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जयपुर SMS के डॉक्टरों ने रचा इतिहास: 22 साल के मरीज को मिला दूसरा जीवन! जानें कैसे हुआ जटिल बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल

जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज में 22 वर्षीय फैंकोनी एनीमिया मरीज का MAA योजना के तहत पहला HLA-मिसमैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल रहा. मरीज की हालत स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है. इस उपलब्धि से जटिल रक्त रोगों के मरीजों को नई उम्मीद मिली है.

Written By Ashutosh Sharma
Published: Oct 22, 2026, 05:26 PM IST | Updated: Oct 22, 2026, 05:33 PM IST
Image Credit: बोन मैरो ट्रांसप्लांट
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एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जयपुर के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. विभाग द्वारा राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के अंतर्गत 22 वर्षीय ट्रांसफ्यूजन-निर्भर फैंकोनी एनीमिया से पीड़ित मरीज का सफलतापूर्वक HLA-मिसमैच्ड एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) किया गया है. यह इस विभाग में फैंकोनी एनीमिया के लिए अपनी तरह का पहला HLA-मिसमैच्ड एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट है.

क्या होता है फैंकोनी एनीमिया? 
फैंकोनी एनीमिया एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें DNA की मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इसके कारण धीरे-धीरे बोन मैरो फेल्योर हो सकता है और मरीज को बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है. इस बीमारी में मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम और एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है. एलोजेनिक हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट इस बीमारी में बोन मैरो फेल्योर को ठीक करने का एकमात्र संभावित उपचारात्मक विकल्प है.

बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्यों है चुनौतीपूर्ण?
फैंकोनी एनीमिया में बोन मैरो ट्रांसप्लांट करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है. DNA की मरम्मत में जन्मजात दोष के कारण इन मरीजों में कीमोथेरेपी और रेडिएशन के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता होती है. इससे उपचार के दौरान गंभीर विषाक्त प्रभावों और अंगों को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए ऐसे मरीजों में विशेष रूप से अनुकूलित कंडीशनिंग रेजिमेन, सावधानीपूर्वक उपचार योजना और उत्कृष्ट सहायक चिकित्सा की आवश्यकता होती है, ताकि उपचार संबंधी जटिलताओं को कम करते हुए सफल प्रत्यारोपण सुनिश्चित किया जा सके. इसके अतिरिक्त, HLA-मिसमैच्ड डोनर से ट्रांसप्लांट करने पर ग्राफ्ट-वर्सेस-होस्ट डिजीज की रोकथाम, संक्रमण नियंत्रण और प्रत्यारोपण के बाद निगरानी जैसी चुनौतियां और बढ़ जाती हैं.


मरीज में सफलतापूर्वक engraftment हो चुका है. मरीज की वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति स्थिर है और आज उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है. फैंकोनी एनीमिया में प्रत्यारोपण की जटिलताओं और HLA-मिसमैच्ड डोनर से जुड़े अतिरिक्त जोखिमों को देखते हुए यह सफलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है.

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मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत हुआ इलाज
यह प्रत्यारोपण राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के अंतर्गत किया गया, जिससे मरीज को इस अत्याधुनिक एवं संभावित रूप से जीवनरक्षक उपचार का लाभ सरकारी स्वास्थ्य योजना के माध्यम से प्राप्त हो सका. यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ जटिल रक्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों तक उन्नत चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

डॉ. विष्णु शर्मा के नेतृत्व में पूरी हुई प्रक्रिया 
यह प्रक्रिया डॉ. विष्णु शर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग के नेतृत्व में संपन्न हुई. इसमें डॉ. देवेश पराशर, एसोसिएट प्रोफेसर का महत्वपूर्ण योगदान रहा. प्रत्यारोपण टीम, नर्सिंग स्टाफ तथा ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, पैथोलॉजी एवं प्रयोगशाला सेवाओं सहित सहयोगी विभागों के समन्वित प्रयासों से प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और मरीज में सफल engraftment एवं चिकित्सकीय सुधार संभव हो सका.

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बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं की दिशा में कदम
यह उपलब्धि एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जयपुर के नवगठित क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग की उन्नत बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएं प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है. विभाग में इस प्रकार का पहला HLA-मिसमैच्ड ट्रांसप्लांट संपन्न होना जटिल रक्त संबंधी बीमारियों के उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इस युवा मरीज का सफल प्रत्यारोपण और अस्पताल से छुट्टी राजस्थान में उन्नत हीमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे उन मरीजों के लिए नई आशा जगी है, जिन्हें विशेष एवं संभावित रूप से रोगमुक्त करने वाले उपचार की आवश्यकता होती है.
 

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About the Author

आशुतोष शर्मा वर्ष 2011 से मुख्यधारा की मीडिया में सक्रिय एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. डेढ़ दशक से अधिक के अपने समृद्ध पत्रकारिता करियर में उन्होंने इंडिया न्यूज़,ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों के साथ काम किया है. वर्तमान में वे ज़ी राजस्थान न्यूज़ में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं और राजधानी जयपुर से राज्य के महत्वपूर्ण विषयों को कवर कर रहे हैं.उनकी मुख्य विशेषज्ञता राजस्थान की राजनीति,प्रशासनिक फैसलों,चुनाव और जनहित के मुद्दों के साथ-साथ अपराध और कानून-व्यवस्था की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग में है. पुलिस मुख्यालय (PHQ), जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न जांच एजेंसियों से जुड़े बड़े व चर्चित मामलों की एक्सक्लूसिव कवरेज उनकी पत्रकारिता की प्रमुख पहचान रही है. ब्रेकअप न्यूज़,गहन राजनीतिक विश्लेषण और एक्सक्लूसिव क्राइम स्टोरीज़ के ज़रिए आशुतोष शर्मा ने राजस्थान मीडिया जगत में अपनी एक विश्वसनीय और प्रभावशाली पहचान बनाई है.
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