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जानिए क्यों NOTA से भी हार गए देसी खानपान वाले इंफ्लुएंसर: सरपंच चुनाव में मिले केवल 33 वोट

राजस्थान के फलौदी में सोशल मीडिया स्टार ओमप्रकाश बिश्नोई को सरपंच चुनाव में सिर्फ 33 वोट मिले. इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले ओमप्रकाश ने नशामुक्ति को चुनावी मुद्दा बनाया था.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 27, 2026, 09:20 AM IST | Updated: Oct 27, 2026, 09:25 AM IST
Image Credit: चुनाव मैदान में 'नोटा' से भी पीछे छूटे राजस्थान के ओमप्रकाश बिश्नोई.
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राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नतीजों के बीच फलौदी के एक उम्मीदवार की खूब चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के बीच पहचान रखने वाले इस शख्स को सरपंच चुनाव में सिर्फ 33 वोट मिले. उम्मीदवार का नाम ओमप्रकाश बिश्नोई है, जिनके देसी अंदाज में खाना खाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. ऑनलाइन पॉपुलैरिटी और चुनाव में मिले वोटों के बीच का यह अंतर लोगों का ध्यान खींच रहा है.

इंद्रों की ढाणी-2 पंचायत से लड़ा चुनाव
ओमप्रकाश बिश्नोई ने फलौदी की इंद्रों की ढाणी-2 पंचायत से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था. चुनाव के नतीजे सामने आए तो उन्हें केवल 33 वोट मिले. बताया गया है कि इस पंचायत में कुल 1,600 वोट थे. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के बावजूद कम वोट मिलने की वजह से उनका चुनाव परिणाम चर्चा का विषय बन गया.

ओमप्रकाश अपने वीडियो में देसी अंदाज में खाना खाते दिखाई देते हैं. खास तौर पर ज्यादा घी के साथ भोजन करने के उनके वीडियो काफी लोकप्रिय हुए हैं. इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी पहचान बनी है.

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गायों की सेवा के बाद जनता की सेवा का फैसला
ओमप्रकाश बिश्नोई ने बताया कि वह लंबे समय से धार्मिक कार्यों में भाग लेते रहे हैं और बड़ी संख्या में गायों की सेवा भी करते हैं. उनके मुताबिक, कई साल तक गायों की सेवा करने के बाद उन्होंने जनता की सेवा करने का विचार किया. इसी उद्देश्य से उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ने का फैसला लिया, लेकिन उन्हें मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया.

उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान वह मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से मिले. लोगों को देसी घी का भोजन कराया और भंडारे भी चलाए. मुलाकात के दौरान कई लोगों ने उनके समर्थन की बात कही थी, लेकिन चुनाव परिणाम उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे.

नोटा को मिले 40 वोट, परिवार ने भी दिया साथ
ओमप्रकाश के अनुसार, पंचायत में चार उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. उन्हें कुल 33 वोट मिले, जबकि नोटा को 40 वोट मिले. उन्होंने बताया कि उनके मिले वोटों में 11 वोट परिवार के सदस्यों के थे. इसके अलावा उनके कुछ दोस्तों ने भी उन्हें वोट दिया.

नशामुक्ति को बनाया चुनावी मुद्दा
ओमप्रकाश बिश्नोई ने अपनी हार की वजह बताते हुए नशे को लेकर अपनी नीति का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह हमेशा नशे के विरोध में रहे हैं और इसी कारण उन्होंने चुनाव में शराब नहीं बांटी. उनका मानना है कि कुछ मतदाता आज भी ऐसे कारणों को ध्यान में रखकर वोट देते हैं. उन्होंने नशामुक्ति को भी अपने चुनाव प्रचार का मुद्दा बनाया था.

सोशल मीडिया पर लाखों में फॉलोअर्स
ओमप्रकाश बिश्नोई के इंस्टाग्राम पर 14 लाख यानी 1.4 मिलियन फॉलोअर्स बताए गए हैं. फेसबुक पर उनके 2.32 लाख फॉलोअर्स हैं, यूट्यूब पर पांच लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं. इसके बावजूद सरपंच चुनाव में उन्हें केवल 33 वोट मिले. यही वजह है कि उनकी सोशल मीडिया लोकप्रियता और चुनावी नतीजे के बीच का अंतर चर्चा में है.
 

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