की गई हैं. प्रमुख सचिव विकास एस भाले ने कहा कि भरतपुर और डीग में अब बीमारी के प्रकरण कम हुए हैं. वहीं रिकवरी केसेज की संख्या बढ़ी है.
लम्पी स्किन डिजीज के क्या हैं कारण ?
लम्पी स्किन डिजीज गायों में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है. यह बीमारी पशुओं की त्वचा को प्रभावित करती है. समय पर उपचार नहीं होने से यह जानलेवा साबित हो सकती है. दरअसल यह बीमारी कैप्रीपॉक्स नामक वायरस के कारण होती है, जो पॉक्स वायरिडी फैमिली परिवार से संबंधित है. इसका संक्रमण मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैलता है. संक्रमित पशु के संपर्क, दूषित उपकरणों और आसपास के वातावरण से भी संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है. इसलिए पशुओं की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण करना जरूरी है.
क्या हैं बीमारी के प्रमुख लक्षण ?
इस बीमारी में पशु को अचानक तेज बुखार हो सकता है. इसके बाद शरीर, सिर, गर्दन, पेट और पैरों सहित विभिन्न हिस्सों की त्वचा पर गोल, कठोर और उभरी हुई गांठें दिखाई देने लगती हैं. इन गांठों का आकार अलग-अलग हो सकता है और गंभीर स्थिति में इनमें घाव या पपड़ी बन सकती है. संक्रमित पशु की आंख और नाक से पानी या स्राव, मुंह से अधिक लार आना, कमजोरी और सुस्ती जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. बीमारी के कारण पशु का खाना-पीना कम हो जाता है और दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आ सकती है. गंभीर मामलों में पशु को चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है.
पूरे देश में क्या है स्थिति
देशभर की बात करें तो लम्पी स्किन डिजीज अभी 15 राज्यों में गौवंश में फैल चुकी है. देश के 57 जिलों में इसके फैलाव की सूचना है. देशभर में कुल 34321 बीमार पशु सामने आए हैं. देशभर में अब तक 33 पशुओं की मौत हुई है. राजस्थान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने यूपी में बीमारी का प्रसार फैलने के बाद राजस्थान में भी केस सामने आने की बात कही है.
रिपोर्ट - काशीराम चौधरी