सुबह 4 बजे की वो कसरत और शाम की खास खुराक: 'राजस्थान केसरी' का ताज जीतने वाले पहलवान के 24 घंटे का पूरा सीक्रेट रूटीन !
कोटा में कुश्ती के अखाड़े में चैंपियन बनना सिर्फ ताकत का खेल नहीं, बल्कि सालों की मेहनत, अनुशासन और खानपान का भी इम्तिहान है. सुबह जब ज्यादातर लोग नींद में होते हैं, तब राजस्थान केसरी का खिताब जीतने वाले साहिल खान का दिन शुरू हो जाता है. सुबह 4 बजे उठना, देसी खुराक लेना और फिर घंटों अखाड़े में पसीना बहाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. 600 से ज्यादा पहलवानों के बीच मुकाबला करते हुए उन्होंने राजस्थान केसरी का खिताब अपने नाम किया है.
8 साल की मेहनत, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मेडल
साहिल खान अलवर जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने साल 2018 में कुश्ती की शुरुआत की थी. करीब 8 साल के सफर में उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. उनके नाम राज्य स्तर पर चार मेडल हैं. राजस्थान की स्टेट चैंपियनशिप में भी वह कई गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप के ट्रायल में भी हिस्सा लिया, जहां महज एक पॉइंट से मुकाबला हार गए थे. साहिल इससे पहले उदयपुर में आयोजित राजस्थान-मध्य प्रदेश केसरी दंगल में भी खिताब जीत चुके हैं. अब कोटा के दशहरा मेले में दूसरी बार राजस्थान केसरी का खिताब जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और नाम जोड़ लिया है.
सुबह 4 बजे शुरू होती है पहलवान की जिंदगी
साहिल बताते हैं कि उनकी सुबह चार बजे शुरू होती है. उठने के बाद ड्राई फ्रूट्स खाते हैं और फिर सुबह करीब 5 बजे से 8 बजे तक प्रैक्टिस करते हैं. इसके बाद खानपान और आराम का समय रहता है. शाम को करीब 4 बजे फिर अखाड़े में पहुंच जाते हैं और 7 बजे तक अभ्यास करते हैं. इस तरह रोजाना करीब 6 से 7 घंटे का समय अभ्यास और शारीरिक तैयारी में निकलता है.
250 ग्राम बादाम और 250 ग्राम घी है खुराक
पहलवान की ताकत के पीछे उसकी खुराक का भी बड़ा योगदान होता है. साहिल बताते हैं कि उनकी खुराक में रोजाना करीब 250 ग्राम बादाम और 250 ग्राम घी शामिल रहता है. इसके अलावा दूध, दही, फल और दूसरे देसी खाद्य पदार्थ खाते हैं. उनका कहना है कि वह नेचुरल और देसी खानपान पर ज्यादा भरोसा करते हैं. दूध, घी और बादाम उनकी खुराक का अहम हिस्सा हैं.
राजस्थान सरकार की सुविधाओं से बढ़ रहा कुश्ती का स्तर
साहिल खान का कहना है कि राजस्थान में कुश्ती को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता की ओर से अच्छा योगदान मिल रहा है. खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अवसर मिल रहे हैं और खेल सुविधाओं में भी सुधार हुआ है. उन्होंने कहा कि कुश्ती संघ की ओर से मिल रहे सहयोग के लिए पहलवान शुक्रगुजार हैं. खिलाड़ियों को घी के साथ किट, जूते, मैच सूट और ट्रैक सूट जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं.
अब सीनियर नेशनल में मेडल जीतने का लक्ष्य
राजस्थान केसरी का खिताब जीतने के बाद साहिल का अगला लक्ष्य सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में पदक हासिल करना है. उनका कहना है कि वह राजस्थान के लिए मेडल जीतना चाहते हैं. कुश्ती में मेहनत जारी रहेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश का नाम रोशन करने की कोशिश करेंगे.