अपना घर खरीदने का सपना होगा आसान! राजस्थान की नई आवास योजना में क्या-क्या बदला?
राजस्थान में CM जन आवास योजना 2026 का नया प्रारूप जारी हुआ है. EWS और LIG परिवारों को बड़े फ्लैट, पार्किंग और निर्मित मकान देने का प्रस्ताव है. 20 नवंबर तक आमजन आपत्ति और सुझाव दे सकेंगे.
राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए जल्द ही नई मुख्यमंत्री जन आवास योजना 2026 लागू की जा सकती है. नगरीय विकास विभाग ने प्रस्तावित योजना का प्रारूप जारी कर आमजन से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. इस पर 20 नवंबर 2026 तक सुझाव और आपत्तियां दी जा सकेंगी.
नई योजना में गरीबों को केवल भूखंड देने के बजाय निर्मित मकान उपलब्ध कराने का विकल्प भी शामिल किया गया है. इसके अलावा मकानों का आकार बढ़ाने, पार्किंग की सुविधा देने, निर्माण के लिए अलग फंड बनाने और आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी रखने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. आइए जानते हैं कि नई योजना में क्या बदलाव किए गए हैं और इससे प्रदेश के गरीब परिवारों को किस तरह फायदा मिल सकता है.
2009 की नीति और 2015 की योजना के बाद अब नया बदलाव
राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2009 में अफोर्डेबल हाउसिंग नीति लागू की गई थी. इसके बाद इस नीति में कई बदलाव किए गए और वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री जन आवास योजना नए स्वरूप में शुरू की गई.
हालांकि, करीब 11 साल पुरानी योजना के क्रियान्वयन के दौरान कई कमियां सामने आईं. इनमें मकानों का समय पर निर्माण पूरा नहीं होना, वास्तविक पात्र गरीब परिवारों तक आवास का लाभ नहीं पहुंचना और योजना के प्रावधानों की खामियों का फायदा उठाए जाने जैसी समस्याएं शामिल थीं.
इन अनुभवों को देखते हुए प्रदेश की मौजूदा भजनलाल सरकार ने नई मुख्यमंत्री जन आवास योजना लागू करने का फैसला किया है. नगर नियोजन विभाग और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने मिलकर इसका प्रारूप तैयार किया है. अब इस प्रारूप को नगरीय विकास विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है.
गरीबों को भूखंड के बजाय मिल सकेंगे बने हुए मकान
नई मुख्यमंत्री जन आवास योजना 2026 में सबसे अहम बदलाव प्लॉटेड योजनाओं को लेकर किया गया है. अब गरीब परिवारों को केवल भूखंड उपलब्ध कराने के बजाय निर्मित मकान देने का विकल्प भी रहेगा. इस व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास (UIT), राजस्थान आवासन मंडल और निजी विकासकर्ता गरीबों के लिए तैयार मकान उपलब्ध करा सकेंगे.
आवासन मंडल की योजनाओं में EWS और LIG वर्ग के लिए आरक्षित आवासीय विक्रय योग्य क्षेत्रफल के 50 प्रतिशत के बराबर निर्मित मकान बनाने होंगे. इन मकानों का निर्माण भूतल और अधिकतम तीन ऊपरी मंजिलों तक किया जा सकेगा. इसी तरह विकास प्राधिकरण और UIT की योजनाओं में यह प्रावधान आवासीय विक्रय योग्य क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत पर लागू होगा. वहीं निजी विकासकर्ताओं की योजनाओं में कुल आवासीय विक्रय योग्य क्षेत्रफल के 15 प्रतिशत के बराबर मकान बनाने का प्रावधान रखा गया है.
EWS और LIG को पहले से बड़े मकान देने का प्रस्ताव
नई योजना में गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को पहले की तुलना में बड़े मकान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है. इसके लिए कारपेट एरिया भी निर्धारित किया गया है.
प्रस्तावित नियमों के अनुसार:
- EWS वर्ग: 30 से 45 वर्गमीटर कारपेट एरिया का फ्लैट मिलेगा.
- LIG वर्ग: 45 वर्गमीटर से अधिक और 60 वर्गमीटर तक कारपेट एरिया का फ्लैट मिलेगा.
इस बदलाव से दोनों वर्गों के परिवारों को अपेक्षाकृत ज्यादा जगह वाले मकान मिल सकेंगे.
इसके अलावा निजी विकासकर्ता की जमीन पर सस्ते मकान बनाने वाली योजनाओं में अब मध्यम आय वर्ग-A (MIG-A) को भी मकान उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. सरकारी जमीन पर निजी विकासकर्ता की ओर से मकान बनाने वाली योजनाओं में भी इस वर्ग को शामिल किया जा सकेगा.
