Rajasthan Crime News: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के रिटायर्ड ADG को ही डिजिटल अरेस्ट करने के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पुलिस और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर ऐसा डराया कि ADG ने अपने खातों से 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए. इस केस में अब तक 6 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं.
ऐसे शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल
ADG साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि सेवानिवृत्त ADG, GSI को 9 अगस्त से मोबाइल और WhatsApp कॉल आने लगे थे. कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया. पीड़ित को कहा गया कि उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और वह मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस गया है. इसके बाद शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल.
सरकारी अधिकारी बनकर कॉल, मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर, गिरफ्तारी वारंट भेजना, लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी, किसी से संपर्क नहीं करने की हिदायत, लाइव लोकेशन चालू रखने का दबाव और बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया गया.
9 से 18 अगस्त तक रखा डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठगों ने रिटायर्ड ADG को 9 से 18 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान फर्जी सरकारी दस्तावेज और गिरफ्तारी वारंट भी WhatsApp पर भेजे. पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया. किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं करने और लाइव लोकेशन चालू रखने का दबाव बनाया गया. इसके बाद बैंक खाते की जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में RTGS करवाया गया.
2.12 करोड़ रुपए करवाए ट्रांसफर
रिटायर्ड अधिकारी से 13 अगस्त को ICICI Bank के एक खाते में 2.02 करोड़ रुपए और 18 अगस्त को YES BANK के खाते में 10.10 लाख रुपए RTGS करवाए. यानी कुछ ही दिनों में पीड़ित से कुल 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए.
ठगी की रकम को इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर लेयरिंग और डायवर्जन किया गया. साइबर पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, KYC, मोबाइल नंबर, CDR और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया.
साहिल के खाते में पहुंची ठगी की रकम
जांच में पता चला कि ठगी की रकम का कुछ हिस्सा साहिल कुमार सुरेला के IDFC First Bank खाते में पहुंचना सामने आया. पुलिस ने आरोपी को दस्तयाब कर गिरफ्तार किया.
पूछताछ में सामने आया कि साहिल ने अपना बैंक खाता दूसरे व्यक्ति रवि कुमार घोसल्या को उपलब्ध कराया था. रवि ने बैंक खाता खुलवाते समय अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज करवाए और ATM कार्ड समेत बैंकिंग सामग्री भी अपने पास रख ली. साहिल के आधार कार्ड में भी रवि ने अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया. आरोपी के मुताबिक खाते के बदले उसे रकम और करीब 5 से 6 हजार रुपए कमीशन मिला.
अब तक छह आरोपी गिरफ्तार
इधर, मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. साइबर फ्रॉड की रकम की मनी ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी एवं बैंकिंग साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है.
पूरी मनी ट्रेल पर पुलिस की नजर
अब पुलिस की नजर पूरी मनी ट्रेल पर है. WhatsApp और Telegram रिकॉर्ड, CDR और IPDR, CAF, बैंकिंग ट्रांजेक्शन इन सभी की जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 2.12 करोड़ की रकम आगे किन-किन खातों में गई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं.
साइबर पुलिस का साफ संदेश है कि पुलिस, ED, NIA या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही गिरफ्तारी से बचने के नाम पर खाते में पैसे जमा करवाती है.