राजस्थान में अब DL बनवाना नहीं आसान: कार की ट्रायल में 40% फेल, कंप्यूटर कर रहा पास-फेल
Rajasthan News: राजस्थान में 23 परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर ट्रायल अनिवार्य होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो गया है. जयपुर के जगतपुरा कार्यालय में कार लाइसेंस के ट्रायल में औसतन 38-40 फीसदी आवेदक फेल हो रहे हैं.
Jaipur News: राजस्थान के करीब 23 परिवहन कार्यालयों में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना उतना आसान नहीं रहा है. राजधानी जयपुर के जगतपुरा एडिशनल आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब कठिन ट्रायल से गुजरना पड़ रहा है. इस कारण कार का लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों में से 40 फीसदी आवेदक फेल हो रहे हैं. राज्य के परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ी पहल करते हुए प्रदेश के 23 परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर ट्रायल को अनिवार्य कर दिया है. राज्य के 11 आरटीओ कार्यालयों और 12 डीटीओ कार्यालयों में अब कम्प्यूटर ही लाइसेंस के पास या फेल का फैसला कर रहा है. दरअसल यूं तो परिवहन विभाग के 35 कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बन चुके हैं. लेकिन इनमें से 23 कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर लाइसेंस बनाए जा रहे हैं. राज्य में 13 आरटीओ कार्यालय हैं, इनमें से 11 में ऑटोमेटेड ट्रैक पर ही ट्रायल हो रही है. बचे हुए 2 कार्यालय, जिनमें जयपुर आरटीओ द्वितीय और अजमेर आरटीओ शामिल हैं, उनमें ट्रायल मैन्युअल ली जा रही है. ऑटोमेटेड ट्रैक पर ट्रायल के दौरान कैमरों के जरिए निगरानी की जाती है. लाइसेंस आवेदक के सही तरीके से गाड़ी चलाने या गलतियों के आधार पर कम्प्यूटर द्वारा अंक दिए जाते हैं. इसके बाद कम्प्यूटर ही पास या फेल का फैसला करता है. जयपुर आरटीओ प्रथम के जगतपुरा कार्यालय में पिछले 8 महीने के दौरान बड़ी संख्या में आवेदक फेल हुए हैं.
8 महीने में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का रिजल्ट
- फरवरी में कुल 608 आवेदकों की ट्रायल, इनमें 305 आवेदक पास हुए
- फरवरी में 266 आवेदक फेल, कार के लाइसेंस में 79 प्रतिशत आवेदक फेल
- मार्च में 590 आवेदकों की ट्रायल, 348 हुए पास
- मार्च में 204 आवेदक फेल हुए, कार में 60 फीसदी आवेदक फेल
- अप्रैल में 2788 आवेदकों की ट्रायल, 1946 हुए पास
- 718 आवेदक फेल हुए, कार के ट्रायल में 38 फीसदी आवेदक फेल
- मई में 3529 आवेदकों की ट्रायल, 2469 आवेदक हुए पास
- 765 आवेदक फेल हुए, कार के लाइसेंस में 33 प्रतिशत हुए फेल
- जून में 2209 आवेदकों की ट्रायल, 1559 आवेदक हुए पास
- 492 आवेदक फेल हुए, कार के लाइसेंस में 34 फीसदी हुए फेल
- जुलाई में 2330 आवेदकों की ट्रायल, 1663 आवेदक पास हुए
- 498 आवेदक फेल हुए, कार के लाइसेंस ट्रायल में 33 फीसदी फेल
- अगस्त में 1361 आवेदकों की ट्रायल हुई, 905 आवेदक पास हुए
- इनमें से 370 आवेदक फेल हुए, कार के लाइसेंस में 42 फीसदी फेल
- सितंबर में 1779 आवेदकों की ट्रायल हुई, 1247 पास हुए
- 429 आवेदक फेल हुए, कार के लाइसेंस में 38 फीसदी फेल
कम्प्यूटराइज्ड ट्रायल, गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं
ड्राइविंग लाइसेंस की ट्रायल की इस नई प्रक्रिया से अब अच्छी तरह वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के ही ड्राइविंग लाइसेंस बन पा रहे हैं. जगतपुरा के एडिशनल आरटीओ आदर्श सिंह राघव ने बताया कि जो वाहन चालक अच्छी तरह से वाहन नहीं चला सकते हैं, उनके लिए ड्राइविंग लाइसेंस की ट्रायल में पास होना असंभव है. यही वजह है कि अभी भी कार के लाइसेंस की ट्रायल में औसतन 38 से 40 फीसदी आवेदक फेल हो रहे हैं. परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करते हैं. ट्रायल में अब किसी निजी कम्पनी का वित्तीय रूप से दखल नहीं है. सभी कार्यालयों में मारुति सुजुकी कम्पनी द्वारा सीएसआर गतिविधि के तहत ट्रैक संचालन किया जा रहा है. ऐसे में लाइसेंस की प्रक्रिया में गड़बड़ियों की गुंजाइश खत्म हो गई है और अब वास्तविक रूप से लाइसेंस पाने के योग्य आवेदकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल पा रहे हैं.