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दशहरे पर कोटा में अनोखी रस्म: रावण दहन नहीं, पैरों से रौंदकर होता है वध, जानें क्या है 150 साल पुरानी परंपरा

कोटा में विजयदशमी पर जेठी समाज ने नांता स्थित बड़ा अखाड़ा परिसर में 150 साल पुरानी परंपरा निभाई. यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय अखाड़े की पवित्र मिट्टी से बनी रावण की आकृति की पूजा की गई और फिर बच्चों ने उसे पैरों से रौंदकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 20, 2026, 02:13 PM IST | Updated: Oct 20, 2026, 02:22 PM IST
Image Credit: कोटा की अनोखी परंपरा
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विजयदशमी के अवसर पर कोटा के नांता स्थित बड़ा अखाड़ा परिसर में जेठी समाज की ओर से 150 साल पुरानी परंपरा को निभाया गया. अखाड़े की मिट्टी से बनाए गए प्रतीकात्मक रावण की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद पुतले को पैरों से रौंदा गया. बता दें किशोरपुरा और नांता में जेठी समाज के अखाड़ों में दशहरे पर रावण वध की परंपरा अनोखे अंदाज में हर साल निभाई जाती है.

यहां अन्य जगहों की तरह रावण का पुतला जलाने के बजाय मिट्टी से रावण की आकृति बनाई जाती है. दशमी की सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इसके बाद बच्चे मिट्टी से बनी रावण की आकृति को पैरों तले रौंदते हैं. इस परंपरा को बुराई पर अच्छाई की जीत और अहंकार के अंत का प्रतीक माना जाता है.

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रावण वध के बाद अखाड़े में होते हैं कुश्ती के मुकाबले
इस अनुष्ठान के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ अखाड़ों की पुरानी खेल परंपरा भी जुड़ी हुई है. रावण को रौंदने की रस्म पूरी होने के बाद यहां पारंपरिक कुश्ती के मुकाबले आयोजित किए जाते हैं. इनमें पहलवान अपने दांव-पेच और शारीरिक दमखम का प्रदर्शन करते हैं.

श्राद्ध पक्ष में तैयार किया जाता है मिट्टी का रावण
जेठी समाज की ओर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत में अखाड़े की पवित्र मिट्टी को एकत्र कर रावण का स्वरूप तैयार किया गया था. उस पर ज्वारे उगाए गए थे. नवरात्र पर्व के दौरान 9 दिनों तक मंदिर के गर्भगृह के मुख्य पट पूरी तरह से बंद रहे.

नौ दिन की पूजा  
इस अवधि में केवल पुजारी और व्यवस्थापकों को ही अंदर प्रवेश की अनुमति थी, जबकि आम भक्तों ने बाहर से ही दर्शन-पूजन किया. 9 दिनों तक चले विशेष पूजा-अर्चना के बाद आज विजयदशमी के दिन यह उत्सव पूर्णाहूति के साथ संपन्न हुआ.

कोटा में 105 फीट के रावण का होगा दहन 
इधर, कोटा में 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले-2026 के तहत 20 अक्टूबर की शाम को रावण दहन का कार्यक्रम राजसी परंपरा के साथ आयोजित होगा. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस आयोजन में 105 फीट ऊंचा रावण और 72-72 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले विशेष आकर्षण रहेंगे. कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि होंगे, जबकि ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, विधायक संदीप शर्मा, शांति धारीवाल और कल्पना देवी अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे.

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3D तकनीक से तलवारबाजी करेगा रावण, घुमाएगा गर्दन
इस बार रावण का पुतला आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है. दिनभर साउंड इफेक्ट के साथ रावण अट्टहास करेगा. 3D तकनीक से उसकी तलवारबाजी दिखाई जाएगी. रावण 360 डिग्री पर गर्दन घुमाने, आंखें झपकाने और मूंछें हिलाने जैसी खूबियों से दर्शकों को आकर्षित करेगा. पुतले को तैयार करने में 20 कारीगरों ने करीब ढाई महीने मेहनत की. इसके निर्माण में 8 टन लोहा, 500 बांस की खपच्चियां, 1500 मीटर वेलवेट का कपड़ा, 3 क्विंटल रस्सी, जापानी कागज और रद्दी गत्ते का इस्तेमाल किया गया है.

कब होगा रावण दहन? 
रावण दहन का कार्यक्रम शाम 7:31 से 8:31 बजे के बीच होगा. इस दौरान भव्य आतिशबाजी से दशहरा मैदान जगमगा उठेगा. आयोजन को लेकर शहरवासियों में काफी उत्साह है और हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है. सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे. 

Report-Rahul Joshi 

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