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जातिवाद के आरोपों के बीच नरेश मीणा का सोशल इंजीनियरिंग दांव, मीणा बहुल वार्ड में भील महिला को बनाया प्रत्याशी

बारां के मांगरोल पंचायत समिति के मीणा बहुल वार्ड-1 से नरेश मीणा ने भील समाज की ग्रेजुएट महिला राममूर्ति भील को प्रत्याशी घोषित किया. वार्ड में मीणा समाज के करीब 3,500 और भील समाज के लगभग 50 मतदाता बताए गए हैं.

Written ByAnsh Raj
Published: Oct 19, 2026, 10:28 AM IST|Updated: Oct 19, 2026, 10:34 AM IST
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जातिवाद के आरोपों के बीच नरेश मीणा का सोशल इंजीनियरिंग दांव, मीणा बहुल वार्ड में भील महिला को बनाया प्रत्याशी
Image Credit: Naresh Meena

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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राजस्थान के बारां जिले में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं. इसी बीच भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा ने मांगरोल पंचायत समिति के वार्ड नंबर-1 में भील समाज की महिला को प्रत्याशी घोषित कर चर्चा बढ़ा दी है. मीणा बहुल इस वार्ड में राममूर्ति भील को उम्मीदवार बनाने के फैसले को सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. नरेश मीणा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव लड़ रहे हैं. उनके इस फैसले के बाद क्षेत्र में जातिगत समीकरणों और उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

मीणा बहुल वार्ड में भील समाज की महिला को मौका

मांगरोल पंचायत समिति का वार्ड नंबर-1 अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस वार्ड में मीणा समाज के करीब 3,500 मतदाता हैं, जबकि भील समाज के मतदाताओं की संख्या लगभग 50 बताई गई है. इसके बावजूद नरेश मीणा ने तिसाया गांव में आयोजित सभा में भील समाज की ग्रेजुएट महिला राममूर्ति भील को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की. यह फैसला ऐसे वार्ड में लिया गया है, जहां मीणा समाज के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक बताई जा रही है.

छह गांवों के लोगों की सभा में हुआ फैसला

तिसाया गांव के नरसिंह भगवान मंदिर परिसर में आयोजित सभा में वार्ड के छह गांवों के लोग जुटे थे. इसी बैठक में प्रत्याशी के चयन को लेकर चर्चा हुई. जानकारी के मुताबिक, मीणा समाज के चार दावेदारों की सहमति के बाद राममूर्ति भील के नाम पर फैसला लिया गया. इस तरह उम्मीदवार चयन में केवल एक नाम की घोषणा ही नहीं हुई, बल्कि दावेदारी के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी सामने आई. हालांकि, इस फैसले का चुनावी असर क्या होगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

ये भी पढ़ें- अजमेर-जोधपुर-नागौर-बाड़मेर में RLP, डूंगरपुर में BAP की चुनौती! जानिए कहां बिना वोटिंग हो गई जीत?
 

जातिवाद के आरोपों के बीच सर्वसमाज का संदेश

नरेश मीणा पहले जातिवाद के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं. अब मीणा बहुल वार्ड में भील समाज की महिला को प्रत्याशी घोषित करने को सर्वसमाज को साथ लेने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. राजनीतिक तौर पर इसे सोशल इंजीनियरिंग का दांव कहा जा रहा है. हालांकि, केवल प्रत्याशी चयन के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इससे किसी खास समुदाय के वोट किस दिशा में जाएंगे.

तिसाया गांव फिर चर्चा में

तिसाया गांव का नरेश मीणा से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम भी चर्चा में रहा था. अंता विधानसभा चुनाव के दौरान इसी गांव में उन्हें खून से तौलने की घटना सुर्खियों में आई थी. अब पंचायत चुनाव के लिए इसी गांव में आयोजित सभा और राममूर्ति भील को प्रत्याशी बनाने के फैसले ने क्षेत्र का ध्यान फिर खींचा है. फिलहाल, नरेश मीणा के इस फैसले को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि राममूर्ति भील की उम्मीदवारी को वार्ड के मतदाताओं का कितना समर्थन मिलता है और यह फैसला चुनावी नतीजों पर क्या असर डालता है.

 

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