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वादे से मुकरी बहू तो हाईकोर्ट ने दिलाई बुजुर्ग सास को राहत: वेतन का चौथाई हिस्सा और टर्मिनल बेनिफिट्स देने के आदेश

Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली बहू को अपनी बुजुर्ग सास के प्रति आर्थिक जिम्मेदारी निभाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने बहू के मासिक वेतन का 25 फीसदी हिस्सा सास के बैंक खाते में जमा कराने और टर्मिनल बेनिफिट्स की आधी राशि देने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति केवल व्यक्तिगत रोजगार का लाभ नहीं, बल्कि मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार की आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है.

Written By Ansh Raj
Published: Sep 24, 2026, 08:57 AM IST | Updated: Sep 24, 2026, 08:59 AM IST
Image Credit: Rajasthan News
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Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बुजुर्ग सास के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश दिया है. कोर्ट ने अनुकंपा नौकरी पाने वाली बहू के मासिक वेतन का 25 फीसदी हिस्सा उसकी सास के बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही मृत कर्मचारी से जुड़े टर्मिनल बेनिफिट्स की आधी राशि भी सास को देने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति को केवल व्यक्तिगत रोजगार का लाभ नहीं माना जा सकता, बल्कि इसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना भी है.

पति की मौत के बाद मिली थी अनुकंपा नौकरी
यह मामला कमली देवी और अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रमित पारीक ने अदालत को बताया कि कमली देवी का बेटा सुभाष चन्द्र एवीवीएनएल में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था. मार्च 2017 में उसकी मृत्यु हो गई थी. इसके बाद मृत कर्मचारी की पत्नी ममता रानी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी.

परिवार की देखभाल का दिया था शपथ पत्र
याचिका के अनुसार, बहू को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए सास-ससुर की एनओसी ली गई थी. नौकरी मिलने के समय बहू ने परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल और उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने का शपथ पत्र भी दिया था. आरोप है कि कुछ समय बाद बहू ने ससुराल छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली. इसके बाद उसने सास-ससुर को आर्थिक सहायता देना भी बंद कर दिया.

हाईकोर्ट ने माना- जिम्मेदारी से नहीं बच सकती
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि बहू को अनुकंपा नियुक्ति परिवार के आर्थिक सहारे के उद्देश्य से मिली थी. ऐसे में उसके वेतन का एक हिस्सा नियमित रूप से सास को दिया जाना चाहिए. साथ ही मृत बेटे से जुड़े टर्मिनल बेनिफिट्स में भी सास का हिस्सा तय किया जाए.

हर महीने वेतन का 25 फीसदी मिलेगा
बहू की ओर से आरोपों का विरोध किया गया. उसकी तरफ से कहा गया कि सास-ससुर उसके साथ उचित व्यवहार नहीं करते और उनके दूसरे बेटे उनका भरण-पोषण करते हैं. दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बहू के वेतन का 25 फीसदी हिस्सा हर महीने सास के बैंक खाते में जमा कराने का आदेश दिया. साथ ही टर्मिनल बेनिफिट्स की आधी राशि सास को देने के निर्देश दिए.

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार की सुरक्षा
कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति पर परिवार के अन्य आश्रितों के हितों की रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसी नियुक्ति को केवल व्यक्तिगत रोजगार लाभ के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसका मूल उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है.

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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