‘21 लाख दो, तभी समाज में वापसी’! जोधपुर में पंचों पर बहिष्कार और धमकी के गंभीर आरोप
Rajasthan News: जोधपुर के पालासनी गांव में जमीन विवाद को लेकर कथित सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है. दो परिवारों ने पंचों पर हुक्का-पानी बंद करने, मारपीट और समाज में वापसी के बदले 21 लाख व 11 लाख रुपये मांगने के आरोप लगाए हैं.
Jodhpur News: जोधपुर के गांवों में आपसी विवादों के निस्तारण के लिए सामाजिक स्तर पर होने वाली पंच-पंचायती अब कई मामलों में विवाद का कारण बनती जा रही है. अदालतों के समानांतर चलने वाली ऐसी कथित सामाजिक पंचायतों के फैसलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. अब डांगियावास थाना क्षेत्र के पालासनी गांव से ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां जमीन विवाद को लेकर समाज के कथित पंचों पर दो परिवारों को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने, हुक्का-पानी बंद करने और समाज में दोबारा शामिल करने के बदले लाखों रुपये मांगने के आरोप लगाए गए हैं.
न्यायालय में मामला विचाराधीन, फिर भी सामाजिक दबाव का आरोप
जालेली चंपावतान के ढाकों की ढाणी निवासी दानाराम और उसके भाई का आरोप है कि उनकी जमीन को लेकर गांव के कुछ लोगों से विवाद चल रहा है. जमीन से आम रास्ता निकालने को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है. इसके बावजूद विवाद का समाधान सामाजिक स्तर पर कराने का दबाव बनाया जा रहा है. दानाराम का कहना है कि कथित पंचों ने परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया और वापस समाज में शामिल होने के लिए 21 लाख रुपये देने की मांग की जा रही है.
सामाजिक कार्यक्रम में जाने पर मारपीट का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के बाद उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों से भी दूर रखा जा रहा है. यदि परिवार का कोई सदस्य किसी कार्यक्रम में पहुंचता है तो उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की जाती है. पीड़ितों का कहना है कि जमीन का विवाद न्यायालय में लंबित होने के बावजूद पंचों द्वारा अपने स्तर पर फैसला थोपने का प्रयास किया जा रहा है.
दूसरे परिवार पर 11 लाख का दंड लगाने का आरोप
इसी क्षेत्र से जुड़े दूसरे मामले में गंगाराम ने भी समाज के कथित पंचों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. गंगाराम के अनुसार उसके भाई पर माता-पिता के साथ मारपीट करने और उनकी हत्या का आरोप है. इसी विवाद के चलते पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद चल रहा है. गंगाराम का आरोप है कि उसके भाई ने कथित पंचों के साथ मिलकर उसकी जमीन को गोचर भूमि घोषित करवाने का प्रयास किया. इसका विरोध करने पर उसे भी समाज से बहिष्कृत कर दिया गया.
गंगाराम का आरोप है कि सामाजिक कार्यक्रमों में उसके साथ मारपीट की जा रही है और उस पर 11 लाख रुपये का दंड भी लगाया गया है. उसका कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के कारण परिवार को लगातार मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
पुलिस पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप
पीड़ितों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने केवल मामला दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित रखी और निष्पक्ष जांच के बजाय कथित रूप से आरोपियों का पक्ष लिया जा रहा है. पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्हें सामाजिक बहिष्कार और संभावित मारपीट की आशंका के बावजूद प्रभावी सुरक्षा नहीं मिल रही है.
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
लगातार सामाजिक दबाव और कथित प्रताड़ना से परेशान दोनों परिवार बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई. पीड़ितों ने समाज के नाम पर कथित तौर पर लगाए जा रहे फरमानों, आर्थिक दंड और बहिष्कार पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि जब जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है तो सामाजिक पंचायत के जरिए उस पर फैसला थोपना उचित नहीं है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि पिछले वर्ष लूणी विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों से पंच-पंचायती और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी शिकायतें राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंची थीं. हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक कमेटी के गठन के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कथित सामाजिक फरमानों के आरोप सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. अब देखना होगा कि कलेक्टर और पुलिस प्रशासन पीड़ित परिवारों की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और कथित पंचों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है.