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जोधपुर के नीले घर पर फिदा हुई रूसी हसीना,वाटर कलर में उकेरी 'ब्लू सिटी' की खूबसूरती

Jodhpur Blue City : रूस से आई एक विदेशी महिला सैलानी, जोधपुर की खूबसूरती पर इस कदर दिल हार बैठी कि उसने 'ब्लू सिटी' की यादों को हमेशा के लिए अपने साथ सहेजने का अनोखा तरीका ढूंढ निकाला. ये रूसी पर्यटक भीतरी शहर के एक नीले मकान के सामने बैठकर वाटर कलर से उसकी बारीक पेंटिंग तैयार कर रही है.

Written By Pragati Pant Awasthi
Published: Oct 15, 2026, 11:03 AM IST | Updated: Oct 15, 2026, 11:33 AM IST
Image Credit: jodhpur blue city russian tourist water color painting pundit raghunath house
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नीली छटा बिखेरते खूबसूरत मकान,तंग ऐतिहासिक गलियां और अद्भुत स्थापत्य कला, ये पहचान है राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध 'सूर्यनगरी' जोधपुर की. इस शहर का जादू एक बार फिर एक विदेशी मेहमान के सिर चढ़कर बोल रहा है.रूस से आई एक विदेशी महिला सैलानी इस खूबसूरती को कैनवास पर उकेर रही है.

घर का मालिक बेहद खुश
जिस घर की पेंटिंग बनाई जा रही है, उसके मालिक पंडित रघुनाथ बेहद खुश हैं और कहते हैं कि "हमारे साधारण से घर की तस्वीर विदेश तक पहुंचेगी, ये पूरे परिवार और जोधपुर के लिए गर्व की बात है. जब विदेशी मेहमान हमारी विरासत से प्रभावित होकर उसे अपनी कला में ढालते हैं, तो ये हमारी पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बुलंदी देता है.

कैनवास पर उतरी 'ब्लू सिटी'
रूसी पर्यटक के मुताबिक, जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत और नीली गलियों का सम्मोहन ऐसा है कि वो इसे सिर्फ अपनी आंखों में नहीं, बल्कि कैनवास पर हमेशा के लिए अमर करना चाहती थी. वॉटर कलर से बन रही ये पेंटिंग सिर्फ एक मकान की तस्वीर नहीं,बल्कि जोधपुर के रंगों,अपनायत और ऐतिहासिक भव्यता का एक खूबसूरत प्रतीक बनेगी. सूर्यनगरी का जादू सिर्फ पर्यटकों को खींचता ही नहीं, बल्कि उन्हें यहां की खूबसूरती को अपने दिल और कला में संजोने के लिए मजबूर भी कर देता है.

जोधपुर को ब्लू सिटी क्यों कहा जाता है ?
जोधपुर को 'ब्लू सिटी'या नीला शहर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके मेहरानगढ़ किले के आसपास बसे पुराने शहर के ज्यादातर मकान नीले रंग से रंगे हुए हैं,जो दूर से देखने पर पूरा एक नीला शहर दिखता है.

जोधपुर में नीले रंग के घर क्यों हैं ?
1459 ईस्वी में राव जोधा ने जोधपुर को बसाया था. जोधपुर चूने और मिट्टी के गारे से बने मकानों के लिए जाना जाता था. पुरानी इमारतों को दीमक और कीट-पतंगों के नुकसान से बचाने के लिए स्थानीय लोग चूने के लेप में कॉपर सल्फेट (नीला थोथा)मिलाते थे,जिससे मकानों पर प्राकृतिक नीला रंग चढ़ जाता था.दरअसल थार रेगिस्तान के मुहाने पर बसे होने के चलते ज्यादा गर्मी से बचना हमेशा से यहां के लोगों के लिए चुनौती रहा है. नीले रंग में सूरज की किरणों को परावर्तित करने का प्राकृतिक गुण होता है,इसलिए ऐतिहासिक काल से ही बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे भीतरी शहर के तापमान को कम रखने में मदद मिलती रही.

जोधपुर में नीले रंग वाली गलियां कहां है ?
जोधपुर में मुख्य नीली गलियों और क्षेत्रों में 'नवचौकिया' सबसे खास और चर्चित इलाके हैं, जहां की संकरी और नीली बस्तियों में देश-विदेश के पर्यटक सैलानी पसंद करते हैं.

रिपोर्टर- राकेश भारद्वाज

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मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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