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जन्म-मृत्यु सर्टिफिकेट के लिए अब मजिस्ट्रेट के चक्कर! नए नियमों से बढ़ी मुश्किलें या पारदर्शिता? जानें पूरी खबर

Birth Death Registration: जयपुर में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बदलाव होने जा रहा है. नई व्यवस्था कल से लागू होगी और विलंब से आने वाले आवेदनों पर इसका असर पड़ेगा. एक साल से अधिक और दो साल तक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों के पंजीकरण के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट घटना की सत्यता की जांच के बाद आदेश जारी कर सकेंगे. वहीं दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन और आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा. आवेदकों को निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा.

Written By Ansh Raj
Published: Sep 30, 2026, 08:25 AM IST | Updated: Sep 30, 2026, 08:34 AM IST
Image Credit: Birth Death Registration
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Rajasthan News: जयपुर में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को लेकर नियमों में बदलाव होने जा रहा है. कल से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए नई व्यवस्था लागू होगी. खासतौर पर निर्धारित समय सीमा के बाद आने वाले आवेदनों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और सत्यापन आधारित होगी. नए प्रावधानों के तहत देरी से मिलने वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण आवेदनों पर घटना की सत्यता की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

एक से दो साल पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट की मंजूरी

नई व्यवस्था के तहत यदि जन्म या मृत्यु की घटना को एक साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन दो साल से ज्यादा नहीं हुए हैं, तो ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी. घटना की वास्तविकता और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद संबंधित अधिकारी आदेश जारी कर सकेंगे.

ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट आदेश जारी कर सकेंगे. यानी एक साल से अधिक पुराने मामलों में सीधे पंजीकरण कराने के बजाय पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन और सक्षम अधिकारी की मंजूरी लेनी होगी.

दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में प्रक्रिया सख्त

दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों में नियम और सख्त होंगे. ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन और आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा. इसके लिए घटना की सत्यता की जांच महत्वपूर्ण होगी. संबंधित आवेदक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

देरी पर शुल्क भी देना होगा

नए प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित अवधि में नहीं दी जाती है, तो ऐसे मामलों में विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया अपनानी होगी. इसमें सिर्फ घटना की सत्यता का सत्यापन ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि निर्धारित शुल्क भी जमा कराना होगा. यानी समय पर सूचना नहीं देने की स्थिति में आवेदक को अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा.

सत्यापन के बाद ही आगे बढ़ेगा मामला

नई व्यवस्था का मुख्य आधार विलंब से आने वाले मामलों में घटना की सत्यता का सत्यापन करना है. अलग-अलग अवधि के पुराने मामलों के लिए अलग स्तर के अधिकारियों की मंजूरी का प्रावधान किया गया है. एक से दो साल तक पुराने मामलों में सक्षम मजिस्ट्रेट और दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी. कल से लागू होने वाली इस व्यवस्था के बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा.  

 

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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