मकान बनाने के लिए मिलेगा ज्यादा समय, BAR में भी बदलाव
प्रस्तावित योजना में मकानों का निर्माण पूरा करने की समय सीमा को पहले के मुकाबले करीब दोगुना करने का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य निर्माण कार्य को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का अवसर देना है.
वहीं निजी फ्लैट वाली योजनाओं में गरीबों के लिए मकान उपलब्ध कराने के अनुपात में भी बदलाव प्रस्तावित है. वर्तमान में लागू वर्ष 2015 की योजना के तहत 11.25 प्रतिशत BAR के अनुसार मकान उपलब्ध कराए जाते हैं. नई प्रस्तावित योजना में इसे घटाकर 10 प्रतिशत BAR करने का प्रावधान रखा गया है.
मुख्य योजना से कितनी दूरी पर मिल सकेंगे मकान?
नई योजना में निजी विकासकर्ताओं को फ्लैटेड डेवलपमेंट स्कीम के तहत मुख्य परियोजना के बजाय दूसरे स्थान पर भी गरीबों के लिए मकान बनाने की छूट देने का प्रस्ताव है. हालांकि, इसके लिए मुख्य योजना से दूरी की सीमा तय की गई है.
प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार:
- मास्टर प्लान के नगरीकरण योग्य क्षेत्र या यू-1 क्षेत्र में मुख्य योजना होने पर 5 किलोमीटर के दायरे में मकान उपलब्ध कराए जा सकेंगे.
- बाहरी क्षेत्र में मुख्य योजना होने पर यह दूरी 3 किलोमीटर रखी गई है.
- 1 लाख से 10 लाख तक आबादी वाले शहरों में मुख्य योजना से 3 किलोमीटर के दायरे में मकान देने होंगे.
- 1 लाख तक की आबादी वाले शहरों में यह दूरी 2 किलोमीटर निर्धारित की गई है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य गरीबों को मुख्य परियोजना से बहुत दूर आवास मिलने की समस्या से बचाना है.
छोटी योजनाओं में राशि जमा कराने का भी विकल्प
प्रस्तावित योजना में कुछ छोटी परियोजनाओं के लिए राहत का प्रावधान भी किया गया है. दो हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाली प्लॉटेड योजना या एक हेक्टेयर से कम की ग्रुप हाउसिंग योजना में संबंधित विकासकर्ता पर गरीबों को सीधे मकान या भूखंड देने की बाध्यता नहीं होगी.
ऐसे मामलों में निजी विकासकर्ता निर्धारित फार्मूले के अनुसार संबंधित निकाय में राशि जमा करा सकेंगे.
अधूरे मकानों को पूरा करने के लिए बनेगा डेडिकेटेड फंड
नई योजना में एक अलग डेडिकेटेड फंड बनाने का भी प्रस्ताव है. इसमें विकासकर्ताओं से प्राप्त राशि और गरीबों की सहायता के लिए संचालित योजनाओं से मिलने वाली रकम जमा की जाएगी.
इस फंड का इस्तेमाल अधूरे पड़े मकानों का निर्माण पूरा कराने के लिए किया जा सकेगा. इससे उन आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है, जो किसी कारण से बीच में अटक गई हैं.
EWS और LIG मकानों के साथ मिलेगी पार्किंग सुविधा
नई योजना में पार्किंग को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं. EWS और LIG परिवारों को दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए निर्धारित अनुपात में पार्किंग उपलब्ध करानी होगी.
- प्रत्येक EWS मकान या भूखंड पर एक दोपहिया वाहन की पार्किंग होगी.
- चार EWS मकान या भूखंड पर एक चारपहिया वाहन की पार्किंग उपलब्ध कराई जाएगी.
- प्रत्येक LIG मकान या भूखंड पर एक दोपहिया वाहन की पार्किंग होगी.
- तीन LIG मकान या भूखंड पर एक चारपहिया वाहन की पार्किंग उपलब्ध कराई जाएगी.
इसके अलावा EWS और LIG वर्ग के लिए आरक्षित मकानों या भूखंडों का आवंटन संबंधित सरकारी निकाय के माध्यम से ही किया जाएगा. इससे आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
20 नवंबर तक दे सकेंगे सुझाव और आपत्तियां
मुख्यमंत्री जन आवास योजना 2026 फिलहाल प्रस्तावित प्रारूप के स्तर पर है. नगरीय विकास विभाग ने इसे सार्वजनिक करते हुए 20 नवंबर 2026 तक आमजन से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं.
इन सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद योजना के अंतिम स्वरूप को लेकर निर्णय किया जाएगा. नई योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती, बड़े और बेहतर सुविधाओं वाले मकान उपलब्ध कराना है. हालांकि, इसका वास्तविक लाभ योजना के अंतिम प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.