बिजली गिरेगी पर नुकसान नहीं होगा: जानिए राजस्थान सरकार का 'सुरक्षा चक्र' आपके परिवार को कैसे रखेगा सेफ
Jaipur News: राजस्थान में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान कम करने के लिए 1010 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की जानकारी सामने आई है. सभी 41 जिलों में लाइटनिंग अरेस्टर, 10 बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम और शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए 570 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
Jaipur News: राजस्थान में आकाशीय बिजली, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. प्रदेश के सभी 41 जिलों में लाइटनिंग अरेस्टर लगाए जाएंगे. इस योजना के लिए 130 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इसके साथ ही आठ जिलों के 10 प्रमुख बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि संभावित खतरे की जानकारी समय रहते मिल सके. इस व्यवस्था के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
सभी 41 जिलों में लगाए जाएंगे लाइटनिंग अरेस्टर
आकाशीय बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राज्य के सभी 41 जिलों में लाइटनिंग अरेस्टर लगाने की योजना बनाई गई है. सरकार ने इसके लिए 130 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस पहल का उद्देश्य बिजली गिरने से होने वाले खतरों को कम करने की दिशा में जरूरी कदम उठाना है.
वहीं, बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने से संभावित खतरे की सूचना पहले मिल सकेगी. आठ जिलों के 10 प्रमुख बांधों पर इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है.
शहरी बाढ़ से निपटने के लिए खर्च होंगे 570 करोड़
बारिश के दौरान शहरों में जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए भी सरकार ने योजना तैयार की है. इसके तहत 10 चयनित जिलों में शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन परियोजनाओं पर 570 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे को कम करना और इससे होने वाले नुकसान पर नियंत्रण पाना है.
बैठक में जयपुर शहरी बाढ़ प्रबंधन योजना के वित्तीय प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई. इसके साथ ही बाढ़ से बचाव के लिए चल रही अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई.
फार्म पॉण्ड और सिंचाई पाइपलाइन के लिए 300 करोड़ मंजूर
आपदा जोखिम कम करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए फार्म पॉण्ड तथा सिंचाई पाइपलाइन निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इन कार्यों के जरिए पानी को संरक्षित करने और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा. सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के साथ-साथ जल संरक्षण से जुड़े कामों को भी गति मिले, जिससे प्रदेश में आपदा के जोखिम को कम करने में मदद मिल सके.
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की बैठक लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की. बैठक में कुल 1010 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजनाओं की जानकारी दी गई. इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह एवं आपदा प्रबंधन भास्कर सावंत ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति के बारे में बताया.
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों में तेजी लाई जाए और निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए जरूरी स्वीकृतियां समय पर जारी हों. उन्होंने कहा कि वित्तीय मंजूरी से जुड़े प्रस्तावों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए और स्वीकृत बजट का निर्धारित समय में उपयोग सुनिश्चित किया जाए.
समय पर पूरे किए जाएं आपदा प्रबंधन के काम
बैठक में मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन, राहत और नागरिक सुरक्षा से जुड़े विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी कार्य तय समय सीमा में पूरे किए जाने चाहिए.