जातिवाद के आरोपों के बीच नरेश मीणा का सोशल इंजीनियरिंग दांव, मीणा बहुल वार्ड में भील महिला को बनाया प्रत्याशी
बारां के मांगरोल पंचायत समिति के मीणा बहुल वार्ड-1 से नरेश मीणा ने भील समाज की ग्रेजुएट महिला राममूर्ति भील को प्रत्याशी घोषित किया. वार्ड में मीणा समाज के करीब 3,500 और भील समाज के लगभग 50 मतदाता बताए गए हैं.
राजस्थान के बारां जिले में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं. इसी बीच भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा ने मांगरोल पंचायत समिति के वार्ड नंबर-1 में भील समाज की महिला को प्रत्याशी घोषित कर चर्चा बढ़ा दी है. मीणा बहुल इस वार्ड में राममूर्ति भील को उम्मीदवार बनाने के फैसले को सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. नरेश मीणा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव लड़ रहे हैं. उनके इस फैसले के बाद क्षेत्र में जातिगत समीकरणों और उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
मीणा बहुल वार्ड में भील समाज की महिला को मौका
मांगरोल पंचायत समिति का वार्ड नंबर-1 अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस वार्ड में मीणा समाज के करीब 3,500 मतदाता हैं, जबकि भील समाज के मतदाताओं की संख्या लगभग 50 बताई गई है. इसके बावजूद नरेश मीणा ने तिसाया गांव में आयोजित सभा में भील समाज की ग्रेजुएट महिला राममूर्ति भील को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की. यह फैसला ऐसे वार्ड में लिया गया है, जहां मीणा समाज के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक बताई जा रही है.
छह गांवों के लोगों की सभा में हुआ फैसला
तिसाया गांव के नरसिंह भगवान मंदिर परिसर में आयोजित सभा में वार्ड के छह गांवों के लोग जुटे थे. इसी बैठक में प्रत्याशी के चयन को लेकर चर्चा हुई. जानकारी के मुताबिक, मीणा समाज के चार दावेदारों की सहमति के बाद राममूर्ति भील के नाम पर फैसला लिया गया. इस तरह उम्मीदवार चयन में केवल एक नाम की घोषणा ही नहीं हुई, बल्कि दावेदारी के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी सामने आई. हालांकि, इस फैसले का चुनावी असर क्या होगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
जातिवाद के आरोपों के बीच सर्वसमाज का संदेश
नरेश मीणा पहले जातिवाद के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं. अब मीणा बहुल वार्ड में भील समाज की महिला को प्रत्याशी घोषित करने को सर्वसमाज को साथ लेने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. राजनीतिक तौर पर इसे सोशल इंजीनियरिंग का दांव कहा जा रहा है. हालांकि, केवल प्रत्याशी चयन के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इससे किसी खास समुदाय के वोट किस दिशा में जाएंगे.
तिसाया गांव फिर चर्चा में
तिसाया गांव का नरेश मीणा से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम भी चर्चा में रहा था. अंता विधानसभा चुनाव के दौरान इसी गांव में उन्हें खून से तौलने की घटना सुर्खियों में आई थी. अब पंचायत चुनाव के लिए इसी गांव में आयोजित सभा और राममूर्ति भील को प्रत्याशी बनाने के फैसले ने क्षेत्र का ध्यान फिर खींचा है. फिलहाल, नरेश मीणा के इस फैसले को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि राममूर्ति भील की उम्मीदवारी को वार्ड के मतदाताओं का कितना समर्थन मिलता है और यह फैसला चुनावी नतीजों पर क्या असर डालता है.