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Rajasthan Crime: कश्मीर की वादियों में 17 साल से फरारी काट रहे चरस तस्कर के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने बड़ा ऑपरेशन चलाया है. ANTF ने ‘ऑपरेशन विषधरासीम’ के तहत 25 हजार के इनामी आरोपी शबीर अहमद उर्फ हाजी को अनंतनाग से गिरफ्तार किया है. वर्ष 2009 में सामने आए चरस के एक बड़े नेटवर्क में हाजी को मुख्य सूत्रधार बताया गया था. खास बात ये कि आरोपी की तलाश में राजस्थान पुलिस की ANTF टीम ने कश्मीर में कभी बाइक राइडर तो कभी स्थानीय मजदूर बनकर सूचनाएं जुटाईं और आखिरकार ग्रे रंग की 800 कार ने पुलिस को आरोपी के दरवाजे तक पहुंचा दिया.
17 साल से पुलिस की पकड़ से था दूर
प्रदेश की जनता को नशे के नर्क में धकेलने वाले तस्करों के खिलाफ राजस्थान पुलिस की ANTF लगातार कार्रवाई कर रही है. ANTF प्रदेश में बरसों से फरार आरोपियों की देश के विभिन्न राज्यों से धरपकड़ कर रही है. 17 साल यानी करीब 6 हजार दिन, राजस्थान पुलिस की पकड़ से दूर रहा एक ऐसा आरोपी, जिसके तार चरस के उस नेटवर्क से जुड़े थे, जिसकी जड़ें कश्मीर से लेकर गुजरात तक फैली थीं. वर्ष 2009 में दिल्ली से अहमदाबाद जा रही ट्रेन और ट्रेन में पकड़ी गई चरस की बड़ी खेप. मामले की जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कश्मीर में बैठे शबीर अहमद उर्फ हाजी का नाम. पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही हाजी ने अनंतनाग और आसपास के इलाकों में ठिकाने बदलने शुरू कर दिए. कभी ससुराल तो कभी रिश्तेदारों के यहां. इसी तरह वह करीब 17 साल तक पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा. लेकिन पुराने केस की फाइल फिर खोली. और शुरू हुआ ANTF का ऑपरेशन विषधरासीम.
2009 में पकड़ी गई थी चरस की बड़ी खेप
कश्मीर से राजस्थान होकर गुजरात सप्लाई
जीआरपी और पुलिस कार्रवाई में पकड़ी गई बड़ी खेप
तस्करी का मुख्य सूत्रधार 17 साल से था फरार
GRP ने घोषित किया इनाम - 25,000
बाइक राइडर और मजदूर बनकर जुटाई जानकारी
इधर आरोपी का सुराग मिलने पर ANTF टीम जयपुर से अनंतनाग पहुंची. पहचान छिपाकर इलाके में घूमी. कभी बाइक राइडर बनकर तो कभी स्थानीय मजदूरों के बीच रहकर जानकारी जुटाई. आरोपी के घर के आसपास की दुकानों और गलियों में लगातार निगरानी की गई. तभी टीम को एक अहम इनपुट मिला. सूचना थी कि आरोपी ग्रे रंग की 800 कार से आता-जाता है. टीम ने संदिग्ध ठिकाने के आसपास तीन दिन तक निगरानी रखी. और फिर ग्रे रंग की वही कार दिखाई दी.
ग्रे रंग की कार ने पहुंचाया आरोपी तक
टीम ने बाइक से कार का पीछा किया. कार एक घर के बाहर रुकी. एक व्यक्ति उतरा और घर के अंदर चला गया. टीम का शक पुख्ता हो चुका था. तुरंत जम्मू-कश्मीर पुलिस को सूचना दी गई. स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और फिर घर पर दबिश दी गई. 17 साल से फरार हाजी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में था. ऐसे में 17 साल से चल रही फरारी का अंत हुआ और शबीर अहमद उर्फ हाजी गिरफ्तार हुआ.
पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में चरस की खेती और स्थानीय कारोबार पर सख्ती बढ़ी तो उसने बाहरी राज्यों में बड़ी खेप सप्लाई करने का रास्ता चुना. शबीर पर यह भी आरोप है कि उसने अपने नेटवर्क को बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिशियन कॉन्ट्रैक्टर का ए-क्लास कार्ड बनवाया और ठेकों के जरिए दूसरे राज्यों के लोगों से संपर्क बढ़ाया.
परिवार का भी चरस कारोबार से कनेक्शन
पुलिस के अनुसार हाजी के परिवार का भी चरस कारोबार से पुराना कनेक्शन था. पिता कथित तौर पर चरस तैयार कर आसपास के इलाकों में सप्लाई करते थे और कम उम्र में ही शबीर भी इस अवैध धंधे से जुड़ गया. बाद में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी की और मेडिकल स्टोर पर दवाइयां सप्लाई करता था. इस दौरान उसकी पहचान चरस के ग्राहकों से हुई. इसके बाद वह आसपास के क्षेत्रों में चरस की व्यवस्था कर ग्राहकों तक चरस पहुंचाने लगा. उस पर धीरे-धीरे नेटवर्क को दूसरे राज्यों तक फैलाने का आरोप है.
पकड़े जाने पर आरोपी ने क्या कहा?
पकड़े जाने पर आरोपी चौंका और बोला कि आतंकवाद के नाम का फायदा उठाकर वह 17 वर्ष से सुरक्षित रूप से फरारी काट रहा था. ऐसे में पुलिस ने किसके दम पर पुलिस ने घुसने की हिम्मत की. बाहरी राज्यों की टीम अनंतनाग इलाके में नहीं आती, इसलिए बेरोकटोक घूमता रहा.
इस तरह फैलाया नेटवर्क
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बनकर
ग्राहकों से संपर्क
ग्राहकों को चरस की सप्लाई
ए क्लास कॉन्ट्रैक्टर की पहचान
इसके बहाने बाहरी राज्यों में संपर्क
जम्मू-कश्मीर पुलिस का भी मिला सहयोग
आईजी एएनटीएफ विकास कुमार ने कहा कि इस पूरी कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर पुलिस का सहयोग भी अहम रहा. ANTF ने पहले गोपनीय तरीके से आरोपी का ठिकाना वेरिफाई किया और फिर स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया. अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है. जांच का फोकस इस बात पर है कि 17 साल में हाजी ने चरस तस्करी का नेटवर्क कितना फैलाया और राजस्थान समेत दूसरे राज्यों में उसके कौन-कौन से संपर्क थे.