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ST वर्ग के 12 % आरक्षण में से क्यों ना 9 % भील समुदाय को दें ? - राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसटी के 12% आरक्षण में से 9% हिस्सा भील समुदाय को देने की मांग वाली याचिका पर मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और अन्य से जवाब मांगा है. याचिका में तर्क दिया गया है कि एसटी आरक्षण का अधिकांश लाभ एक ही वर्ग को मिल रहा है, जिससे भील समुदाय पिछड़ गया है.

Written By Pragati Pant Awasthi
Published: Sep 18, 2026, 12:45 PM IST | Updated: Sep 18, 2026, 01:08 PM IST
Image Credit: Rajasthan High Court ON ST Reservation
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Jaipur News : राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव,प्रमुख कार्मिक सचिव,एसटी आयोग और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है, कि एसटी वर्ग को दिए जा रहे 12 फीसदी आरक्षण में से क्यों ना 9 फीसदी आरक्षण भील समुदाय को दिया जाए. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने ये आदेश शंकर लाल दहिया और अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में अधिवक्ता मनोज चौधरी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता आदिवासी भील आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य हैं. उनका उद्देश्य ऐसे आरक्षण को हटाना है,जो आरक्षण वाले व्यक्तियों के बीच भेदभाव करता हो. याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने आरक्षित वर्गो में जातियों को शामिल करते समय उनके वास्तविक सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक पिछडेपन के आंकडे़ जमा नहीं किए.

ST आरक्षण का 99 फीसदी फायदा एक जाति को
एसटी वर्ग में शामिल मीणा समुदाय सामाजिक,आर्थिक और शैक्षिक रूप से काफी आगे बढ़ चुका है और एसटी आरक्षण का करीब 99 फीसदी लाभ ये जाति उठा रही है. दूसरी ओर आजादी के इतने सालों बाद भी भील समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है. याचिका में बताया गया की नेशनल एसटी आयोग ने 25 फरवरी को अनुच्छेद 338 A के तहत राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एसटी श्रेणी के उप वर्गीकरण और पंजाब राज्य बनाम देवेन्द्र सिंह में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए निर्णय को लागू करने को कहा. इसके बावजूद एसटी श्रेणी का उप वर्गीकरण नहीं किया गया है.

साल 1931 के बाद भील जाति के हालात पर कोई सर्वे तक नहीं

राज्य सरकार के पास भील समुदाय के पिछड़ेपन के कोई ठोस आंकडे नहीं है. साल 1931 के बाद भीलों के राज्य सेवाओं में प्रतिनिधित्व,शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है. भील समुदाय गरीबी रेखा से नीचे है, लेकिन उन्हें बीपीएल समेत अन्य योजनाओं में शामिल नहीं किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार एसटी कोटा के बाहर भील बाहुल इलाकों में जिलेवार विशेष आरक्षण दे रही है, लेकिन राज्य वार आरक्षण नहीं मिलने से भील और सहरिया के साथ स्पष्ट रूप से सामाजिक भेदभाव हो रहा है. लोकुर समिति ने भी मीणा के बजाए चौकीदार मीणा को ही एसटी में शामिल किया था.

याचिका में गुहार की गई है कि भील समुदाय को एसटी के लिए आरक्षित 12 फीसदी आरक्षण में से 9 फीसदी आरक्षण दिया जाए और तब तक किसी को नियुक्ति नहीं दी जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है.
 

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मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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