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अकाल के मुहाने पर राजस्थान: मानसून की बेरुखी से गहराया जल संकट, इन 11 जिलों में मंडरा रहा बड़ा खतरा

Jaipur News: राजस्थान में इस मानसून सामान्य से 17.40% कम बारिश दर्ज हुई है. पाली, जैसलमेर और जालोर में बारिश की भारी कमी से सूखे जैसे हालात हैं. फसलों और पशुओं के चारे पर संकट के बीच सरकार ने पेयजल, चारा और फसल नुकसान के आकलन के लिए कदम उठाए हैं.

अकाल के मुहाने पर राजस्थान: मानसून की बेरुखी से गहराया जल संकट, इन 11 जिलों में मंडरा रहा बड़ा खतरा
Image Credit: बाजरा, मूंग और ग्वार की फसलों पर असर.

Jaipur News: राजस्थान में मानसून की विदाई के साथ ही बारिश की कमी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. अक्टूबर के आखिरी सप्ताह के बाद प्रदेश में बरसात पूरी तरह थमने की संभावना जताई जा रही है. इस साल कमजोर मानसून ने राज्य के कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी है. कम बारिश के कारण खेती, पेयजल और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. कई क्षेत्रों में हालात अकाल जैसी स्थिति की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं.

सामान्य से 17.40 प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में राजस्थान में औसतन 350.83 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है. इसके मुकाबले राज्य में सामान्य बारिश का औसत 424.71 मिलीमीटर है. यानी इस बार प्रदेश में सामान्य से 17.40 प्रतिशत कम बारिश हुई.

पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो मानसून की तस्वीर में बड़ा अंतर नजर आता है. साल 2023 में राजस्थान में 680.13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. उस दौरान कई इलाकों में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ जैसे हालात बने थे. इसके उलट, इस साल कई क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक बारिश नहीं होने से पानी की कमी गहराने लगी है.

पश्चिमी राजस्थान में सबसे ज्यादा असर
कम बारिश से प्रदेश के 11 जिले गंभीर रूप से प्रभावित बताए गए हैं. इन क्षेत्रों में सामान्य से 25 प्रतिशत या इससे अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है. पश्चिमी राजस्थान के कुछ जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है.

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पाली में सामान्य से 58.57 प्रतिशत कम बारिश हुई. जैसलमेर में वर्षा की कमी 54.24 प्रतिशत और जालोर में 50.72 प्रतिशत दर्ज की गई. इन आंकड़ों से इन जिलों में पानी की कमी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

इसके अलावा बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, बालोतरा, भीलवाड़ा, जोधपुर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, डूंगरपुर और कोटपूतली-बहरोड़ में भी सामान्य के मुकाबले 20 से 40 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है.

पड़ोसी राज्यों में भी कमजोर रहा मानसून
बारिश की कमी का असर सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा. पड़ोसी राज्यों में भी इस मानसून सीजन में सामान्य से कम वर्षा हुई. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में सामान्य से 41 प्रतिशत, हरियाणा में 23 प्रतिशत, गुजरात में 10 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई.

राजस्थान में साल 2015 में भी सूखे जैसी स्थिति बनी थी. उस साल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से 9 प्रतिशत अधिक रही थी और असर कुछ तहसीलों तक सीमित बताया गया था. इस बार बारिश की कुल मात्रा कम रहने के कारण हालात अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं.

बाजरा, मूंग और ग्वार की फसलों पर असर
पर्याप्त बारिश नहीं होने से कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है. बाजरा, मूंग, ग्वार और विभिन्न दालों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. बारिश की कमी से किसानों की चिंता बढ़ी है, वहीं पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी चुनौती बन रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है. सोशल मीडिया पर साझा जानकारी के अनुसार, जोधपुर के करीब 2,000, बाड़मेर के 2,460, बालोतरा के 1,216 और जैसलमेर के 961 गांव अकाल की चपेट में बताए गए हैं.

सरकार ने शुरू की राहत की तैयारी
कमजोर मानसून से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए भजनलाल सरकार ने आपातकालीन कार्ययोजना लागू की है. पेयजल की कमी दूर करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति जारी रखने की व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही जिला कलेक्टरों को एक-एक करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है.

पशुओं के लिए चारे की कमी दूर करने के उद्देश्य से 31 जिलों में पड़ोसी राज्यों से मदद लेने की योजना भी बनाई गई है. दूसरी ओर, फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी का काम जारी है. इसके तहत प्रभावित जिलों को गंभीर और अर्ध-गंभीर श्रेणियों में बांटकर निगरानी की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को सौंपी गई है.

किसानों और ग्रामीण इलाकों के सामने बड़ी चुनौती
राजस्थान में बारिश की कमी का असर अब खेती से आगे बढ़कर पेयजल और पशुपालन तक पहुंच रहा है. ऐसे में राहत योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा. आने वाले समय में पानी, चारे और फसल नुकसान की स्थिति पर निगरानी प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिए खास मायने रखेगी.
 

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Sandhya Yadav

Sandhya Yadav

लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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